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FPI की बिकवाली जारी, 2026 में अब तक शेयर बाजार से ₹2.87 लाख करोड़ निकाले

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विश्लेषकों के अनुसार, अन्य उभरते बाजारों की तुलना में भारतीय शेयरों का अपेक्षाकृत ऊंचा मूल्यांकन भी विदेशी निवेशकों के ज्यादा सतर्क रुख का कारण बना है

Last Updated- June 14, 2026 | 1:43 PM IST
Foreign Portfolio Investors (FPIs)
प्रतीकात्मक तस्वीर | फोटो: एआई जनरेटेड

FPI Outflow: बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, वैश्विक आर्थिक वृद्धि को लेकर चिंताओं और रुपये की लगातार कमजोरी के बीच विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने 14 जून तक भारतीय शेयर बाजार से 62,853 करोड़ रुपये से ज्यादा की निकासी की है। नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) के आंकड़ों के अनुसार, साल 2026 में अब तक एफपीआई भारतीय शेयर बाजार से लगभग 2.87 लाख करोड़ रुपये निकाल चुके हैं। यह राशि पूरे वर्ष 2025 में हुई 1.66 लाख करोड़ रुपये की निकासी से भी कहीं ज्यादा है।

ग्लोबल फैक्टर तय करेंगे FPI की चाल

बजाज ब्रोकिंग के वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च) पबित्रो मुखर्जी ने कहा कि आने वाले सप्ताह में एफपीआई इन्वेस्टमेंट फ्लो अमेरिकी-ईरान शांति वार्ता, अमेरिकी फेडरल ओपन मार्केट कमेटी के नीतिगत फैसले, बैंक ऑफ जापान की ब्याज दर समीक्षा तथा प्रमुख केंद्रीय बैंकों की टिप्पणियों पर निर्भर करेगा।

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फरवरी छोड़ पूरे साल FPI बिकवाल

आंकड़ों के अनुसार, फरवरी को छोड़कर 2026 के हर महीने में एफपीआई शुद्ध विक्रेता रहे हैं। जनवरी में उन्होंने भारतीय शेयर बाजार से 35,962 करोड़ रुपये निकाले थे, जबकि फरवरी में 22,615 करोड़ रुपये का निवेश किया था, जो पिछले 17 महीनों का सबसे बड़ा मासिक निवेश था। हालांकि मार्च में रुख फिर बदल गया और विदेशी निवेशकों ने रिकॉर्ड 1.17 लाख करोड़ रुपये की निकासी की। इसके बाद अप्रैल में 60,847 करोड़ रुपये और मई में 32,963 करोड़ रुपये की निकासी हुई। जून के पहले दो सप्ताह में ही निकासी 62,853 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है।

उभरते बाजारों से निकल रहा निवेश

मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के हेड ऑफ मैनेजर रिसर्च हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा कि प्रमुख केंद्रीय बैंकों की ब्याज दरों की दिशा, भू-राजनीतिक घटनाक्रम और वैश्विक वृद्धि संबंधी चिंताओं के कारण निवेशकों के बीच अनिश्चितता बनी हुई है। उन्होंने कहा कि ऐसे माहौल में निवेशक जोखिम कम करने की रणनीति अपनाते हुए उभरते बाजारों से धन निकालकर विकसित बाजारों और अपेक्षाकृत सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर रुख करते हैं।

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FPI का इक्विटी से बॉन्ड की ओर रुख

विश्लेषकों के अनुसार, अन्य उभरते बाजारों की तुलना में भारतीय शेयरों का अपेक्षाकृत ऊंचा मूल्यांकन भी विदेशी निवेशकों के ज्यादा सतर्क रुख का कारण बना है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि रुपये में लगातार गिरावट भी निकासी की प्रमुख वजह है। भारतीय मुद्रा वर्ष 2026 में अब तक लगभग छह फीसदी और पिछले एक वर्ष में करीब 10 फीसदी कमजोर हुई है।

शेयर बाजार से निकासी के उलट जून के पहले पखवाड़े में एफपीआई ने एफएआर रूट के जरिये बॉन्ड प्रतिभूतियों में 13,200 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश किया है। इस रूट से वर्ष 2026 में अब तक कुल निवेश लगभग 28,000 करोड़ रुपये पहुंच चुका है।

(PTI इनपुट के साथ)

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First Published - June 14, 2026 | 1:43 PM IST

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