वर्ष 2026 की पहली तिमाही में इक्विटी पूंजी बाजार (ईसीएम) से जुड़ी अंडरराइटिंग फीस में जोरदार बढ़ोतरी दर्ज की गई। निवेश बैंकिंग गतिविधियों में सुस्ती के बावजूद इसमें बढ़िया चमक आई है। एलएसईजी की ओर से मुहैया बाजार आंकड़ों के अनुसार ईसीएम अंडरराइटिंग फीस में 39 प्रतिशत का इजाफा हुआ और यह 8.43 करोड़ डॉलर तक पहुंच गई। यह पिछले साल की समान अवधि की तुलना में काफी अधिक है। हालांकि, इसके विपरीत भारत में कुल निवेश बैंकिंग फीस में गिरावट देखी गई और कुल फीस 31 प्रतिशत घटकर 23.14 करोड़ डॉलर रह गई।
वर्ष 2026 की पहली तिमाही में निवेश बैंकिंग फीस का कुल आंकड़ा 2018 के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। इसकी मुख्य वजह विलय और अधिग्रहण (एमऐंडए) तथा कर्ज बाजार की कमजोर गतिविधियां रही, जिन पर बढ़ते वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव का असर पड़ा।
इसके बावजूद ईसीएम फीस में मजबूती दिखाई दी। यह तब हुआ जब शेयर बाजार के जरिये फंड जुटाने की रफ्तार धीमी रही। इस तिमाही में कंपनियों ने कुल 5.9 अरब डॉलर जुटाए जो पिछले साल की इसी तिमाही की तुलना में 9.3 फीसदी कम है। ऐसे सौदों की संख्या में भी 18.3 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
उद्योग के जानकारों के अनुसार फीस में बढ़ोतरी की बड़ी वजह यह रही कि इस बार आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) जैसे वे सौदे ज्यादा हुए जिनमें अधिक फीस मिलती है। इसी कारण कुल फीस में मजबूती रही। पहली तिमाही में आईपीओ के जरिये जुटाई गई रकम 7.8 फीसदी बढ़कर 2.5 अरब डॉलर हो गई। यह 2018 के बाद पहली तिमाही का सबसे मजबूत प्रदर्शन है। हालांकि, आईपीओ की संख्या में 14 फीसदी की कमी आई।
वहीं, कुल ईसीएम फंड की प्रक्रिया में पहले से सूचीबद्ध कंपनियों के दोबारा शेयर जारी करने (फॉलो-ऑन ऑफर) की हिस्सेदारी 58 फीसदी रही जिसमें 18.7 फीसदी की गिरावट आई और यह राशि 3.4 अरब डॉलर पर आ गई लेकिन इसने फीस में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया।
तिमाही में कुछ बड़े ईसीएम सौदे भी हुए जिनमें लगभग 8,000 करोड़ रुपये का विशाल मेगा मार्ट की बड़ी डील, 6,000 करोड़ रुपये का राजमार्ग इन्फ्रा इनवेस्टमेंट ट्रस्ट का आईपीओ और सरकार द्वारा बीएचईएल में 4,000 करोड़ रुपये से अधिक का ऑफर फॉर सेल शामिल है।
इसके विपरीत, निवेश बैंकिंग के अन्य क्षेत्रों में तेज गिरावट देखी गई। विलय और अधिग्रहण से जुड़ी परामर्श फीस घटकर आधी रह गई और 7.19 करोड़ डॉलर पर आ गई। वहीं, डेट कैपिटल मार्केट (डीसीएम) की अंडरराइटिंग फीस 44 फीसदी गिरकर 4.72 करोड़ डॉलर रह गई। एलएसईजी के आंकड़ों के मुताबिक सिंडिकेटेड लेंडिंग फीस में भी 36 फीस की कमी आई और यह 2.81 करोड़ डॉलर पर पहुंच गई।
निवेश बैंकिंग फीस में ऐक्सिस बैंक सबसे आगे रहा। बैंक ने 2.19 करोड़ डॉलर की कमाई की और कुल फीस में 9.5 फीसदी हिस्सेदारी हासिल की। इस दौरान इक्विटी कैपिटल मार्केट की रैंकिंग में कोटक महिंद्रा बैंक शीर्ष पर रहा। बैंक ने 73.23 करोड़ डॉलर के इक्विटी इश्यू का प्रबंधन किया और 12.4 फीसदी बाजार हिस्सेदारी हासिल की।