facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

वित्त वर्ष 26 की पहली छमाही में शेयर बाजार सुस्त, नकद और डेरिवेटिव वॉल्यूम में 20% की गिरावट

Advertisement

नकद खंड में रोजाना का औसत ट्रेडिंग वॉल्यूम एक साल पहले के 1.4 लाख करोड़ रुपये से 19 फीसदी घटकर 1.1 लाख करोड़ रुपये रह गया

Last Updated- October 12, 2025 | 9:29 PM IST
Market Cap
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

वित्त वर्ष 26 की पहली छमाही में शेयर बाजार की गतिविधियां बहुत सुस्त हुई हैं और नकद और डेरिवेटिव दोनों क्षेत्रों में रोजाना का औसत ट्रेडिंग वॉल्यूम (एडीटीवी) एक साल पहले की तुलना में करीब 20 फीसदी घटा है। डेरिवेटिव ट्रेडिंग के कड़े नियमों और बाजार की कमजोर धारणा ने निवेशकों को दूर ही रखा है।

नकद खंड में रोजाना का औसत ट्रेडिंग वॉल्यूम एक साल पहले के 1.4 लाख करोड़ रुपये से 19 फीसदी घटकर 1.1 लाख करोड़ रुपये रह गया। वायदा एवं विकल्प (एफऐंडओ) कारोबार 485 लाख करोड़ रुपये से 21 फीसदी घटकर 382.3 लाख करोड़ रुपये रह गया।

बेंचमार्क निफ्टी ने वित्त वर्ष 26 की पहली छमाही की समाप्ति मामूली बढ़त के साथ की। विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी से रुपये पर भी चोट पहुंची। सूचकांक में केवल 3.7 फीसदी की वृद्धि हुई जो 2022-23 की पहली छमाही के बाद इसका सबसे कमजोर पहला छमाही प्रदर्शन है।  ट्रेडिंग वॉल्यूम में यह गिरावट पिछले साल भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) द्वारा एफऐंडओ ढांचे में किए गए बड़े बदलावों के बाद आई है। सेबी ने सट्टेबाजी पर लगाम लगाने के लिए कई प्रतिबंध लगाए थे। इनमें से एक एक्सचेंज एक साप्ताहिक एक्सपायरी नियम ने वॉल्यूम को सबसे ज्यादा प्रभावित किया।

जून की अवधि में मुनाफे में भारी गिरावट के बाद ब्रोकरेज फर्मों द्वारा एक और कमजोर तिमाही दर्ज किए जाने की संभावना है। सूचीबद्ध कंपनियों के मूल्यांकन में पहले ही गिरावट आ चुकी है। उदाहरण के लिए ऐंजल वन का एक साल आगे का पीई गुणक एक साल पहले के 30 गुना से गिरकर 20 गुना से नीचे आ गया है।

हालांकि वर्ष की दूसरी छमाही में ट्रेडिंग वॉल्यूम में सुधार हो सकता है, लेकिन मौजूदा नियामकीय अनिश्चितता के कारण (जिसमें साप्ताहिक से मासिक एक्सपायरी की बात शामिल है) पूंजी बाजार से जुड़े शेयरों पर दबाव रह सकता है।

Advertisement
First Published - October 12, 2025 | 9:29 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement