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FPIs ने भारतीय बाजार से जनवरी में निकाले ₹36,000 करोड़, STT बढ़ोतरी से आगे भी दबाव की आशंका

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FPIs ने इससे पहले वर्ष 2025 में भी भारतीय बाजार से करीब 1.66 लाख करोड़ रुपये (18.9 अरब डॉलर) की रिकॉर्ड निकासी की थी

Last Updated- February 02, 2026 | 4:45 PM IST
FPI Outflows India 2026

FPI Outflow: वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) की बिकवाली का सिलसिला जनवरी में भी जारी रहा और उन्होंने भारतीय शेयर बाजार से करीब 36,000 करोड़ रुपये (लगभग 3.97 अरब डॉलर) की निकासी की। इस बीच, वायदा एवं विकल्प (F&O) सेगमेंट में सौदों पर प्रतिभूति लेनदेन कर (STT) बढ़ाने की बजट घोषणा से निकट भविष्य में विदेशी निवेशकों की भागीदारी पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

FPIs ने जनवरी में निकाले ₹36,000 करोड़

नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) के आंकड़ों के मुताबिक, FPIs ने जनवरी महीने में भारतीय शेयर बाजार से 35,962 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी की। FPIs ने इससे पहले वर्ष 2025 में भी भारतीय बाजार से करीब 1.66 लाख करोड़ रुपये (18.9 अरब डॉलर) की रिकॉर्ड निकासी की थी। उस समय अस्थिर मुद्रा बाजार, वैश्विक व्यापार तनाव, संभावित अमेरिकी टैरिफ और हाई मार्केट वैल्यूएशन ने विदेशी पूंजी को प्रभावित किया था।

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STT का बढ़ना FPIs फ्लो के लिए नेगिटव

चॉइस इक्विटी ब्रोकिंग के तकनीकी शोध विश्लेषक आकाश शाह ने कहा कि F&O में STT का बढ़ना निकट अवधि में खासकर अत्यधिक तेजी और डेरिवेटिव-फोक्स्ड ग्लोबल फंड्स के लिए FPIs फ्लो के लिए हल्का नकारात्मक कारक बन सकता है। उन्होंने कहा, ”STT बढ़ोतरी से टैक्स कलेक्शन बढ़ सकता है, लेकिन इससे सौदों की मात्रा प्रभावित होने और रणनीतिक एफपीआई भागीदारी धीमी होने का जोखिम है।
टिकाऊ एफपीआई फ्लो के लिए निवेशक सिर्फ वृद्धि संभावनाओं के बजाय व्यापक स्थिरता, रुपये की चाल और कर नीति में निरंतरता पर ज्यादा ध्यान देंगे।”

F&O पर कितना बढ़ा STT

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2026-27 के बजट भाषण में वायदा पर एसटीटी को 0.02 फीसदी से बढ़ाकर 0.05 फीसदी तथा विकल्प प्रीमियम एवं विकल्प सौदों पर एसटीटी को क्रमशः 0.10 फीसदी एवं 0.125 फीसदी से बढ़ाकर 0.15 फीसदी करने का प्रस्ताव रखा है।

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FPIs क्यों निकाल रहे हैं पैसा?

एंजेल वन लिमिटेड के वरिष्ठ बुनियादी विश्लेषक वकारजावेद खान ने कहा कि अमेरिका-यूरोप व्यापार तनाव, ग्रीनलैंड विवाद से जुड़ी शुल्क धमकियों, मजबूत डॉलर, हाई बॉन्ड यील्ड, रुपये के 90–92 प्रति डॉलर के स्तर पर आ जाने और बाजार के हाई वैल्यूएशन ने भी जोखिम से बचाव की प्रवृत्ति बढ़ाई है।

मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के प्रमुख एवं शोध प्रबंधक हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा कि विकसित बाजारों में ऊंची ब्याज दरें, मजबूत डॉलर और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के चलते उभरते बाजारों के प्रति जोखिम लेने की क्षमता घटी है। उन्होंने कहा कि घरेलू स्तर पर कंपनियों के नतीजों के मिले-जुले रुझान और बजट जैसी प्रमुख घटनाओं को लेकर सतर्कता ने भी विदेशी निवेशकों को सजग बनाए रखा।

(PTI इनपुट के साथ)

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First Published - February 2, 2026 | 4:45 PM IST

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