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ब्लॉक डील की ज्यादा खिड़की नहीं खोलेगा बाजार नियामक, 1% कीमत दायरा रहेगा कायम!

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निवेश बैंकर इस विंडो के माध्यम से अधिक सौदों की सुविधा के लिए मूल्य दायरे को 3 फीसदी तक बढ़ाने के लिए सेबी के साथ लॉबीइंग कर रहे हैं।

Last Updated- June 17, 2025 | 10:14 PM IST
SEBI

सौदों के क्रियान्वयन में मौजूदा चुनौतियों के बावजूद बाजार नियामक सेबी के स्पेशल ब्लॉक डील की व्यवस्था से जुड़े नियमों में संशोधन करने की संभावना नहीं है। अधिकारियों और उद्योग के आंतरिक सूत्रों ने यह जानकारी दी। अभी एक्सचेंज 15-15 मिनट के दो ब्लॉक डील समय की सुविधा देती है। पहला स्लॉट सुबह 8.45 से 9 बजे तक का है जबकि दूसरा दोपहर 2.05 से 2.20 तक। ये स्लॉट सभी कारोबारी सत्रों में होते हैं।

इस विंडो के जरिये ऑर्डर तभी दिए जा सकते हैं जब बिक्री कीमत पिछले दिन के बंद भाव से एक फीसदी ज्यादा या कम हो। यह छोटा मूल्य दायरा सौदे के अमल को विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण बनाता है। निवेश बैंकर इस विंडो के माध्यम से अधिक सौदों की सुविधा के लिए मूल्य दायरे को 3 फीसदी तक बढ़ाने के लिए सेबी के साथ लॉबीइंग कर रहे हैं। लेकिन उम्मीद है कि बाजार नियामक यथास्थिति बनाए रखेगा।

नियामक के एक अ​धिकारी ने कहा, हम मानते हैं कि 1 फीसदी कीमत दायरा छोटा है और कुछ वैश्विक बाजार बड़े दायरे की अनुमति देते हैं। लेकिन हमारा इरादा मौजूदा दिशानिर्देशों को जारी रखने का है। अगर विक्रेता अधिक छूट देना चाहते हैं तो वे सामान्य ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म का उपयोग कर सकते हैं।

निवेश बैंकरों की रिपोर्ट के अनुसार सख्त नियमों के कारण 90 फीसदी से अधिक ब्लॉक डील खुले बाजार में की जाती हैं। उन्होंने कहा कि केवल वे ब्लूचिप कंपनियां ही विशेष विंडो में सौदे निष्पादित कर सकती हैं जिनमें म्युचुअल फंडों और संस्थागत निवेशकों की अच्छी-खासी रुचि होती है।

विशेष अवधि में निष्पादित खास सौदों में रिलायंस इंडस्ट्रीज द्वारा एशियन पेंट्स की 4.5 फीसदी हिस्सेदारी आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल म्युचुअल फंड और एसबीआई म्युचुअल फंड को बेचना तथा प्रवर्तकों द्वारा बजाज फिनसर्व में 1.8 फीसदी का विनिवेश शामिल है। विशेष विंडो में सौदे करने का मुख्य लाभ यह है कि विक्रेता अपने पसंदीदा खरीदारों के साथ शेयर प्लेस कर सकते हैं। इसके विपरीत, सामान्य ट्रेडिंग विंडो के तहत विक्रेता या निवेश बैंकरों का खरीदार पर कोई नियंत्रण नहीं होता है।

पेंटोमैथ फाइनैंशियल सर्विसेज ग्रुप के समूह संस्थापक और प्रबंध निदेशक महावीर लुणावत ने कहा, यह सुविधा बाजार के असर से जुड़ी लागतों से बचने के लिए बनाई गई है जिससे कि बड़े लेनदेन को आसानी हो। अगर खुले बाजार में कोई बड़ा लेनदेन होता है तो इसका बाजार की कीमतों पर तुरंत प्रभाव पड़ सकता है। रणनीतिक बिक्री अगर विशेष ट्रेडिंग अवधि के बाहर होती है तो इसमें शामिल पक्षों का पता नहीं होता जिसमें कोई भी खरीदार या विक्रेता हो सकता है। एक फर्म अपने पसंदीदा खरीदार को अपनी हिस्सेदारी बेचने में सक्षम नहीं हो सकती है। अलग ट्रेडिंग विंडो रणनीतिक लेनदेन और बड़े शेयरधारकों के लेनदेन की सुविधा देती है और इसका अपना स्थान बना रहेगा।

मई में ब्लॉक डील गतिविधियां नौ महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं। इनमें लगभग 70,000 करोड़ रुपये के लेनदेन हुए। इनमें से अधिकांश सौदे एक्सचेंज प्लेटफॉर्म पर हुए। इस महीने भी ब्लॉक डील की मजबूत गति जारी है, जिससे किसी भी नियम में बदलाव की जरूरत कम हो गई है।

इक्विरस के प्रबंध निदेशक मुनीश अग्रवाल ने कहा, बढ़ते उतारचढ़ाव के कारण कई ब्लॉक डील बड़ी छूट पर हो रही हैं, जिससे 1 फीसदी कीमत दायरे के भीतर संभावित कीमत को फिट करना मुश्किल हो रहा है। एक छोटा दायरा अलग ट्रेडिंग विंडो के माध्यम से सौदे को बोझिल बनाता है। लेकिन ब्लॉक डील विंडो के माध्यम से सौदों को निष्पादित करने में असमर्थता लेनदेन में अड़चन नहीं डाल रही है। जब तक लेनदेन हो रहे हैं, कीमत दायरे को लेकर नियामकीय राहत की कमी बड़ी चिंता का विषय नहीं है। अगर राहत मिलती है तो ब्लॉक डील पर अमल थोड़ा आसान हो जाएगा।

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First Published - June 17, 2025 | 10:05 PM IST

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