इस साल एचडीएफसी बैंक का बाजार पूंजीकरण लगभग एक-चौथाई साफ हो गया है और अगर विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की बिकवाली जारी रही, तो इस शेयर पर दबाव बना रह सकता है। हालांकि मूल्यांकन आकर्षक लग रहा है और यह वित्त वर्ष 2028 की अनुमानित बुक वैल्यू का लगभग 1.3 गुना है। लेकिन अल्पावधि जोखिम फंडामेंटलों से कम और टेक्नीकल पोजिशनों के कारण ज्यादा हैं। भारी बिकवाली के बावजूद विदेशी निवेशक इस शेयर में अपने बेंचमार्क भार की तुलना में ‘ओवरवेट’ बने हुए हैं, जिससे आगे और बिकवाली की गुंजाइश है।
मैक्वेरी के एक नोट में बताया गया है कि एचडीएफसी बैंक में एफपीआई का निवेश अभी भी एमएससीआई इंडिया इंडेक्स में उसके भार से ज्यादा है। यह इंडेक्स वैश्विक फंडों द्वारा ट्रैक किया जाने वाला अहम बेंचमार्क है।
मैक्वेरी का अनुमान है कि मार्च 2026 तक एफपीआई पोर्टफोलियो में एचडीएफसी बैंक का वेटेज 9.4–9.6 प्रतिशत रहा होगा, जबकि एमएससीआई इंडिया इंडेक्स में यह 6.95 प्रतिशत है। इसका मतलब है कि इसमें 240–260 आधार अंक की ओवरवेट पोजीशन हो सकती।
यह स्थिति तब है, जब मार्च तिमाही के दौरान एफपीआई ने लगभग 48 करोड़ शेयर बेच दिए, जिससे उनकी हिस्सेदारी 54.95 प्रतिशत से घटकर 51.8 प्रतिशत रह गई। मैक्वेरी ने कहा, ‘यह कहना सही होगा कि इतनी ज्यादा बिकवाली के बावजूद एफपीआई निवेशक एचडीएफसी बैंक में कम से कम 242 आधार अंक ओवरवेट हैं।’
दबाव तब और बढ़ सकता है जब घरेलू म्युचुअल फंडों के पास संभवतः और आपूर्ति को झेल पाने की सीमित क्षमता होगी, क्योंकि कई योजनाएं एक शएयर में अधिकतम 10 प्रतिशत की सीमा के करीब पहुंच रही हैं। म्युचुअल फंड आमतौर पर एफपीआई निकासी को संतुलित करते हैं। लगातार एफपीआई ओवरवेट और घरेलू खरीदारी की सीमा का यह समायोजन बताता है कि अगर वैश्विक निवेश कमजोर बना रहा तो इस शेयर में और गिरावट आ सकती है।