शेयर बाजार में शुक्रवार को गिरावट देखने को मिली। इसकी वजह ईरान और अमेरिका के बीच फिर शुरू हुई तनातनी रही जिसने इस लड़ाई के जल्द सुलझने की संभावनाओं को धुंधला दिया। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारी बिकवाली की और उनकी शुद्ध बिक्री 4,111 करोड़ रुपये की रही। वहीं देसी संस्थानों ने 6,748 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।
बेंचमार्क सेंसेक्स 516 अंक यानी 0.7 फीसदी की गिरावट के साथ 77,328 पर बंद हुआ। निफ्टी 151 अंक यानी 0.6 फीसदी की नरमी के साथ 24,176 पर टिका। शुक्रवार की इस गिरावट ने बेंचमार्क सूचकांकों के साप्ताहिक लाभ को कम कर दिया। इस सप्ताह सेंसेक्स में 0.5 फीसदी की बढ़त आई जबकि निफ्टी में 0.7 फीसदी का इजाफा हुआ। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण 1.5 लाख करोड़ रुपये घटकर 473.5 लाख करोड़ रुपये रह गया।
दिन के दौरान 100 डॉलर का स्तर छूने के बाद ब्रेंट क्रूड 99.86 डॉलर पर कारोबार कर रहा था। खबरों के मुताबिक रात के समय ईरान और अमेरिका के बीच होर्मुज स्ट्रेट के पास झड़प हुई। इस ताजा तनाव से नाजुक संघर्ष-विराम को खतरा पैदा हो गया है, जो पिछले एक महीने से कायम था। दोनों पक्ष युद्ध समाप्त करने के लिए किसी स्थायी समझौते पर पहुंचने में अभी तक सफल नहीं हो पाए हैं।
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खबरों के मुताबिक अमेरिका ने ईरान के मिसाइल और ड्रोन लॉन्च ठिकानों पर हमले किए। अमेरिका का दावा था कि ये जगह ही उस हमले के लिए जिम्मेदार थीं, जो स्ट्रेट से गुजर रहे अमेरिकी युद्धपोतों पर किया गया था। इससे पहले ईरान ने कहा था कि अमेरिका ने उसके दो तेल टैंकरों को निशाना बनाया है। उसने वॉशिंगटन पर आरोप लगाया था कि उसने कुछ क्षेत्रीय देशों के सहयोग से उसके दक्षिणी समुद्र तटीय नागरिक इलाकों पर हमला किया है।
युद्ध की वजह से होर्मुज स्ट्रेट बंद पड़ा है। इस रास्ते से दुनिया का तेल का पांचवां हिस्सा गुजरता है। इसके चलते कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गई हैं। तेल की ऊंची कीमतें भारत में महंगाई को बढ़ावा देती हैं, जिससे आर्थिक विकास और कंपनियों की कमाई पर बुरा असर पड़ता है। कई ब्रोकरेज फर्मों ने भारतीय शेयरों की रेटिंग घटा दी है और इसके लिए उन्होंने तेल कीमतों से पड़ने वाला असर बताया है। विश्लेषकों का कहना है कि बाजार का रुख़ काफी हद तक युद्ध से जुड़ी घटनाओं पर निर्भर कर रहा है।
शांति समझौते की उम्मीद और मार्च तिमाही की कमाई में कोई भी नकारात्मक हैरानी न होने से बेंचमार्क सूचकांक पिछले दो हफ्तों में बढ़त के साथ बंद हुए थे। लेकिन हालिया झड़पों ने उन उम्मीदों को झटका दिया है।
जियोजित इन्वेस्टमेंट में शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, होर्मुज स्ट्रेट के पास अमेरिका और ईरान के बीच नई सैन्य कार्रवाई के बाद बाजारों में जोखिम से बचने का माहौल देखा गया। इस सैन्य कार्रवाई से संघर्ष-विराम की उम्मीदें कमजोर हुईं और निवेशकों ने मुनाफ़ावसूली शुरू कर दी। लेकिन कच्चे तेल की कीमतों में 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास स्थिरता और अमेरिका के 10 वर्षीय बॉन्ड की यील्ड में नरमी से बाजार के समग्र माहौल और रुपये को लगातार समर्थन मिल रहा है। पर आगे का रास्ता थोड़ा ऊबड़-खाबड़ है, फिर भी किसी संभावित कूटनीतिक समाधान को लेकर उम्मीद बनी हुई है।
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नायर ने कहा कि निवेशक कंपनियों की अनुकूल कमाई से पैदा होने वाले अवसरों पर अपना ध्यान दे रहे हैं और कई मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों के मूल्यांकन अभी भी आकर्षक लग रहे हैं।
बाजार में चढ़ने व गिरने वाले शेयरों का अनुपात कमजोर रहा और 2,217 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई जबकि 2,020 शेयरों में इजाफा हुआ। एसबीआई में 6.6 फीसदी की गिरावट आई और इसने सेंसेक्स पर सबसे ज्यादा दबाव बनाया। एचडीएफसी इंडेक्स में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला शेयर साबित हुआ।
एसबीआई सिक्योरिटीज में तकनीकी व डेरिवेटिव शोध प्रमुख सुदीप शाह ने कहा, आगे चलकर निफ्टी के लिए समर्थन का तात्कालिक स्तर 24,000–23,950 के दायरे में है। अगर निफ्टी इस दायरे से नीचे लगातार बना रहता है तो इसकी कमजोरी बढ़कर 23,800 तक जा सकती है और उसके बाद कम समय में 23,650 तक पहुंच सकती है। ऊपर की तरफ प्रतिरोध का तात्कालिक स्तर 24,330–24,350 के दायरे में है।
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