facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

क्या जेन स्ट्रीट ने भारत-सिंगापुर टैक्स ट्रीटी का दुरुपयोग किया? शिकंजा कसने की तैयारी में सीबीडीटी

Advertisement

सीबीडीटी ने सलाहकार फर्म ईवाई और ब्रोकरेज फर्म नुवामा से पहले ही आंकड़े एकत्र कर लिए हैं और अपने डेटा संग्रह को बढ़ा रहा है।

Last Updated- September 16, 2025 | 10:19 PM IST
Jane Street

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) अमेरिकी ट्रेडिंग फर्म जेन स्ट्रीट के खिलाफ सिंगापुर के साथ भारत की कर संधि के प्रावधानों के कथित दुरुपयोग पर साक्ष्यों के आधार पर मामला बना रहा है। वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने यह जानकारी दी। बोर्ड को उम्मीद है कि मामला स्थापित हो जाने के बाद जवाबदेही तय की जाएगी। सीबीडीटी ने सलाहकार फर्म ईवाई और ब्रोकरेज फर्म नुवामा से पहले ही आंकड़े एकत्र कर लिए हैं और अपने डेटा संग्रह को बढ़ा रहा है। अधिकारी के अनुसार, इसके बाद वित्त मंत्रालय को रिपोर्ट सौंपी जाएगी। हालांकि इसके लिए कोई समय-सीमा तय नहीं की गई है।

एक वरिष्ठ कर अधिकारी ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि जांच अभी जारी है और भारत में कई स्रोतों से जानकारी जुटाई जा रही है। रिपोर्ट वित्त मंत्रालय को सौंपी जाएगी। अधिकारी ने कहा, मामला बनाने की प्रक्रिया लंबी होती है। एक बार मामला बन के बाद कर देनदारी अपने आप तय हो जाएगी। इस बारे में जानकारी के लिए जेन स्ट्रीट और वित्त मंत्रालय को भेजे गए ईमेल का जवाब नहीं मिला।

अधिकारियों ने बताया कि जांच में जटिल कानूनी मुद्दे शामिल हैं। इनमें यह भी शामिल है कि जेन स्ट्रीट की भारतीय इकाई का प्रभावी प्रबंधन स्थल (पीओईएम) क्या वाकई विदेश में था। इस आकलन का इकाई की कर देयता पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है क्योंकि इससे यह तय होता है कि क्या सिर्फ भारतीय स्रोतों से प्राप्त आय पर यहां कर लगेगा या कंपनी की संपूर्ण वैश्विक आय भारत में कर योग्य होगी।

पीओईएम एक वैशिविक स्तर पर मान्यता प्राप्त कर अवधारणा है जिसे आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) ने स्वीकार किया है। इसका अर्थ है कि किसी विदेशी कंपनी पर भारत में कर लगाया जा सकता है अगर उसके प्रमुख निर्णय और नियंत्रण पूरी तरह से भारत में स्थित हों। चूंकि कंपनी की रेजीडेंसी हर साल तय होती है और पीओईएम की समीक्षा भी सालाना होती है।

अधिकारी इस बात का भी अध्ययन कर रहे हैं कि क्या सामान्य कर निरोधक नियम (जीएएआर) लागू किए जा सकते हैं। अधिकारी ने कहा, अभी तक किसी को भी अंतिम रूप नहीं दिया गया है। जीएएआर नियम कर विभाग को किसी संधि या लेन-देन के लाभों से इनकार करते हैं, अगर यह पाया जाता है कि ऐसा मुख्य रूप से कर भुगतान से बचने के लिए किया गया है।

Advertisement
First Published - September 16, 2025 | 10:15 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement