Stock Market FIIs Selling: ईरान युद्ध में तनाव कम होने के संकेत नहीं दिख रहे हैं। ऐसे में इस हफ्ते भी बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की आशंका है। सप्ताहांत में अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी कि अगर उसने होर्मुज स्ट्रेट नहीं खोला तो उसके पावर प्लांट्स पर हमला किया जाएगा। वहीं, ईरान ने भी कहा है कि अगर ट्रंप ने ऐसा कदम उठाया तो वह पश्चिम एशिया की अहम सुविधाओं को निशाना बनाएगा। चौथे सप्ताह में पहुंच चुका यह युद्ध तेल की कीमतों को प्रभावित कर रहा है और दुनिया भर के शेयर बाजारों में अनिश्चितता बनी हुई है।
भारतीय बाजार में इस महीने काफी उतार-चढ़ाव रहा। इसका सबसे बड़ा कारण अमेरिका-इजरायल का ईरान के खिलाफ युद्ध है। इस महीने अब तक सेंसेक्स में करीब 10 प्रतिशत की गिरावट आई है। निफ्टी 50 में 10 फीसदी की गिरावट आई है। निफ्टी मिडकैप 150 और निफ्टी स्मॉलकैप का हाल भी इसी तरह है। सेंसेक्स अपने हाई लेवल से 15 चुका है।
अमेरिका-इजरायल और ईरान में 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से बेंचमार्क इंडेक्स 12 प्रतिशत से ज्यादा टूट गए हैं। सेंसेक्स में पिछले एक महीने में 12 प्रतिशत या 10,000 अंक से ज्यादा की गिरावट आई है। निफ्टी-50 भी पिछले एक महीने में 12 प्रतिशत या करीब 3,000 अंक टूट चुका है।
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अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते संघर्ष के बाद विदेशी निवेशकों ने भारत के शेयर बाजार से 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा पैसा निकाल लिया है। इस तनाव के कारण तेल की कीमतें बढ़ी हैं और अर्थव्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ी है। 26 फरवरी से 20 मार्च के बीच विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 1,00,040 करोड़ रुपये की बिकवाली की। करीब 16 ट्रेडिंग सेशन और हर दिन लगभग 6 घंटे के हिसाब से देखें, तो हर घंटे करीब 1,000 करोड़ रुपये बाजार से निकले हैं। साल 2026 में अब तक हुए 50 ट्रेडिंग सेशन में से 33 में विदेशी निवेशकों ने बिकवाली की है।
पिछले कुछ सालों से विदेशी निवेशक लगातार बिकवाली कर रहे हैं। साल 2025 में उन्होंने भारतीय बाजार से 2.4 लाख करोड़ रुपये निकाले। उस साल 241 कारोबारी सेशन में से 156 में उन्होंने बिकवाली की थी। साल 2024 में विदेशी निवेशकों ने 1.29 लाख करोड़ रुपये की बिकवाली की थी। उस समय 238 कारोबारी सेशन में 134 में एफआईआई बिकवाली रहे।
इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म अल्फानीति फिनटेक के को-फाउंडर यूआर भट्ट के अनुसार, मौजूदा युद्ध ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) को फिर से जोखिम से दूर रहने पर मजबूर कर दिया है। मार्च में अब तक विदेशी निवेशकों ने 82,700 करोड़ रुपये की बिकवाली की। यह अक्टूबर 2024 के बाद उनकी सबसे बड़ी मासिक बिकवाली है।
भट्ट के मुताबिक रुपये के कमजोर होने से निवेशकों को बिना बेचने के भी नुकसान हो रहा है। तेल और रोजमर्रा की चीजों की बढ़ती कीमतें कंपनियों के मुनाफे पर दबाव डाल रही हैं। ऐसे में बाजार में स्थिरता आने तक निवेशक सतर्क बने हुए हैं।
जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड में मुख्य निवेश रणनीतिकार ने कहा कि मिडिल ईस्ट का भू-राजनीतिक तनाव एफपीआई की बिकवाली को और तेज कर रहा है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि वैश्विक बाजारों में कमजोरी, रुपये में गिरावट और महंगे कच्चे तेल का भारत की आर्थिक वृद्धि और कॉरपोरेट आय पर संभावित असर निवेशकों की चिंता बढ़ा रहा है।
इसके अलावा रुपये की कमजोरी भी विदेशी निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94 के करीब बना हुआ है, जिससे निवेश पर रिटर्न प्रभावित होता है। वहीं फरवरी में आई तेज खरीदारी के बाद मार्च में मुनाफावसूली का दौर भी देखने को मिला है। कंपनियों के चौथी तिमाही के नतीजों को लेकर भी मिश्रित संकेत मिल रहे हैं, जिससे मार्जिन पर दबाव की आशंका जताई जा रही है।