मिरे ऐसेट म्युचुअल फंड के मुख्य निवेश अधिकारी नीलेश सुराणा का कहना है कि बाजार में बड़ी गिरावट का दौर अब पीछे छूट चुका है। साथ ही, मूल्यांकन अभी भी ठीक-ठाक हैं और कमाई में बढ़ोतरी की भी उम्मीद है। अभिषेक कुमार के साथ ईमेल इंटरव्यू में सुराणा ने कहा कि भारत में आर्थिक स्थिरता, आसान मौद्रिक हालात और उपभोग में सुधार इक्विटी के लिए सकारात्मक नजरिया बनाते हैं। मुख्य अंश:
अभी शेयर बाजार के सामने कौन से मुख्य जोखिम हैं?
सबसे पहला जोखिम पश्चिम एशिया जारी संकट की अवधि और उसकी तीव्रता है। अगर यह संकट लंबा खिंचता है तो तेल की कीमतें ऊंची बनी रहेंगी, जिससे भारत के चालू खाते के घाटे, रुपये और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के मनोबल पर दबाव पड़ेगा। एफपीआई ने इस साल अब तक रिकॉर्ड 26 अरब डॉलर और पिछले दो वर्षों में लगभग 45 अरब डॉलर की बिकवाली की है।
भू-राजनीति के अलावा, बाजार की धारणाओं में तेजी से बदलाव (जैसे अमेरिकी टैरिफ से लेकर एआई के असर और होर्मुज स्ट्रेट से जुड़ी चिंताओं तक) यह दिखाता है कि जोखिम कितनी तेजी से बदल सकते हैं और निवेशकों को सनसनीखेज सुर्खियों के बजाय लंबी अवधि के फंडामेंटल पर क्यों ध्यान देना चाहिए।
क्या शेयर बाजार में गिरावट का दौर खत्म हो गया है, या अभी और गिरावट हो सकती है?
बाजार में कीमत और समय दोनों के लिहाज़ से काफी गिरावट आई है। प्राइस टू बुक वैल्यू (पी/बीवी) के आधार पर मूल्यांकन दो साल पहले की तुलना में 30-40% सस्ते हैं। निफ्टी 50 अब एक साल की अनुमानित कमाई के 18.5 गुना पर कारोबार कर रहा है, जो पीक मल्टीपल से लगभग 20% कम है। इससे मूल्यांकन उचित स्तर पर आ गए हैं।
भारत की ढांचागत वृद्धि, घरेलू संस्थागत निवेशकों के लगातार निवेश और फिक्स्ड इनकम के मुकाबले इक्विटी को मिलने वाले कर फायदों को देखते हुए अर्निंग्स यील्ड आकर्षक है। ऐसा लगता है कि गिरावट का ज्यादातर दौर बीत चुका है। अगर थोड़ी-बहुत और गिरावट आती है तो वह निकट भविष्य में आर्थिक घटनाक्रम पर निर्भर करेगी।
किन कारणों से बाजार बढ़ सकता है?
पश्चिम एशिया संकट का समाधान और तेल की कीमतों में कमी एक अच्छा चक्र शुरू कर सकती है। इससे चालू खाते के घाटे पर दबाव कम होगा, रुपये को सहारा मिलेगा, एफपीआई निवेश बेहतर होगा, ग्राहकों का भरोसा बढ़ेगा और कमाई में सुधार में मदद मिलेगी।
इसके अलावा, मध्यम अवधि का परिदृश्य सकारात्मक बना हुआ है, जिसे पांच कारक सहारा दे रहे हैं – आर्थिक स्थिरता, मौद्रिक नरमी, राजकोषीय मदद, शुद्ध ब्याज मार्जिन रीप्राइसिंग के जरिये बैंकिंग मुनाफे में सुधार और बड़े पैमाने पर खपत में बहाली। अगले दो वर्षों में कंपनियों की कमाई 14 फीसदी सीएजीआर की दर से बढ़ सकती है। मूल्यांकन, वित्त वर्ष 27 की कमाई के 18.5 गुना और वित्त वर्ष 28 की अनुमानित कमाई के 16.5 गुना से कम पर उचित बने हुए हैं।
कंपनियों की कमाई के लिए तेल की बढ़ी हुई कीमतें कितना बड़ा जोखिम हैं? क्या इसके असर दिखने लगे हैं और कौन से सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं?
