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कॉरपोरेट बॉन्ड्स होंगे डिजिटल! SEBI के टोकनाइजेशन प्लान से कैसे बदलेगा डेट मार्केट?

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केयरएज डेट मार्केट समिट में बोलते हुए पांडेय ने बताया कि यह पायलट प्रोजेक्ट अगले छह से नौ महीनों में लागू किया जा सकता है

Last Updated- May 26, 2026 | 10:32 PM IST
SEBI Chairman Tuhin Kanta Pandey
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी ) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय | फाइल फोटो

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी ) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने मंगलवार को कहा कि सेबी डिजिटल लेजर टेक्नॉलजी (डीएलटी) का इस्तेमाल करके कॉरपोरेट बॉन्ड के टोकनाइजेशन के लिए पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की योजना बना रहा है। केयरऐज डेट मार्केट समिट में चेयरमैन ने कहा, पायलट प्रोजेक्ट को छह से नौ महीनों में लागू किया जा सकता है। उन्होंने कहा, यह पायलट प्रोजेक्ट यह देखेगा कि क्या टोकनाइजेशन से सेटलमेंट में तेजी, बेहतर ट्रेसिबिलिटी, ऑटोमेटेड सर्विसिंग और ज्यादा पारदर्शिता आ सकती है।

सेबी चेयरमैन ने विस्तार से बताया कि डिजिटल लेजर टेक्नॉलजी का इस्तेमाल डिपॉजिटरी द्वारा गवर्नेंस, प्रबंधन और निगरानी के लिए किया जाता रहा है। सेबी अब यह संभावना तलाश रहा है कि इस टेक्नॉलजी का इस्तेमाल करते हुए क्या टोकनाइजेशन के जरिये कॉरपोरेट बॉन्डों को ज्यादा व्यावहारिक बनाया जा सकता है।

उन्होंने कहा, मूल बात यह कि इसमें टोकनाइजेशन के सभी फायदों के साथ तुरंत सेटलमेंट की सुविधा मिलती है। हमें टोकनाइजेशन से जुड़े जोखिमों को भी ध्यान में रखना होगा, खासकर क्वांटम को लेकर। हम सभी हितधारकों से राय लेंगे और एक टेक्नॉलजी और परिचालन मॉडल तैयार करेंगे। पांडेय ने कहा कि इस टेक्नॉलजी से बाजार में लिक्विडिटी बढ़ सकती है और सेटलमेंट की प्रक्रिया ज्यादा स्वायत्त हो सकती है। वित्तीय परिसंपत्तियों के टोकेनाइजेशन का मतलब है, प्रतिभूतियों को छोटी-छोटी यूनिटों में बदलना। इन्हें डिजिटल टोकन कहा जाता है। डिजिटल लेजर टेक्नॉलजी एक विकेंद्रीकृत प्रणाली है और यह कई सिस्टम में लेन-देन का रिकॉर्ड रखने में मदद करती है, जिससे यह प्रक्रिया सुरक्षित और पारदर्शी बन जाती है।

कॉरपोरेट बॉन्ड इंडेक्स डेरिवेटिव विकसित करने में हुई प्रगति के बारे में चेयरमैन ने कहा कि जैसे ही भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) इस साल की शुरुआत में प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए जारी दिशानिर्देशों के मसौदे को मंजूरी देगा, बाजार नियामक इन्हें लॉन्च कर देगा। बाजार नियामक भागीदारों, आरबीआई और वित्त मंत्रालय के साथ मिलकर एक मार्केट-मेकिंग फ़्रेमवर्क पर भी काम कर रहा है जिसकी घोषणा केंद्रीय बजट की गई है।

सेबी लिक्विडिटी को बेहतर बनाने, छोटे टिकट साइज के साथ खुदरा निवेशकों को डेट मार्केट तक पहुंच की सुविधा देने और संस्थानों को ब्याज दर के जोखिमों से बचने में मदद करने के मकसद से बॉन्ड ईटीएफ और कॉरपोरेट बॉन्ड इंडेक्स पर डेरिवेटिव विकसित करने की दिशा में भी काम कर रहा है। सेबी डेट मार्केट में लागत और प्रवेश की अड़चन कम करने के लिए डेट ब्रोकरों के लिए अलग नियामकीय वर्गीकरण की भी संभावना तलाश रहा है।

पांडेय ने कहा, इस बात की समीक्षा करने की भी जरूरत है कि क्या सिर्फ डेट में सूचीबद्ध कंपनियों को एलओडीआर नियमों के तहत उतनी ही सख्ती का पालन करना चाहिए, जितना कि इक्विटी में सूचीबद्ध कंपनियां करती हैं। हम सही समय पर इसकी समीक्षा करेंगे। पांडेय ने बताया कि रेटिंग और सेक्टरों के रूप में डेट मार्केट कुछ ही जगहों पर केंद्रित है, जिससे निवेशकों के पास विकल्पों की कमी हो जाती है।

इसके अलावा, जारी करने वालों का आधार भी सीमित है। शेयर बाजार में सूचीबद्ध 6,000 कंपनियों में से सिर्फ 776 ने ही डेट को सूचीबद्ध कराया है।

उन्होंने कहा, हमें डेट जारी करने वाली और कंपनियों की जरूरत है, जो डेट मार्केट को पूंजी के नियमित स्रोत के तौर पर देखें। सेकंडरी बाजार में लिक्विडिटी अभी भी कम है। ‘खरीदो और रखो’ की सोच वाले निवेशकों का आधार बाजार को स्थिरता देता है, लेकिन जब बॉन्ड की ट्रेडिंग कम होती है तो वॉल्यूम भी कम रहता है। ऐसे में कीमत का सही अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है, बाहर निकलना कठिन हो जाता है और नए निवेशक निवेश करने से हिचकिचाते हैं। चौथी बात यह है कि खुदरा निवेशकों की भागीदारी अभी भी कम है।

एफआईआई के बाहर जाने और बाजार मूल्यांकन की चिंताओं के बारे में बात करते हुए पांडेय ने कहा कि कुछ खास जगहों पर बाजार मूल्यांकन में बढ़ोतरी हो रही है, जिसकी वजह निवेशकों की जबरदस्त दिलचस्पी है।

उन्होंने कहा, असल बात यह है कि बाजार पूंजीकरण इस पर निर्भर करता है कि दुनिया भर की अलग-अलग कंपनियों का मूल्यांकन क्या है। इस समय निवेश के लिए सबसे पसंदीदा या लोकप्रिय कंपनियां वे हैं, जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से एआई से जुड़ी हुई हैं। या तो वे एआई से जुड़े क्षेत्रों में निवेश कर रही हैं या फिर चिप, मेमरी और एआई के हार्डवेयर इन्फ़्रास्ट्रक्चर में इस्तेमाल अन्य तरह के इलेक्ट्रॉनिक्स में निवेश कर रही हैं। इस समय निवेशकों के बीच यही रुझान  है और इसी के अनुसार बाजार मूल्यांकन में भी बदलाव होता रहता है।

इसके अलावा, ताइवान में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ने और उसके बाजार पूंजीकरण के भारत से आगे निकल जाने के संदर्भ में सेबी के चेयरमैन ने कहा, भारत एक बहुत ही विविध बाजार है। ताइवान में शेयर कुछ ही जगहों पर केंद्रित हैं। वहां टीएसएमसी और कुछ अन्य ऐसी खास कंपनियां हैं, जो इलेक्ट्रॉनिक आपूर्ति शृंखला के लिए बहुत अहम हैं। 

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First Published - May 26, 2026 | 3:31 PM IST

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