वर्ष 2026 में साल की शुरुआत से सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) शेयरों में अब तक 33 प्रतिशत तक की भारी गिरावट आई है। इसकी तुलना में निफ्टी-50 सूचकांक 8 प्रतिशत कमजोर हुआ है। इसकी मुख्य वजह यह है कि एआई के बल पर हो रही वृद्धि ने आउटसोर्सिंग के पारंपरिक मॉडल में बाधा डाल दी है। हालांकि, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये के कमजोर होने (कैलेंडर वर्ष 2026 में 6.6 प्रतिशत की गिरावट) से मिली कुछ राहत ने इस गिरावट के असर को कुछ हद तक कम करने में मदद की है।
विश्लेषकों का कहना है कि जो निवेशक बाजार में टिकाऊ सुधार की उम्मीद कर रहे हैं, उन्हें शायद सब्र रखना होगा। एआई जिस तेजी से इस उद्योग को बदल रहा है, उतनी तेजी से राजस्व वृद्धि नहीं हो पा रही है। इस माहौल को देखते हुए उन्हें लगता है कि वित्त वर्ष 2027 आईटी शेयरों के लिए मुश्किल साल हो सकता है। लेकिन बाजार के सबसे निचले स्तर का ठीक-ठीक पता लगाने की कोशिश करना शायद सही तरीका न हो।
मिरे ऐसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक मानव मेडेवाला ने कहा, ‘मजबूत ऑर्डरों और कुल अनुबंध वैल्यू (टीसीवी) में बढ़ोतरी के बावजूद पायलट-आधारित तैनाती, निर्णय लेने में देर और काम पूरा होने में विलंब के कारण इसे राजस्व में बदलने की गति धीमी बनी हुई है। नतीजतन, बाजार सतर्क बना हुआ है और कमाई एआई नैरेटिव की तुलना में कम है।’
इस बीच, निवेशकों ने भारतीय आईटी शेयरों को बेच दिया क्योंकि वैश्विक कंपनियों ने अपने टेक्नॉलजी बजट को पारंपरिक आउटसोर्सिंग और ऐप्लीकेशन मैंटेनेंस के बजाय एआई इन्फ्रास्ट्रक्चर, मॉडल और सॉफ्टवेयर की ओर मोड़ दिया। आउटसोर्सिंग भारतीय आईटी कंपनियों की कमाई का मुख्य जरिया है। हालांकि कंपनियां एआई इन्फ्रास्ट्रक्चर पर ज्यादा खर्च कर रही हैं, जिसमें जीपीयू, सॉफ्टवेयर और मॉडल शामिल हैं। लेकिन कुल मिलाकर टेक्नॉलजी बजट उस रफ्तार से नहीं बढ़ रहे हैं।
कोटक सिक्योरिटीज में फंडामेंटल रिसर्च के उपाध्यक्ष सुमित पोकरणा ने कहा, ‘इसलिए पारंपरिक आईटी सेवा कंपनियों के लिए कम पैसा बच रहा है। नतीजतन, वृद्धि धीमी हो रही है। मुकाबला बढ़ रहा है। खपत तथा कीमतें दबाव में हैं।’
मार्च तिमाही के दौरान टीसीएस ने 12 अरब डॉलर के सौदे हासिल होने की जानकारी दी। इस तरह वित्त वर्ष 2026 के लिए उसकी टीसीवी बढ़कर 40.7 अरब डॉलर हो गई। रुपये के हिसाब से राजस्व में तिमाही आधार पर 5.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि वार्षिक एआई राजस्व 2.3 अरब डॉलर के पार पहुंच गया। इसी तरह, इन्फोसिस ने वित्त वर्ष 2026 में 15 अरब डॉलर मूल्य के 96 बड़े सौदे किए। ये पिछले वर्ष की तुलना में 28 प्रतिशत की वृद्धि है। साथ ही कंपनी ने वित्त वर्ष 2027 में 1.5 से 3.5 प्रतिशत राजस्व वृद्धि और 20-22 प्रतिशत के परिचालन मार्जिन का अनुमान जताया है।
एचसीएल टेक ने 62 करोड़ डॉलर का सालाना एडवांस्ड एआई राजस्व दर्ज किया, जबकि वित्त वर्ष 2026 में सेवाओं का राजस्व स्थिर मुद्रा में 4.8 प्रतिशत बढ़ा।
कोटक सिक्योरिटीज के पोकरणा अल्पावधि समस्याओं से इतर एआई डेटा आर्किटेक्चर, एआई वर्कफ्लो एजेंट्स और एआई गवर्नेंस जैसे क्षेत्रों में अवसर देखते हैं, क्योंकि दुनिया भर के ज्यादातर उद्यम अभी भी पुराने सिस्टम पर ही काम कर रहे हैं।
खास बात यह है कि भारतीय आईटी कंपनियों ने ऐतिहासिक रूप से कई तकनीकी बदलावों के दौरान मजबूत अनुकूलन क्षमता दिखाई है, जिनमें आउटसोर्सिंग, क्लाउड और सास (सॉफ्टवेयर एज ए सर्विस) को अपनाना शामिल है।
पोकरणा ने कहा कि भले ही अच्छी गुणवत्ता के शेयर सही मूल्यांकन पर उपलब्ध हैं। लेकिन यह पता नहीं है कि कमाई में सुधार होने में कितना समय लगेगा। लेकिन उन्होंने इन्फोसिस, टीसीएस और कोफोर्ज को अपनी पसंद के तौर पर चुना।
एलकेपी सिक्योरिटीज के जेठी ने कहा कि ज्यादा जोखिम लेने की क्षमता और लंबे समय के लिए निवेश करने वाले निवेशक अपनी मौजूदा होल्डिंग में और शेयर जोड़ने पर विचार कर सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि नए सिरे से बड़ी होल्डिंग बनाना ठीक नहीं है। आईटी सेक्टर में एचसीएल टेक और परसिस्टेंट सिस्टम्स उनके पसंदीदा शेयर हैं।