कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण भारतीय शेयर बाजारों में गुरुवार को गिरावट आई। अमेरिका-ईरान वार्ता को लेकर जारी अनिश्चितता और होर्मुज स्ट्रेट से आवाजाही में थोड़ी बाधाओं के बीच ब्रेंट क्रूड फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया। सेंसेक्स 853 अंक यानी 1.1 फीसदी की गिरावट के साथ 77,664 पर बंद हुआ। निफ्टी 205 अंक यानी 0.84 फीसदी की नरमी के साथ 24,173 पर टिका। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण 3 लाख करोड़ रुपये घटकर 466.4 लाख करोड़ रुपये (4.96 लाख करोड़ डॉलर) रह गया।
ब्रेंट क्रूड 13 अप्रैल के बाद पहली बार 100 डॉलर को पार कर गया। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के कारण तेल की कीमतें लगातार चार सत्रों से बढ़ रही हैं और दोनों ही पक्ष होर्मुज स्ट्रेट से आवाजाही को प्रतिबंधित करना जारी रखे हुए हैं। होर्मुज एक संकरा रास्ता है, जिससे वैश्विक तेल का करीब 20 फीसदी हिस्सा गुजरता है।
भारत कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील बना हुआ है क्योंकि वह ऊर्जा आयात पर बहुत ज्यादा निर्भर है और इसका असर महंगाई और चालू खाते के संतुलन पर पड़ सकता है। जहां एक ओर इस हफ्ते की शुरुआत में अमेरिका ने बिना कोई समय-सीमा तय किए युद्ध-विराम आगे बढ़ा दिया, वहीं दूसरी ओर ईरान ने कहा है कि जब तक अमेरिका की नौसैनिक पाबंदियां रहेंगी, तब तक वह बातचीत फिर से शुरू नहीं करेगा। ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उसकी क्षेत्रीय गतिविधियों को लेकर मतभेदों के कारण बातचीत अभी रुकी हुई है।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, घरेलू शेयर बाजारों में व्यापक गिरावट देखने को मिली क्योंकि अमेरिका-ईरान बातचीत में गतिरोध के बीच कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गईं। इससे निवेशकों का मनोबल कमजोर पड़ा। कमज़ोर वैश्विक संकेतों, विदेशी निवेश के लगातार बाहर जाने, रुपये के कमजोर होने और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड्स के बढ़ने से जोखिम से बचने का यह माहौल और भी गहरा गया।
बाजार में चढ़ने व गिरने वाले शेयरों का अनुपात कमजोर रहा और 2,602 शेयर गिरे जबकि 1,681 में बढ़ोतरी हुई।
रेलिगेयर ब्रोकिंग के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (शोध) अजित मिश्र ने कहा, कच्चे तेल के एक बार फिर 100 डॉलर का आंकड़ा पार करने के साथ ही निफ्टी 24,000–24,200 के समर्थन जोन में आ गया है। 20 डीईएमए लगभग 23,900 पर है, जिससे सकारात्मक रुझान बनाए रखने के लिए यह महत्त्वपूर्ण जोन बन गया है। इस बीच, कुछ खास सेक्टर और थीम मजबूती दिखा रहे हैं। ऐसे में निवेशकों को शेयर चुनने पर ही ध्यान देना चाहिए।
सेंसेक्स में शामिल करीब 80 फीसदी शेयर लाल निशान में बंद हुए। एचडीएफसी बैंक 1.9 फीसदी टूटा और इंडेक्स को नीचे लाने में इसका योगदान सबसे ज्यादा रहा। इसके बाद आईसीआईसीआई बैंक का स्थान रहा, जिसमें 1.5 फीसदी की गिरावट आई।
व्यापक बाजार अपेक्षाकृत मजबूत रहे। निफ्टी मिडकैप 100 में 0.4 फीसदी और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 0.7 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। विभिन्न सेक्टरों में निफ्टी ऑटो का प्रदर्शन सबसे खराब रहा और इसमें 2.35 फीसदी की गिरावट आई।