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FPIs की बड़ी बिकवाली: अप्रैल में ₹60,847 करोड़ निकाले, 2026 में आउटफ्लो ₹1.92 लाख करोड़ पार

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FPI Sell-Off Intensifies: भूराजनीतिक तनाव और महंगे क्रूड से बाजार पर दबाव, निवेशकों का रुख ‘रिस्क-ऑफ’

Last Updated- May 01, 2026 | 12:39 PM IST
FPI Outflows India 2026
Representational Image

FPI Outflows India 2026: विदेशी निवेशकों (FPIs) ने भारतीय शेयर बाजार से लगातार बिकवाली जारी रखी और अप्रैल में ₹60,847 करोड़ (6.5 अरब डॉलर) की निकासी की। इसकी मुख्य वजह बढ़ते भूराजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता रही, जिससे निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता प्रभावित हुई। हालिया आउटफ्लो के साथ ही 2026 के पहले चार महीनों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) का कुल आउटफ्लो ₹1.92 लाख करोड़ तक पहुंच गया है, जो पूरे 2025 के ₹1.66 लाख करोड़ के आउटफ्लो से काफी ज्यादा है। यह आंकड़े NSDL के डेटा से सामने आए हैं।

2026 में फरवरी को छोड़कर सभी महीनों में FPI नेट सेलर रहे। जनवरी में ₹35,962 करोड़ की निकासी हुई, जबकि फरवरी में ₹22,615 करोड़ का निवेश आया, जो पिछले 17 महीनों में सबसे अधिक मासिक निवेश था। हालांकि मार्च में यह रुझान पूरी तरह उलट गया और रिकॉर्ड ₹1.17 लाख करोड़ की निकासी हुई, जो अप्रैल में भी जारी रही।

‘महंगाई को लेकर चिंता फिर बढ़ी’

मार्केट एक्सपर्ट के अनुसार यह लगातार बिकवाली वैश्विक आर्थिक दबाव और बढ़ते भूराजनीतिक जोखिमों का परिणाम है। मार्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के प्रिंसिपल मैनेजर (रिसर्च) हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा कि अप्रैल की शुरुआत में ही भारी बिकवाली देखने को मिली, क्योंकि पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ीं और वैश्विक महंगाई को लेकर चिंता फिर से बढ़ गई।

यह पढ़ें: BSE स्मॉल-मिडकैप में जोरदार उछाल, 12 साल की सबसे बड़ी मासिक बढ़त की ओर

इससे ब्याज दरों में जल्द कटौती की उम्मीद कम हो गई और वैश्विक बॉन्ड यील्ड ऊंचे स्तर पर बनी रही, जिससे भारत जैसे उभरते बाजारों में निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ।

FPI Outflows India 2026: टेक्स्टबुक रिस्क-ऑफ रिएक्शन!

Angel One के सीनियर एनालिस्ट वकार जावेद खान ने अप्रैल के आउटफ्लो को “टेक्स्टबुक रिस्क-ऑफ रिएक्शन” बताया। उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की कीमत $100 प्रति बैरल से ऊपर जाने, रुपये के 92 प्रति डॉलर के करीब कमजोर होने और महंगाई व चालू खाते के घाटे की चिंता बढ़ने से भारत का शेयर बाजार महंगा लगने लगा है। अगर ईरान के साथ युद्धविराम बना रहता है और WTI क्रूड $90 प्रति बैरल से नीचे आता है, तो FPI निवेश स्थिर हो सकता है।

इसके साथ ही घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की मजबूत खरीद, जो अब तक ₹1.7 लाख करोड़ रही है, और FY26 से FY28 के बीच 16% की अनुमानित कमाई वृद्धि बाजार को सहारा दे सकती है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि होर्मुज स्ट्रेट में तनाव या अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड 4.5% से ऊपर जाने पर फिर से बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है।

एजेंसी इनपुट के साथ

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First Published - May 1, 2026 | 12:39 PM IST

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