साल 2026 में भारतीय शेयर बाजार की दो अलग-अलग तस्वीरें दिखाई दे रही हैं। एक तरफ बेंचमार्क निफ्टी 50 अमेरिकी-ईरान युद्ध जैसे वैश्विक दबावों से जूझ रहा है और इस साल अब तक 8.85 प्रतिशत गिर चुका है। वहीं दूसरी ओर ब्रॉडर मार्केट ने जबरदस्त मजबूती दिखाई है। अमेरिका-ईरान संघर्ष और लगातार बनी भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद निफ्टी मिडकैप 100 और स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 11 मई 2026 तक क्रमशः 1.28 प्रतिशत और 4.58 प्रतिशत की बढ़त के साथ पॉजिटिव जोन में बने हुए हैं।
एनॉलिस्ट्स का कहना है कि इस बेहतर प्रदर्शन की सबसे बड़ी वजह कंपनियों की मजबूत अर्निंग्स रही है। चौथी तिमाही (Q4FY26) के नतीजों ने दिखाया कि युद्ध से जुड़ी गिरावट के बावजूद SMID (स्मॉल और मिडकैप) कंपनियों का फंडामेंटल आउटलुक मजबूत बना हुआ है। कई मिड और स्मॉल कंपनियां बड़ी कंपनियों की तुलना में ज्यादा तेज ग्रोथ दे रही हैं। इंडस्ट्रियल और फाइनेंशियल सेक्टर में मुनाफा अनुमान से बेहतर रहा है।
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज (MOFSL) की रिपोर्ट के अनुसार, उनके कवरेज वाले मिडकैप शेयरों ने सालाना आधार पर 29 प्रतिशत की अर्निंग्स ग्रोथ दर्ज की, जो अनुमानित 22 प्रतिशत से काफी ज्यादा थी। इससे उलट, लार्जकैप कंपनियों में यह वृद्धि केवल 14 प्रतिशत रही।
BFSI, टेक्नोलॉजी, यूटिलिटीज, रियल एस्टेट और ऑयल एंड गैस जैसे सेक्टर्स ने मिडकैप प्रदर्शन को मजबूती दी। इन सेक्टर्स का कुल अतिरिक्त सालाना कमाई वृद्धि में लगभग 87 प्रतिशत योगदान रहा। वहीं, स्मॉलकैप कंपनियों ने 30 प्रतिशत की अर्निंग्स ग्रोथ के साथ अनुमान के अनुरूप प्रदर्शन किया, जबकि कवरेज यूनिवर्स की 70 प्रतिशत कंपनियों ने अनुमान के बराबर या उससे बेहतर नतीजे दिए।
एसबीआई सिक्योरिटीज के हेड ऑफ फंडामेंटल रिसर्च सनी अग्रवाल का कहना है कि मिडकैप और स्मॉलकैप का प्रदर्शन पूरी तरह फ्यूचर्स विनर्स के चलते है, जो ब्रॉडर मार्केट में मौजूद हैं। मिड और स्मॉलकैप का लार्जकैप के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन पूरी तरह कमाई पर आधारित है। SMID कंपनियां 15-20 प्रतिशत से ज्यादा सालाना कमाई वृद्धि दे रही हैं, जबकि लार्जकैप कंपनियों की ग्रोथ केवल लो-डबल डिजिट में है।
अग्रवाल ने यह भी कहा कि बैंकिंग और IT सेक्टर के ज्यादा वेटेज के कारण लार्जकैप इंडेक्स में अल्फा जेनरेशन मुश्किल हो गया है। हालिया भू-राजनीतिक तनावों के बाद बाजार में आई रिकवरी ने भी इस मजबूती को दिखाया है। युद्ध के कारण आई शुरुआती गिरावट के बाद कई SMID इंडेक्स न केवल अपने नुकसान की भरपाई कर चुके हैं, बल्कि युद्ध-पूर्व स्तरों से भी ऊपर पहुंच गए हैं। इसका मुख्य कारण मजबूत घरेलू निवेश भागीदारी रही है।
इसके उलट, कई लार्जकैप शेयर अब भी अपने पुराने हाई से नीचे ट्रेड कर रहे हैं, जो चुनिंदा SMID कंपनियों में ज्यादा जोखिम लेने की क्षमता और कमाई को लेकर निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है।
राइट होराइजंस PMS के फाउंडर और फंड मैनेजर अनिल रेगो का मानना है कि SMID सेगमेंट का आउटलुक पॉजिटिव दिखता है, हालांकि आने वाले समय में रिटर्न लिक्विडिटी की बजाय अर्निंगस आधारित होंगे। उनके मुताबिक, पिछले वर्षों में वैल्यूएशन काफी ऊंचे हो गए थे, लेकिन हालिया करेक्शन के बाद से ज्यादा फेयर वैल्यूएशन पर आ गए हैं।
रेगो का कहना है कि इससे उन निवेशकों के लिए अवसर बन रहे हैं, जो मजबूत फंडामेंटल, स्केलेबल बिजनेस मॉडल, हेल्दी बैलेंस शीट और बेहतर अर्निंग्स ग्रोथ वाली कंपनियों पर फोकस करना चाहते हैं। सरकार की ओर से इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च बढ़ाना, मैन्युफैक्चरिंग विस्तार, घरेलू मांग में सुधार और अर्थव्यवस्था का तेजी से औपचारिक होना उभरते व्यवसायों के लिए अनुकूल माहौल बना रहा है।
इसके अलावा कैपिटल एक्सपेंडिचर, इंपोर्ट सब्स्टीट्यूशन, एनर्जी ट्रांजिशन, डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग और कंजम्प्शन से जुड़े सेक्टर्स आने वाले वर्षों में प्रमुख लाभार्थी बने रह सकते हैं। हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि वैश्विक अनिश्चितताएं, कमोडिटी कीमतों में उतार-चढ़ाव, भू-राजनीतिक घटनाक्रम और विदेशी निवेश प्रवाह में बदलाव के कारण बाजार में समय-समय पर करेक्शन और स्टॉक स्पेशिफिक एक्शन देखने को मिल सकता है।
ऐसे में बाजार उन्हीं कंपनियों को प्राथमिकता देगा जो लगातार मजबूत अर्निंग्स और बेहतर एग्जीक्यूशन क्षमता दिखा सकेंगी, जबकि कमजोर कंपनियों के लिए ऊंचे वैल्यूएशन बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। कुल मिलाकर, SMID सेगमेंट में लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अब भी आकर्षक अवसर है।