यह जोखिम असली है, लेकिन इसे मैनेज किया जा सकता है। जीडीपी के हिस्से के तौर पर तेल आयात वित्त वर्ष 13 में 5 फीसदी से ज्यादा था, जो अब घटकर लगभग 3 फीसदी रह गया है। अगर वित्त वर्ष 27 तक कच्चे तेल की औसत कीमत 95-100 डॉलर प्रति बैरल रहती है तो चालू खाता घाटा लगभग 1.2 फीसदी बढ़कर करीब 2.2 फीसदी हो जाएगा, जो अभी भी सुरक्षित दायरे में है। राजकोषीय असर जीडीपी का 0.2-0.5 फीसदी होने का अनुमान है, जिसकी भरपाई कुछ हद तक सरकार के 10.5 अरब डॉलर के आर्थिक स्थिरीकरण कोष से हो जाएगी।
सबसे ज्यादा असर ओएमसी, एयरलाइंस और सीमेंट सेक्टर पर पड़ेगा। हालांकि निफ्टी 50 में इनका कुल भार 10 फीसदी से कम है। सीधे तौर पर आईटी, फार्मा, हेल्थकेयर, टेलीकॉम और एफएमसीजी पर बहुत कम असर पड़ेगा।
अमेरिका-ईरान संघर्ष के बाद आपने अपने पोर्टफोलियो में क्या बदलाव किए? किन क्षेत्रों में आप तेजी और मंदी देखते हैं?
पोर्टफोलियो में निजी वित्तीय, उपभोक्ता विवेकाधीन और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्रों का भार अधिक है। हमने चुनिंदा रूप से उन मिडकैप उपभोक्ता विवेकाधीन कंपनियों को शामिल किया है, जहां गिरावट ने वास्तविक मूल्य सृजित किया है। ऊर्जा, पूंजीगत वस्तुएं और आईटी क्षेत्रों में हमारा भार कम बना हुआ है।
अप्रैल के बाद से व्यापक बाजार ने बेहतर प्रदर्शन किया है। ऊंचे मूल्यांकन के बावजूद आप मिड और स्मॉल-कैप सेगमेंट को लेकर तेजी का नजरिया बनाए हुए हैं। आपको क्यों लगता है कि यह प्रीमियम सही है?
आज मिड और स्मॉलकैप सेगमेंट 5 साल पहले की तुलना में काफी अलग है। सबसे बड़ी मिड-कैप कंपनी अब लगभग 3.3 गुना बड़ी हो गई है। यह बदलाव उभरते हुए कारोबारी श्रेणी में नई लिस्टिंग, फुटवियर, रिटेल और हेल्थकेयर जैसे सेक्टर को फायदा पहुंचाने वाले आर्थिक औपचारीकरण और स्मॉल-मिडकैप में लगातार निवेश दिखाता है। तेज गिरावट के बाद 10 में से तीन स्मॉल-मिडकैप अपने दो साल के उच्चतम स्तर से 50 फीसदी से अधिक गिर चुके हैं। हम चुनिंदा तौर पर वहां निवेश बढ़ा रहे हैं, जहां गुणवत्ता और मूल्यांकन के पैमाने ठीक हैं।
आप मौजूदा बाजार मूल्यांकन, खासकर लार्ज-कैप शेयरों, को कैसे देखते हैं? क्या ये विदेशी निवेशकों की वापसी के लिए काफी आकर्षक हैं?
एफपीआई की निकासी की वजहें थीं – ऊंचे सापेक्षिक मूल्यांकन, एआई से जुड़े शेयरों में कम निवेश और तेल कीमतों व मुद्रा दबाव से जुड़ी आर्थिक चुनौतियां। अब इनमें से ज्यादातर चुनौतियां कम हो रही हैं। एक साल की अनुमानित कमाई 19 गुना के आधार पर मूल्यांकन में दोबारा रेटिंग की अच्छी गुंजाइश है। 2026 के मध्य में ब्लूमबर्ग ग्लोबल एग्रीगेट इंडेक्स में शामिल होने को लेकर समीक्षा से पैसिव बॉन्डों में 20-25 अरब डॉलर का निवेश आ सकता है।