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टैरिफ तनाव से बाजार धड़ाम: सेंसेक्स-निफ्टी में तीन महीने की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट

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सेंसेक्स शुक्रवार को 605 अंक यानी 0.7 फीसदी गिरकर 83,576 पर बंद हुआ। निफ्टी 194 अंक यानी 0.8 फीसदी की गिरावट के साथ 25,683 पर टिका

Last Updated- January 09, 2026 | 10:56 PM IST
Stock Market crash

शेयर बाजार में शुक्रवार को करीब तीन महीने की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट दर्ज की गई। व्यापार शुल्क संबंधी तनावों में वृद्धि और सूचकांक के प्रमुख शेयरों में गिरावट के कारण बाजार में भारी फिसलन दर्ज हुई। सेंसेक्स शुक्रवार को 605 अंक यानी 0.7 फीसदी गिरकर 83,576 पर बंद हुआ। निफ्टी 194 अंक यानी 0.8 फीसदी की गिरावट के साथ 25,683 पर टिका।

दोनों सूचकांकों में इस सप्ताह 2.5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जो 26 सितंबर 2025 को समाप्त हुए सप्ताह के बाद की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट है। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण शुक्रवार से 4.5 लाख करोड़ रुपये घटकर 468 लाख करोड़ रुपये रहा। इस सप्ताह बाजार पूंजीकरण में 13.5 लाख करोड़ रुपये की गिरावट आई।

अमेरिकी व्यापार शुल्क को लेकर चिंताएं इस सप्ताह तब और बढ़ गईं जब बुधवार को अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डॉन्ल्ड ट्रंप ने रूस के साथ व्यापार करने वाले देशों को निशाना बनाने वाले प्रतिबंधों के लिए एक विधेयक को मंजूरी दे दी है। इस विधेयक के तहत ट्रंप को भारत सहित उन देशों से आयात पर 500 फीसदी तक शुल्क लगाने का अधिकार मिल जाएगा, जो रूसी तेल खरीदते हैं। अमेरिका ने भारत पर तेल खरीद के कारण रूसी युद्ध मशीन को बढ़ावा देने का आरोप लगाया था और पिछले साल उस पर 50 फीसदी शुल्क लगाया था।

शुक्रवार को सेंसेक्स पर सबसे ज्यादा दबाव आईसीआईसीआई बैंक और एचडीएफसी बैंक के शेयरों का रहा। एचडीएफसी बैंक के शेयरों में इस सप्ताह 6.3 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जो 19 जनवरी, 2024 को समाप्त हुए सप्ताह के बाद की सबसे बड़ी गिरावट है। बैंक की जमा वृद्धि को लेकर चिंताएं भी सामने आईं। वहीं, रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में इस सप्ताह 7.3 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जो 4 अक्टूबर, 2024 के बाद की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट है।

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक 3,769 करोड़ रुपये के शुद्ध बिकवाल रहे, वहीं देसी संस्थान 5,596 करोड़ रुपये के शुद्ध खरीदार रहे।

अल्फानीति फिनटेक के सह-संस्थापक यूआर भट्ट ने कहा, भारत के लिए टैरिफ संबंधी चिंताओं और भू-राजनीतिक तनावों में वृद्धि हुई है, जिसका असर एफपीआई की बिकवाली पर पड़ रहा है। जब तक कोई सकारात्मक या नकारात्मक बदलाव नहीं होता, तब तक कंपनियों के नतीजों का भारतीय शेयर बाजार पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। लेकिन व्यापार टैरिफ और वैश्विक संकेत ही बाजार की चाल तय करेंगे। बाजार में चढ़ने व गिरने वाले शेयरों का अनुपात कमजोर रहा और 3,196 शेयर टूटे जबकि 993 में बढ़ोतरी दर्ज हुई।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के अनुसंधान प्रमुख विनोद नायर ने कहा, निकट भविष्य में अस्थिरता बनी रहने की संभावना है, खासकर अमेरिका से जुड़ी कंपनियों और धातु एवं तेल एवं गैस जैसे क्षेत्रों में। हालांकि, मजबूत घरेलू बुनियादी बातों, स्थिर जीडीपी वृद्धि और सुदृढ़ ऋण रुझानों से उन क्षेत्रों में चुनिंदा खरीदारी को बढ़ावा मिल सकता है, जहां आय की संभावनाएं अनुकूल बनी हुई हैं।

विदेशी निवेशकों का निवेश और मुद्रा की चाल पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जबकि भारत-अमेरिका व्यापार वार्ताओं के सकारात्मक परिणाम या टैरिफ संबंधी चिंताओं में कमी से अल्पकालिक उछाल आ सकती है। कुल मिलाकर, बाजार सीमित दायरे में रहने की उम्मीद है, जिसमें बाहरी जोखिमों और घरेलू बुनियादी बातों के बीच संतुलन की उम्मीद है।

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First Published - January 9, 2026 | 10:48 PM IST

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