Stock Market Crash, 13 March: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध ने दुनियाभर में खलबली मचा रखी है। इसका तगड़ा झटका भारतीय शेयर बाजारों को भी लग रहा है। बीते 5 सेशन में भारतीय बाजार के प्रमुख बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी-50 और सेंसेक्स 5 फीसदी के करीब टूट गए हैं। इसमें निवेशकों के करीब 19 लाख करोड़ रुपये डूब गए। युद्ध को लेकर अभी अश्चितता बनी हुई है। जंग के लंबा चलने की आशंकाओं ने निवेशकों के बीच चिंता को और बढ़ा दिया है। हालांकि, यह पहला मौका नहीं है जब बाजार में तेज गिरावट आई हो। छह साल पहले इसी दिन यानी 13 मार्च 2020 को भी बाजार में बड़ी गिरावट आई थी। चलिए जानते हैं बाजार में कब-कब मचा था हड़कंप।
यह भारत का सबसे बड़ा सिक्योरिटीज घोटाला था। स्टॉकब्रोकर हर्षद मेहता ने शेयरों की कीमतों को बढ़ाने के लिए बैंक फंड में हेराफेरी की। जब घोटाले का पर्दा फाश हुआ, तो निवेशकों का भरोसा टूट गया। घोटाले के सामने आने के बाद सेंसेक्स में भारी गिरावट आई। इसने भारत के सबसे बड़े वित्तीय घोटालों में से एक को जन्म दिया।
यह शेयर बाजार में हेरफेर से जुड़ा बड़ा घोटाला था। स्टॉकब्रोकर केतन पारेख पर कुछ चुनिंदा तकनीक और मीडिया कंपनियों के शेयरों की कीमतों को आर्टिफिशियल रूप से बढ़ाने का आरोप लगा। जब इस घोटाले का खुलासा हुआ, तो बाजार में घबराहट फैल गई और निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ गया। इसके बाद शेयर बाजार में तेज गिरावट देखने को मिली।
उस समय सेंसेक्स एक दिन में करीब 176 अंक गिर गया, जो उस दौर में बड़ी गिरावट मानी जाती थी। हालात इतने बिगड़ गए कि बाजार में भारी उथल-पुथल के कारण स्टॉक एक्सचेंज को कुछ समय के लिए कारोबार बंद करना पड़ा।
यह संकट तब शुरू हुआ जब अमेरिकी निवेश बैंक लेहमैन ब्रदर्स का पतन हुआ और दुनिया भर में बैंकिंग संकट फैल गया। अमेरिका के हाउसिंग बाजार के टूटने से वैश्विक वित्तीय संकट पैदा हुआ। इसके बाद विदेशी निवेशकों ने उभरते बाजारों से बड़े पैमाने पर पैसा निकालना शुरू कर दिया।
इसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ा। 21 जनवरी 2008 को सेंसेक्स 1,400 अंकों से ज्यादा गिर गया। उस समय दुनिया भर के शेयर बाजारों में घबराहट के कारण भारी बिकवाली देखने को मिली।
शेयर बाजार में उस समय यह गिरावट वैश्विक महामारी और दुनिया भर में लगाए गए लॉकडाउन के डर के कारण आई थी। कोविड-19 के तेजी से फैलने के बाद कई देशों ने लॉकडाउन लागू कर दिए। इससे देशभर में कारोबार ठप हो गया और वैश्विक आर्थिक गतिविधियां लगभग रुक गईं। इससे निवेशकों में भारी घबराहट फैल गई।
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इसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ा। 23 मार्च 2020 को सेंसेक्स करीब 3,935 अंक टूट गया, जो इतिहास की सबसे बड़ी गिरावटों में से एक थी। हालांकि बाद में सरकारों और केंद्रीय बैंकों की ओर से प्रोत्साहन पैकेज और बाजार में तरलता बढ़ाने के कदम उठाए गए, जिससे बाजार धीरे-धीरे संभल गया।
साल 2024 में यह गिरावट लोकसभा चुनावों के नतीजों के दौरान पैदा हुई अनिश्चितता के कारण आई थी। शुरुआती रुझानों में सरकार की स्थिरता को लेकर भ्रम की स्थिति बन गई, जिससे निवेशकों में चिंता बढ़ गई। इस अनिश्चितता के कारण निवेशकों ने बाजार में भारी बिकवाली शुरू कर दी। इसका असर यह हुआ कि सेंसेक्स एक ही दिन में लगभग 5 से 6 प्रतिशत तक गिर गया।
इतिहास बताता है कि शेयर बाजार सिर्फ कंपनियों के प्रदर्शन से नहीं, बल्कि वैश्विक घटनाओं, आर्थिक संकट, घोटालों और राजनीतिक अनिश्चितता से भी गहराई से प्रभावित होता है। 1992 के हर्षद मेहता घोटाले से लेकर 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट और 2020 की कोविड-19 महामारी तक, हर बड़े घटनाक्रम ने बाजार को झकझोर दिया है। हालांकि ऐसे झटकों के बावजूद बाजार समय के साथ फिर संभलता भी रहा है। यही वजह है कि जानकार अक्सर निवेशकों को घबराहट में फैसले लेने के बजाय लॉन्ग टर्म नजरिया अपनाने की सलाह देते हैं।