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SEBI चीफ बोले- भारतीय शेयर बाजार झटकों को झेलने में सक्षम, घरेलू निवेशक बने सहारा 

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पांडेय ने यह भी स्वीकार किया कि सितंबर, 2024 के बाद से विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPIs) में कुछ निकासी देखी गई है, लेकिन घरेलू निवेशकों का भरोसा बना हुआ है

Last Updated- May 18, 2026 | 4:53 PM IST
Tuhin Kanta Pandey
बाजार नियामक सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय

बाजार नियामक सेबी (SEBI) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय (Tuhin Kanta Pandey) ने सोमवार को कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव बढ़ा है, लेकिन भारतीय शेयर बाजार ‘विभिन्न तरह के झटके झेल पाने’ में सक्षम हैं। पांडेय ने भुवनेश्वर में आयोजित ‘क्षेत्रीय निवेशक जागरूकता संगोष्ठी’ के इतर संवाददाताओं से कहा कि दुनिया के किसी भी हिस्से में पैदा होने वाले संकट का असर अन्य अर्थव्यवस्थाओं पर भी पड़ता है।

पश्चिम एशिया तनाव से महंगाई की चिंता 

उन्होंने कहा, ”पश्चिम एशिया के मौजूदा संघर्ष से तेल सप्लाई चेन और कीमतें प्रभावित हुई हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर महंगाई का जोखिम बढ़ा है।” उन्होंने कहा, “इस स्थिति का असर सभी अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ा है और आगे चलकर इसके प्रभाव का प्रसार और परवर्ती प्रभाव भी देखने को मिलेंगे।”

हालांकि, भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) प्रमुख ने भारतीय बाजार की मजबूती पर भरोसा जताते हुए कहा कि वह इस तरह के झटकों को समाहित कर लेता है और स्थिति सामान्य होने पर फिर से अपनी स्वाभाविक गति पकड़ लेता है।

Also Read: सरकारी बैंकों और बीमा कंपनियों में खर्च कटौती अभियान, EV अपनाने और विदेशी यात्राओं पर रोक के निर्देश

FPI निकासी के बीच घरेलू भरोसा कायम 

पांडेय ने यह भी स्वीकार किया कि सितंबर, 2024 के बाद से विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPIs) में कुछ निकासी देखी गई है, लेकिन घरेलू निवेशकों का भरोसा बना हुआ है। उन्होंने कहा, “वैश्विक स्तर पर बाजार आपस में जुड़े हुए हैं, इसलिए उतार-चढ़ाव की स्थिति होना स्वाभाविक है।”

पश्चिम एशिया में संघर्ष छिड़ने के कारण होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते तेल एवं गैस की सप्लाई काफी हद तक बाधित हो गई है। इससे भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए आपूर्ति पक्ष पर प्रतिकूल हालात पैदा होने की आशंका जताई जा रही है।

(PTI इनपुट के साथ)

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First Published - May 18, 2026 | 4:52 PM IST

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