Stock Market This Week: भारतीय शेयर बाजार लगातार पांचवें सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुए। यह पिछले आठ महीनों का सबसे लंबा गिरावट का दौर है। पश्चिम एशिया में युद्धविराम को लेकर अनिश्चितता और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने विदेशी निवेश की निकासी को बढ़ाया और रुपये पर दबाव डाला।
बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी 50 शुक्रवार को 2.09 प्रतिशत गिरकर 22,819.60 पर बंद हुआ। जबकि बीएसई सेंसेक्स 2.25 प्रतिशत टूटकर 73,583.22 पर आ गया। पूरे सप्ताह में दोनों इंडेक्स निफ्टी और सेंसेक्स में लगभग 1.3 प्रतिशत की गिरावट रही। जबकि स्मॉलकैप और मिडकैप इंडेक्स क्रमशः 0.6 प्रतिशत और 1.4 प्रतिशत कमजोर रहे।
रुपया डॉलर के मुकाबले 94.8125 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ। तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहने से दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल आयातक भारत के आर्थिक और आय संबंधी अनुमान कमजोर हुए। इससे इस महीने विदेशी निवेशकों की रिकॉर्ड 12.14 अरब डॉलर की निकासी हुई।
28 फरवरी को अमेरिका-इजराइल द्वारा ईरान पर हमले के बाद से निफ्टी और सेंसेक्स दोनों में लगभग 9.5 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है। उतार-चढ़ाव सूचकांक बढ़कर 27.09 पर पहुंच गया, जो जून 2024 के बाद सबसे ऊंचा स्तर है।
इन चिंताओं के बीच गोल्डमैन सैक्स ने भारत की 2026 की वृद्धि दर का अनुमान 7 प्रतिशत से घटाकर 5.9 प्रतिशत कर दिया और भारतीय शेयर बाजार की रेटिंग को ‘ओवरवेट’ से घटाकर ‘मार्केटवेट’ कर दिया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने कहा कि ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के लिए 10 दिन की अतिरिक्त समयसीमा दी जाएगी। नहीं तो उसके पावर प्लांट्स को नष्ट किया जा सकता है। वहीं, ईरान ने संघर्ष खत्म करने के लिए अमेरिका के 15 सूत्रीय प्रस्ताव को ‘अनुचित’ बताते हुए खारिज कर दिया। बाजार के जानकारों के अनुसार, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण कंपनियों के मार्जिन लगभग 16 प्रतिशत से घटकर 9 प्रतिशत तक आ सकते हैं, जिससे कमाई के अनुमान में तेज गिरावट संभव है।
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एनर्जी और मेटल सेक्टर के शेयरों में साप्ताहिक आधार पर क्रमशः 1.9 प्रतिशत और 2.2 प्रतिशत की गिरावट आई। एचडीएफसी बैंक के शेयर में 3.1 प्रतिशत की गिरावट आई। यह लगातार पांचवा साप्ताहिक नुकसान है और छह वर्षों में इसकी सबसे लंबी गिरावट है। यह गिरावट पार्ट टाइम चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के अचानक इस्तीफे की नियामकीय समीक्षा शुरू होने के बाद आई। वहीं, लगातार ऊंची तेल कीमतों के कारण ओएनजीसी के शेयर में 6.2 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जो दो महीनों में इसका सबसे बेहतर प्रदर्शन रहा।
निवेशकों को बाजार में इस हफ्ते आई गिरावट से बड़ा नुकसान हुआ है। बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप शुक्रवार (27 मार्च) को घटकर 4,22,15,450 करोड़ रुपये रह गया। जबकि पिछले शुक्रवार (20 मार्च) को यह 4,28,76,298 करोड़ रुपये था। इस तरह, बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 6,60,848 करोड़ रुपये घट गया।