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ऑपरेशन सिंदूर और वैश्विक तनाव से चमके Defence Stocks, एक साल में 355% तक रिटर्न

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भू-राजनीतिक तनाव, बढ़ते रक्षा खर्च और आत्मनिर्भर भारत अभियान से डिफेंस सेक्टर में जबरदस्त तेजी

Last Updated- May 07, 2026 | 10:47 AM IST
Defence Stocks
Representational Image

Defence Stocks India:  विगत एक वर्ष में रक्षा शेयरों ने उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की है। इसकी वजह ऑपरेशन सिंदूर के बाद इस क्षेत्र में नई रुचि और वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों में व्यापक इजाफा है। 18 रक्षा शेयरों के समूह ने औसतन सालाना 67 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की है। इनमें से केवल दो को छोड़कर सभी शेयरों ने इस अवधि में सकारात्मक प्रतिफल दिया है। सबसे बड़ी लाभार्थी एमटीएआर टेक्नॉलजीज रही, जिसने 355 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, इसके बाद एक्सिसकेड्स टेक्नॉलजीज ने 172 प्रतिशत और अपोलो माइक्रोसिस्टम्स ने 165 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। इन 18 कंपनियों का संयुक्त बाजार पूंजीकरण लगभग 2.3 लाख करोड़ रुपये बढ़ा है।

ऑपरेशन सिंदूर से तात्पर्य भारत द्वारा 7 मई 2025 की सुबह पाकिस्तान और पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर में चुनिंदा ठिकानों पर किए गए सैन्य हमलों से है। ये हमले 22 अप्रैल 2025 को जम्मू कश्मीर के पहलगाम में नागरिकों पर हुए आतंकी हमले के जवाब में किए गए थे।

चुनौतियों के बावजूद रक्षा क्षेत्र के शेयर उछले

देश का शेयर बाजार कई चुनौतियों से जूझ रहा है जबकि इस बीच रक्षा क्षेत्र के शेयर मजबूत बने रहे हैं। शेयर बाजारों को कॉर्पोरेट मुनाफे में कमी, भारत-अमेरिका शुल्क संबंधी तनाव और पश्चिम एशिया में छिड़ी लड़ाई ने प्रभावित किया है। इस लड़ाई के कारण तेल कीमतों में भी अस्थिरता आई है। निफ्टी इंडिया डिफेंस इंडेक्स, जो रक्षा शेयरों का सूचकांक है वह पिछले 12 महीनों में 32 प्रतिशत बढ़ा है, और इसके घटकों का बाजार पूंजीकरण लगभग 2.4 लाख करोड़ रुपये बढ़ा है।

इसी अवधि में बेंचमार्क निफ्टी 0.3 प्रतिशत गिरा जबकि निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉल कैप 100 प्रत्येक 13 प्रतिशत बढ़े। यह तेजी वैश्विक संघर्षों और तनावों से भी समर्थित रही है जिनमें लंबा खिंचता रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया में अस्थिरता और प्रमुख शक्तियों के बीच बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा शामिल है। इन सभी ने विश्व स्तर पर रक्षा खर्च को बढ़ावा दिया है।

भारत का रक्षा उद्योग एक निर्णायक मोड़ पर: बाजार विशेषज्ञ

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक भारत का रक्षा उद्योग एक निर्णायक मोड़ पर है जहां यह मुख्यतः आयात-निर्भर व्यवस्था से अधिक आत्मनिर्भर और निर्यात-उन्मुख मॉडल की ओर बढ़ रहा है। इस परिवर्तन को मजबूत नीतिगत समर्थन, बढ़ते बजट आवंटन और स्वदेशीकरण के लिए निरंतर प्रयासों ने आधार प्रदान किया है। निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी, रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों के साथ मिलकर प्रतिस्पर्धा को मजबूत कर रही है, क्रियान्वयन क्षमता में सुधार कर रही है और मूल्य श्रृंखला में नवाचार को बढ़ावा दे रही है।

मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशियल सर्विसेज के शोध (परिसंपत्ति प्रबंधन) प्रमुख सिद्धार्थ खेमका ने कहा, ‘वैश्विक भावना बहुत मददगार रही है। विभिन्न क्षेत्रों में जारी भूराजनीतिक तनावों ने विश्व स्तर पर रक्षा खर्च में वृद्धि की है। इससे जाहिर तौर पर इस क्षेत्र को लाभ मिला है। भारत की रक्षा कंपनियां अब वैश्विक रुखि देख रही हैं। निर्यात तेजी से बढ़ रहा है और घरेलू मांग से परे एक नया मार्ग खुल रहा है।’

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First Published - May 7, 2026 | 9:01 AM IST

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