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GAIL, IGL या MGL: भारी गिरावट के बाद किस शेयर में निवेश करना सबसे फायदेमंद?

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पश्चिम एशिया युद्ध के कारण गैस शेयरों में भारी गिरावट आई है। विशेषज्ञ आईजीएल को लंबी अवधि के लिए बेहतर मानते हुए घबराहट में न बेचने की सलाह दे रहे हैं

Last Updated- March 13, 2026 | 11:06 PM IST
Share Market
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

गेल इंडिया, महानगर गैस (एमजीएल) और इंद्रप्रस्थ गैस (आईजीएल) जैसी गैस पारेषण और विपणन कंपनियों के शेयरों को पिछले कुछ कारोबारी सत्रों में भारी नुकसान हुआ है। इसकी वजह पश्चिम एशिया का युद्ध है, जिससे होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति अटक गई है।

एस इ​क्विटी के आंकड़े के मुताबिक मार्च 2026 में अब तक निफ्टी 50 सूचकांक में करीब 8 फीसदी की गिरावट आई है जबकि गैस पारेषण और विपणन कंपनियों के शेयर 15 फीसदी तक गिर गए हैं।

इ​क्विनॉमिक्स रिसर्च के संस्थापक और शोध प्रमुख जी चोकालिंगम के अनुसार यह गिरावट मुख्य रूप से घबराहट में की गई बिकवाली की वजह से आई है, न कि इन कंपनियों के लंबे समय के फंडामेंटल्स में किसी बदलाव के कारण ऐसा हुआ है।

चोकालिंगम का कहना है, ‘जैसे-जैसे युद्ध बढ़ा और घबराहट फैली, निवेशकों ने इन शेयरों को बेच दिया। होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से एलएनजी और प्राकृकि गैस की आपूर्ति में संभावित कमी का इन शेयरों पर बुरा असर पड़ा। तथापि, युद्ध में शामिल देशों के बीच समझौता हुआ, तो ये शेयर तेजी से वापसी कर सकते हैं।’

गैस कीमतें

इस बीच, विश्लेषकों का मानना ​​है कि पश्चिम एशिया की घटनाओं के कारण प्राकृतिक गैस की कीमतें ऊंची बनी रहेंगी। सिर्फ मार्च महीने में ही कीमतें 16 प्रतिशत बढ़कर 3.277 डॉलर प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट (एमएमबीटीयू) तक पहुंच गई हैं।

राबोबैंक इंटरनैशनल के जो डेलाउरा और फ्लोरेंस श्मिट ने हाल में जारी एक नोट में लिखा, ‘बाजारों को इस साल आपूर्ति की कमी का सामना करना पड़ रहा है, भले ही अमेरिका से एलएनजी की आपूर्ति बढ़ी हो। इसलिए, चाहे आने वाले दिनों में युद्ध समाप्त हो या नहीं, एलएनजी बाजार को अब युद्ध के सीधे परिणाम के तौर पर आपूर्ति की कमी का सामना करना पड़ रहा है।’

उनका अनुमान है कि यदि युद्ध लंबा खिंचा, तो कीमतें 4.75 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू तक पहुंच सकती हैं। पश्चिम एशिया में युद्ध छिड़ने से पहले, राबोबैंक ने अनुमान लगाया था कि 2026 में वैश्विक एलएनजी बाजारों में लगभग 70-80 लाख टन की अतिरिक्त आपूर्ति होगी।

डेलाउरा और ​श्मिट ने लिखा है, ‘हर सप्ताह कतर का उत्पादन बंद है। इससे अतिरिक्त भंडार 15 लाख टन कम हो जाता है। ऐसे में, महज पांच सप्ताह में ही युद्ध के तत्काल परिणाम के तौर पर बाजार में आपूर्ति की कमी दिखने लगेगी।’

व्यापक व्यवधान

मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशियल सर्विसेज की एक रिपोर्ट के अनुसार लगभग 50-55 प्रतिशत एलएनजी और 40 से 50 प्रतिशत कच्चे तेल का आयात होर्मुज स्ट्रेट से गुजरता है। ईलारा कैपिटल के विश्लेषकों ने बताया कि गेल के कुल 123 एमएससीएमडी ट्रांसमिशन वॉल्यूम में से 43 एमएससीएमडी वॉल्यूम होर्मुज स्ट्रेट से आने वाली एलएनजी का है। इसमें 6 एमएससीएमडी अमेरिकी से आने वाली मात्रा भी शामिल है।

शेयरों पर रणनीति

चोकालिंगम का सुझाव है कि निवेशक अभी घबराकर इन शेयरों को न बेचें, क्योंकि इनमें से ज्यादातर शेयरों की कीमतें काफी गिर चुकी हैं। उन्होंने कहा, ‘कुछ मामलों में बिकवाली काफी अ​धिक हो गई है। अगर अचानक युद्ध रुक जाता है, तो इन शेयरों में तेजी से उछाल आ सकती है। इन सभी शेयरों में से, आईजीएल लंबी अवधि के नजरिए से अपने पोर्टफोलियो में रखने के लिहाज से अच्छा शेयर है।’

वेल्थ मिल्स सिक्योरिटीज में इक्विटी निदेशक क्रांति बाथिनी को भी उम्मीद है कि अगर युद्ध लंबा खिंचता है और गैस की कमी हो जाती है, तो इन कंपनियों की कमाई पर अल्पाव​धि से मध्याव​धि में असर पड़ सकता है।

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First Published - March 13, 2026 | 10:58 PM IST

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