Middle East Crisis: वैश्विक बाजार ईरान संकट के बढ़ते प्रभाव को लेकर सतर्क होते जा रहे हैं। भू-राजनीतिक तनाव अब ऊर्जा कीमतों, बॉन्ड यील्ड और मुद्रा बाजारों पर असर डालने लगा है। अमेरिका की ओर से तनाव कम होने के कुछ संकेत जरूर मिल रहे हैं। लेकिन ईरान की प्रतिक्रिया को लेकर अनिश्चितता अभी भी निवेशकों को चिंतित बनाए हुए है।
हेल्थ एडवाइजर फर्म आस्क प्राइवेट हेल्थ की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका की ओर से हालिया संकेत इस बात की ओर इशारा करते हैं कि संघर्ष में संभावित ‘रास्ता निकलने’ की स्थिति बन सकती है। राजनीतिक संदेशों से यह भी संकेत मिलता है कि रणनीतिक उपलब्धियों का दावा करते हुए आगे तनाव बढ़ाने से बचने की इच्छा है। हालांकि, बाजार के संकेतक कुछ और ही तस्वीर दिखा रहे हैं और ज्यादा सावधानी बरतने का संकेत दे रहे हैं। ब्रेंट और WTI कच्चे तेल की कीमतों के बीच बढ़ता अंतर और अमेरिका ट्रेजरी यील्ड में तेज बढ़ोतरी वैश्विक वित्तीय प्रणालियों में बढ़ते तनाव की ओर इशारा करते हैं।
बॉन्ड बाजार विशेष रूप से नीति-निर्माताओं पर दबाव डाल रहे हैं। बढ़ती यील्ड महंगाई की चिंताओं और फिस्कल दबाव को दर्शाती है। इससे लंबे समय तक चलने वाला संघर्ष राजनीतिक और आर्थिक रूप से महंगा साबित होता है।
रिपोर्ट में सीनियर डायरेक्टर (रिसर्च) दीपांकर मित्रा और चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर सोमनाथ मुखर्जी ने कहा कि अमेरिका के नरम संकेतों के बावजूद ईरान समझौते के लिए कम इच्छुक नजर आता है। मिसाइल गतिविधियों और कतर के नॉर्थ पार्स गैस क्षेत्र समेत महत्वपूर्ण ऊर्जा ढांचे पर हमलों की खबरें तनाव बढ़ाने की मंशा को दर्शाती हैं।

सोर्स: ASK Private Health
इसके अलावा, ईरान की बढ़ती मिसाइल क्षमता और रूस व चीन जैसे वैश्विक शक्तियों के संभावित समर्थन से भू-राजनीतिक स्थिति और पेचीदा हो गई है। भले ही अमेरिका की सैन्य भागीदारी कम हो जाए लेकिन पाक्षिक एशिया में जारी व्यवधान ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता बनाए रख सकते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य एक महत्वपूर्ण रणनीतिक रास्ता बना हुआ है और इसमें किसी भी तरह का व्यवधान वैश्विक स्तर पर बड़ा असर डाल सकता है। अमेरिका शुद्ध रूप से तेल उत्पादक होने के कारण बाकियो की तुलना में सुरक्षित रह सकता है। वहीं खासकर एशिया के बड़े आयातक देशों को गंभीर जोखिम का सामना करना पड़ सकता है।
इस संकट ने ट्रेडिशनल एसेट को भी प्रभावित किया है। अब इक्विटी, बॉन्ड और सोना पहले की तरह अनुमानित तरीके से व्यवहार नहीं कर रहे हैं। इससे निवेश रणनीतियां जटिल हो गई हैं। ऐसे माहौल में निवेशक तेजी से नकदी और डॉलर आधारित एसेट्स की ओर रुख कर रहे हैं, जो वैश्विक अनिश्चितता के बीच मजबूत हुए हैं। बाजार के भागीदार व्यापक रूप से दो संभावित स्थितियों पर विचार कर रहे हैं;

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बेस केस (65%): बातचीत के जरिए तनाव में कमी। इससे मध्यम वृद्धि और महंगाई नियंत्रित होगी।
जोखिम स्थिति (35%): लंबे समय तक संघर्ष। इससे ठहराव जैसी स्थिति, कमोडिटी की ऊंची कीमतें और बढ़ती अस्थिरता।