मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी (एमटीएफ) खातों में मार्च में लगातार दूसरे महीने फिर से गिरावट आई। इसकी वजह बाजार में बढ़ती अस्थिरता और सतर्क मनोबल के बीच निवेशकों का लिवरेज पोजीशन घटाना रहा। स्टॉक एक्सचेंजों के आंकड़ों के अनुसार फरवरी में लगभग 2 फीसदी की गिरावट के बाद मार्च में एमटीएफ बुक में मासिक आधार पर करीब 8 फीसदी की गिरावट आई और यह घटकर 1.06 लाख करोड़ रुपये रह गई। हालांकि, अलग-अलग सेगमेंटों में ट्रेडिंग गतिविधियां कम-ज्यादा बनी रहीं।
ताजा नरमी भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने और तेल की कीमतों में उछाल से निवेशकों में घबराहट के बीच आई है जिससे शेयर बाजारों में 11 फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई। बाजार के जानकारों का कहना है कि मार्जिन बुक में आई नरमी जोखिम लेने की प्रवृत्ति में सूक्ष्म बदलाव दर्शाती है, जिसमें ट्रेडर या तो लीवरेज्ड दांव घटा रहे हैं या अनिश्चित हालात के बीच नए जोखिम लेने से बच रहे हैं।
एमटीएफ बुक में गिरावट तब भी हुई जब नकदी बाजार का टर्नओवर स्थिर बना रहा। मार्च में रोजाना का औसत नकदी कारोबार मासिक आधार पर 9 फीसदी बढ़कर 1.34 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। एमटीएफ के तहत निवेशकों को ट्रेड वैल्यू का केवल एक हिस्सा ही पहले देना होता है, बाकी रकम ब्रोकर ब्याज पर देते हैं।
हालांकि पिछले कुछ महीनों में इसमें कुछ नरमी देखने को मिली है, लेकिन सालाना आधार पर एमटीएफ खातों में काफी बढ़ोतरी हुई है और यह मार्च 2025 के 68,000 करोड़ रुपये से बढ़कर मार्च 2026 में 1.05 लाख करोड़ रुपये हो गई है, जो खुदरा निवेशकों की लगातार भागीदारी दर्शाती है।
उद्योग के कुछ दिग्गजों ने बढ़ते लिवरेज से जुड़े जोखिमों की ओर इशारा किया है। केयरऐज रेटिंग्स ने एमटीएफ पर अपनी हालिया रिपोर्ट में कहा है, आगे चलकर निवेशकों की लगातार भागीदारी और नियामकीय बदलावों को धीरे-धीरे अपनाने से एमटीएफ सेगमेंट और बाजार के कुल कारोबार में स्थिर वृद्धि को सहारा मिल सकता है। लेकिन पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव जोखिम का मुख्य कारक बना हुआ है।
कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है और निवेशकों के मनोबल पर असर पड़ सकता है, जिससे लिवरेज वाली पोजीशन और ट्रेडिंग गतिविधियों के प्रति ज्यादा सतर्क रवैया अपनाया जा सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि जहां एक ओर भारतीय रिजर्व बैंक सिस्टम में पर्याप्त नकदी बनाए हुए है, वहीं दूसरी ओर वैश्विक अनिश्चितताएं जारी रहने के कारण बीच-बीच में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है; जिससे एमटीएफ खातों और रोज के औसत कारोबार दोनों की वृद्धि की रफ्तार धीमी पड़ सकती है।
हाल की नरमी के बावजूद ब्रोकरों का मानना है कि एमटीएफ की मांग अभी भी बनी हुई है। इस सुविधा को काफी अपनाया गया है, खासकर जीरोधा, ग्रो और पेटीएम मनी जैसे डिस्काउंट ब्रोकरों के पास। इन ब्रोकरों ने डेरिवेटिव से होने वाली कमाई पर पड़ रहे दबाव के बीच अपनी कमाई के स्रोतों में विविधता लाने के लिए हाल के वर्षों में एमटीएफ सुविधा शुरू की थी।
एमटीएफ की बकाया राशि अक्टूबर 2025 में 1 लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा पार करने के बाद से लगातार इस स्तर से ऊपर बनी हुई है, जिससे बाजार में इसकी बढ़ती भूमिका का पता चलता है। मार्च में चढ़ने व गिरने वाले शेयरों का अनुपात गिरकर 0.77 पर आ गया, जो फरवरी 2025 के बाद इसका सबसे निचला स्तर है और मार्च 2020 में देखे गए 0.72 के न्यूनतम स्तर के करीब पहुंच गया था।
जनवरी में जीरोधा के संस्थापक नितिन कामत ने चेतावनी दी थी कि बाजार में तीव्र गिरावट की स्थिति में लिवरेज वाली पोजीशनों को खत्म किया जा सकता है, जिससे अस्थिरता बढ़ सकती है, खास तौर से कम लिक्विडिटी वाले शेयरों में।