मंगलवार को जीवन बीमा कंपनियों के शेयरों पर दबाव देखने को मिला। इनमें सूचीबद्ध जीवन बीमा कंपनियों में एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस और केनरा एचएसबीसी लाइफ इंश्योरेंस के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई।
यह गिरावट वित्तीय सेवा विभाग के सचिव एम नागराजू द्वारा ईटी नाउ को दिए गए एक साक्षात्कार में की गई टिप्पणियों के बाद हुई। इस साक्षात्कार में उन्होंने कहा था कि बैंकों से अपनी बीमा सहायक कंपनियों के साथ विशेष गठजोड़ से बचने और इसके बजाय तटस्थ रहने को कहा जा रहा है।
एसबीआई लाइफ का शेयर बुधवार को बीएसई पर 3.32 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,915 रुपये पर बंद हुआ। यह शेयर दिन के निचले स्तर 1,892.50 रुपये पर पहुंच गया था। अन्य जीवन बीमा कंपनियों में केनरा एचएसबीसी लाइफ इंश्योरेंस 4.36 प्रतिशत गिरकर 143.80 रुपये पर बंद हुआ।
आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल का शेयर 1.40 प्रतिशत गिरकर 549.95 रुपये पर बंद हुआ, एलआईसी 0.5 प्रतिशत गिरकर 824.05 रुपये, मैक्स फाइनैंशियल सर्विसेज 2.32 प्रतिशत गिरकर 1649.75 रुपये पर रहा और एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस मामूली बढ़त के साथ 614.20 रुपये पर रहा।
मैक्वेरी कैपिटल के प्रबंध निदेशक एवं फाइनैंशियल सर्विसे रिसर्च के प्रमुख गणपति ने कहा, ‘एसबीआई लाइफ को अपना लगभग 60 फीसदी से ज्यादा व्यवसाय बैंका चैनल से मिलता है और इसका एक बड़ा हिस्सा एसबीआई से आता है और एसबीआई ओपन आर्किटेक्चर मॉडल को फॉलो नहीं करता है। भारत में अनिवार्य ओपन आर्किटेक्चर जैसा इतना महत्त्वपूर्ण मामला केवल आईआरडीएआई के अधिकार क्षेत्र में ही हो सकता है और आईआरडीएआई को इसमें शामिल पक्षों और नियामक के बीच दो-तरफा बातचीत की प्रक्रिया अपनानी होगी। इसलिए, हमें नहीं लगता कि यह जल्द ही कभी होगा’
एमके के विश्लेषकों के अनुसार, बैंकाएश्योरेंस के खास बने रहने के पीछे एक मजबूत तर्क है। एक विशेष गठजोड़ से बीमा कंपनी के सेल्सपर्सन को बैंक की सभी शाखाओं में मौजूद रहने की जरूरत खत्म हो जाती है, जिससे वितरण लागत कम हो जाती है। दूसरी बात यह कि डेटा इस बात की पुष्टि करता है कि पिछले कुछ साल में एक्सक्लूसिव बैंकाएश्योरेंस में वितरण लागत काफी कम रही है। इससे बीमा कंपनी को किफायती योजनाएं पेश करने में मदद मिलती है।
तीसरा, अपनी सहायक कंपनी के उत्पादों को मूल ब्रांड के नाम से पेश करने से, बिक्री प्रक्रिया में स्वामित्व और देखरेख की भावना अधिक होती है, जिसकी वजह से गलत बिक्री की आशंका काफी कम हो जाती है।
नागराजू ने 19 अगस्त, 2024 को भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) के सचिव के रूप में कार्यभार संभाला था और वे 31 मई, 2026 को सेवानिवृत्त होंगे।