ऐसे समय में जब कुछ निवेशक अपने निवेश से ‘तुरंत फायदा चाहते हैं, मार्सेलस इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के संस्थापक और मुख्य निवेश अधिकारी सौरभ मुखर्जी ने मुंबई में पुनीत वाधवा को दिए इंटरव्यू में बताया कि लॉन्ग-टर्म कंपाउंडिंग का जादू अभी भी बना हुआ है और ‘कॉफी कैन’ कंपाउंडिंग काम कर रही है। उनके अनुसार, जो चीज बदली है, वह यह है कि बढ़ोतरी देने वाले इन निवेशों की प्रकृति अब कंज्यूमर स्टेपल्स और डिस्क्रेशनरी फ्रैंचाइजी से हटकर हेल्थकेयर और निर्यात-केंद्रित कंपनियों की ओर हो गई है। बातचीत के मुख्य अंश:
क्या एक परिसंपत्ति वर्ग के तौर पर इक्विटी में निवेश का आकर्षण घट रहा है? पिछले दो साल में बाजारों के प्रमुख सूचकांको ने कुछ खास प्रदर्शन नहीं किया है।
भारत को छोड़कर लगभग हर देश के शेयर बाजार ने पिछले दो साल में अच्छा रिटर्न दिया है। इसलिए इक्विटी में निवेश की स्थिति अच्छी है और यह पहले की तरह ही पसंदीदा भी है। भारत के मामले में कमाई में लंबे समय से चल रही सुस्ती और महंगे मूल्यांकनों के कारण 2024 के आखिर से रिटर्न कम हो गया है। हालांकि, यह दौर भी जल्द ही बीत जाएगा।
क्या आपको लगता है कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निवेश करने का यह अच्छा समय है, क्योंकि भारत में रिटर्न कम हैं? यदि हां, तो किन बाजारों में और कैसे निवेश किया जा सकता है?
निवेश में विविधता इसलिए है और यह काम भी करती है, क्योंकि हम भविष्य का अंदाजा नहीं लगा सकते। कोई नहीं जानता कि भविष्य में क्या होने वाला है, इसलिए स्वर्गीय हैरी मार्कोविट्ज ने दुनिया को सिखाया कि वे अपने निवेश को अलग-अलग परिसंपत्ति वर्गों में रखें, जिनका आपस में कम संबंध हो। चूंकि भारतीय इक्विटी का अमेरिकी इक्विटी के साथ सह-संबंध पिछले 20 साल में सबसे कम हो गया है। इसलिए भारतीयों के लिए दुनिया में अपना निवेश करने का तर्क काफी मजबूत है।
क्या भारत में कम्पाउंडिंग और ‘कॉफी कैन’ पोर्टफोलियो का दौर खत्म हो गया है?
अच्छी बात यह है कि दीर्घावधि कंपाउंडिंग अभी भी है और ‘कॉफी कैन’ कंपाउंडिंग काम कर रही है। जो बदला है, वह यह है कि इन कंपाउंडर्स का रुझान अब कंज्यूमर स्टेपल्स और डिस्क्रेशनरी फ्रैंचाइजी से हटकर हेल्थकेयर और निर्यात-केंद्रित कंपनियों की ओर हो गया है।
निवेशक और संपत्ति प्रबंधन उन स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड (एसआईएफ) का सामना कैसे कर रहे हैं, जिनमें कम निवेश राशि की अनुमति है? क्या वे आपके ग्राहक आधार में सेंध लगा रहे हैं और वित्तीय स्थिति को नुकसान पहुंचा रहे हैं?
न तो मैंने और न ही हमारी बिक्री टीम ने यह कहा है कि पीएमएस (पोर्टफोलियो प्रबंधन सेवा) के निवेशक एसआईएफ की ओर जा रहे हैं। हमें जो मुख्य बदलाव दिख रहा है, वह यह है कि अमीर भारतीय अब ज्यादा से ज्यादा वैश्विक विविधता में दिलचस्पी ले रहे हैं। आईएफएससीए, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और सरकार द्वारा तेजी से लागू किए गए नियामकीय सुधारों की वजह से अब वैश्विक स्तर पर निवेश करना ज्यादा किफायती और कर के लिहाज से फायदेमंद हो गया है।
मौजूदा बाजारों में आपको पैसे कमाने के अवसर कहां दिख रहे हैं? कैलेंडर वर्ष 2026 में अभी तक आपने अपने पोर्टफोलियो में किस तरह का बदलाव किया है?
भारत में, हम निर्यात-केंद्रित विनिर्माण कंपनियों में निवेश कर रहे हैं। विकसित बाजारों में हम रक्षा और एरोस्पेस, पावर टर्बाइन और प्लांट निर्माण, डेटा सेंटर सप्लाई चेन और अल्ट्रा-लक्जरी उपभोग से जुड़े सेक्टरों में निवेश कर रहे हैं।