Market This Week: भारतीय शेयर बाजार में लगातार तीसरे दिन शुक्रवार को भी गिरावट जारी रही। इसी के साथ बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी-50 और सेंसेक्स ने इस हफ्ते (9 मार्च – 13 मार्च) में कई वर्षों में अपनी सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट दर्ज की। इसकी मुख्य वजह मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध रहा जसिके कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं। कच्चे तेल के महंगा होने से महंगाई और आर्थिक वृद्धि को लेकर चिंता बढ़ गई है। खासकर भारत जैसे देश के लिए जो दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक है।
बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी 50 शुक्रवार को करीब 2.06 प्रतिशत गिरकर 23,151.1 पर बंद हुआ। जबकि बीएसई सेंसेक्स 1.93 प्रतिशत गिरकर 74,563.92 पर बंद हुआ। साप्ताहिक आधार पर निफ्टी 5.3 प्रतिशत गिरा। यह जून 2022 के बाद इंडेक्स में सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट है। वहीं, सेंसेक्स 5.5 प्रतिशत गिरा। सेंसेक्स में मई 2020 के बाद यह अब तक की सबसे बड़ी गिरावट है।
बाजार के जानकारों का कहना है कि मीडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष और ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी के कारण भारत को व्यापार की शर्तों पर बड़ा झटका लग सकता है। यह संघर्ष फरवरी के आखिर में इजरायल और अमेरिका के ईरान पर संयुक्त हमलों के बाद शुरू हुआ था। इस युद्ध में अब तक 2,000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, लाखों लोगों का जीवन प्रभावित हुआ है और इससे वैश्विक ऊर्जा तथा वित्तीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ गई है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते तेल की आपूर्ति में बाधा आने की आशंका से कई सेक्टर प्रभावित हो सकते हैं। इनमें ऑटोमोबाइल, तेल विपणन, पर्यटन, उपभोक्ता टिकाऊ सामान, इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण सेवाएं, उर्वरक और रसायन उद्योग तथा सिटी गैस वितरण शामिल हैं।
चोलामंडलम सिक्योरिटीज में इक्विटी रिसर्च प्रमुख धर्मेश कांत के अनुसार, कंपनियों की कमाई पर असर इस बात पर निर्भर करेगा कि यह संघर्ष कितने समय तक चलता है। मौजूदा हालात को देखते हुए वित्त वर्ष 2027 में भारतीय कंपनियों की कमाई के अनुमान में लगभग 200 बेसिस प्वाइंट की कमी आ सकती है।
इस सप्ताह सभी 16 प्रमुख सेक्टरों में गिरावट दर्ज की गई। व्यापक बाजार भी दबाव में रहे। मिडकैप इंडेक्स 4.6 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स 3.7 प्रतिशत गिर गए। ऑटो सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट आई और ये लगभग 10.6 प्रतिशत टूट गए। निवेशकों को डर है कि मीडिल ईस्ट युद्ध से उत्पादन और निर्यात पर असर पड़ सकता है। यह छह वर्षों में उनकी सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट है।
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वहीं वित्तीय क्षेत्र के बड़े शेयर भी 5.7 प्रतिशत गिर गए। विदेशी निवेशकों की बिकवाली तेज होने के चलते इस सेक्टर के शेयरों में बड़ी गिरावट आई। हालांकि इस गिरावट के बीच कोल इंडिया के शेयर करीब 6 प्रतिशत चढ़ गए। गर्मियों के जल्दी शुरू होने के कारण कोयले की मांग बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
निवेशकों को बाजार में इस हफ्ते आई गिरावट से बड़ा नुकसान हुआ है। बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 43,000,474 करोड़ रुपये रह गया। जबकि पिछले शुक्रवार (6 मार्च) को यह 44,935,447 करोड़ रुपये था। इस तरह, बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 19,34,973 करोड़ रुपये घट गया।