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FPI की एसेट्स इस साल रही सपाट, IT होल्डिंग्स में ₹2 लाख करोड़ की गिरावट

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NSDL से संकलित आंकड़ों के अनुसार, जुलाई के अंत तक आईटी क्षेत्र का एयूसी 5.3 लाख करोड़ रुपये रहा था जबकि 2024 के अंत तक यह 7.3 लाख करोड़ था।

Last Updated- August 21, 2025 | 9:13 AM IST
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वैश्विक फंडों की ऐसेट अंडर कस्टडी (एयूसी) भारत में इस साल अब तक सपाट रही है। इनकी सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) होल्डिंग्स में 2 लाख करोड़ रुपये की गिरावट आई है, जो वित्तीय शेयरों में वृद्धि से संतुलित हो गई है। एनएसडीएल से संकलित आंकड़ों के अनुसार, जुलाई के अंत तक आईटी क्षेत्र का एयूसी 5.3 लाख करोड़ रुपये रहा था जबकि 2024 के अंत तक यह 7.3 लाख करोड़ था, जो 27.2 फीसदी की गिरावट दर्शाता है। इस क्षेत्र की होल्डिंग में यह गिरावट इस साल सुस्त परिदृश्य के बीच विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) द्वारा 50,000 करोड़ रुपये की भारी बिकवाली के बाद आई है। इस साल अब तक निफ्टी आईटी इंडेक्स में 18 फीसदी की गिरावट आई है, जो प्रमुख सेक्टरों में सबसे ज्यादा है। इसी अवधि में निफ्टी में 6 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।

परिभाषा के अनुसार, ऐसेट अंडर कस्टडी एफपीआई के पास रही इक्विटी का कुल बाजार मूल्य है। वैश्विक फंडों की संपत्ति के मूल्य में गिरावट वैश्विक निवेशकों द्वारा की गई बिकवाली, मुद्रा के अवमूल्यन और संपत्ति की कीमतों में गिरावट का परिणाम हो सकती है।
इक्विनॉमिक्स रिसर्च के संस्थापक जी चोकालिंगम ने कहा कि आईटी शेयरों के एयूसी में गिरावट मुख्यतः एफपीआई की बिकवाली के कारण है, न कि मार्क-टु-मार्केट वैल्यू में गिरावट के कारण। हाल के महीनों में कीमतों में इतनी गिरावट नहीं आई है कि उसे समझा जा सके, इसलिए इसका ज्यादा संबंध वास्तविक बिकवाली से है।

सोविलो इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के फंड मैनेजर संदीप अग्रवाल ने कहा कि टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), इन्फोसिस और एचसीएल टेक्नॉलजीज जैसी बड़ी आईटी कंपनियां सालाना 3 से 7 फीसदी से अधिक की वृद्धि हासिल करने के लिए संघर्ष कर रही हैं, जबकि उनके शेयर अग्रिम आय के 15-25 गुना पर कारोबार कर रहे हैं।

अग्रवाल ने कहा कि बढ़ती वेतन लागत और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का प्रभाव (जो समग्र प्रयास की जरूरतों को कम कर रहा है) इस क्षेत्र की वृद्धि क्षमता को और कम कर रहा है। उन्होंने कहा कि आईटी शेयरों का भारांक ज्यादा होता है और वे ज्यादा लिक्विड होते हैं, इसलिए बिकवाली स्वाभाविक रूप से ज्यादा आक्रामक होती है।

दिग्गज आईटी शेयरों के अलावा टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुओं में एफपीआई की होल्डिंग की कीमत 13 फीसदी घटकर 2.18 लाख करोड़ रुपये रह गई, जबकि रियल्टी शेयरों का मूल्य 18 फीसदी घटकर 1.7 लाख करोड़ रुपये रह गया।

अग्रवाल ने कहा कि कुछ भारतीय निवेशक अब आईटी शेयरों को अर्ध एफएमसीजी शेयरों के रूप में देखते हैं क्योंकि एफएमसीजी कंपनियां भी कोई वृद्धि नहीं दिखाती हैं। उन्होंने कहा, कुछ फंड मैनेजरों का तर्क है कि अगर आईटी उसी 5 फीसदी की वृद्धि के साथ 15-20 गुना कमाई पर उपलब्ध हो तो यह अंततः एफएमसीजी से ज्यादा आकर्षक हो सकता है।

वित्तीय शेयरों में वृद्धि से संतुलन

सकारात्मक पक्ष यह है कि वित्तीय सेवा क्षेत्र के शेयरों में हिस्सेदारी जुलाई के अंत तक 11 फीसदी यानी 2.27 लाखइ करोड़ रुपये बढ़कर 22.7 लाख करोड़ रुपये हो गई। इसके अलावा, दूरसंचार क्षेत्र में हिस्सेदारी 28 फीसदी की वृद्धि के साथ 3.49 लाख करोड़ रुपये हो गई। कुल मिलाकर एफपीआई एयूसी दिसंबर 2024 से 1 फीसदी की मामूली वृद्धि के साथ जुलाई 2025 में 71.9 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया।

अग्रवाल ने कहा कि निजी बैंक एफपीआई निवेश के प्रमुख लाभार्थी के रूप में उभर रहे हैं। उन्होंने कहा, अधिकांश निजी बैंक उचित मूल्यांकन के साथ-साथ भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि के लिए मज़बूत प्रतिनिधि बन रहे हैं। उन्होंने कहा, यही कारण है कि एफपीआई वित्तीय क्षेत्र विशेष रूप से निजी बैंकों में धन का निवेश जारी रखे हुए हैं और यह प्रवृत्ति जारी रहने की संभावना है।

चोकालिंगम ने कहा कि एफपीआई वित्तीय सेवा क्षेत्र को पसंद कर रहे हैं क्योंकि इस क्षेत्र में अभी भी 9-10 फीसदी की ऋण वृद्धि की प्रतिबद्धता है, इसे ब्याज दरों में संभावित गिरावट का लाभ मिल रहा है और यह अमेरिकी व्यापार के बजाय घरेलू मांग से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि आकर्षक मूल्यांकन और बैंक तथा वित्तीय कंपनियां अपेक्षाकृत कम प्राइस टु बुक गुणकों पर कारोबार कर रही हैं। लिहाजा इसे लेकर अपील और बढ़ा रहे हैं।
निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स और निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स क्रमशः 1.05 गुना और 2.1 गुना के प्राइस टु बुक वैल्यू पर कारोबार कर रहे हैं।

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First Published - August 21, 2025 | 9:13 AM IST

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