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कच्चे तेल के 100 डॉलर पार होने पर निफ्टी 50 में 10% तक गिरावट का खतरा: ICICI Securities

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ईरान युद्ध के कारण होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के कारण प्रमुख पश्चिम एशिया के तेल देशों ने उत्पादन में कटौती कर दी

Last Updated- March 09, 2026 | 11:34 PM IST

आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के विश्लेषकों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों के 100 डॉलर प्रति बैरल पार कर जाने से निफ्टी 50 सूचकांक में 10 प्रतिशत की फिसलन हो सकती है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के पुराने घटनाक्रम के विश्लेषण से पता चलता है कि ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स में 100 डॉलर से ऊपर लगातार वृद्धि का बेंचमार्क सूचकांक के साथ विपरीत संबंध रहा है और इसका बाजार धारणा पर असर पड़ता है।

आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज ने कहा, ‘इस समय कच्चे तेल की कीमतें खाड़ी क्षेत्र में लड़ाई बढ़ने से उत्पन्न होने वाली सभी चिंताओं को बता रही हैं। 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कच्चे तेल में तेज वृद्धि का मतलब होगा कि बाजार लंबे समय तक गंभीर तेल आपूर्ति में व्यवधान का असर मान रहा है।’ ऐसे माहौल में निफ्टी 50 इंडेक्स लड़ाई शुरू होने के एक दिन पहले के स्तर 25,178 से लगभग 10 प्रतिशत तक गिर सकता है।  इसका मतलब है कि 22,660 का निचला स्तर आ सकता है।

ईरान युद्ध के कारण होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के कारण प्रमुख पश्चिम एशिया के तेल देशों ने उत्पादन में कटौती कर दी। इससे सोमवार को ब्रेंट क्रूड वायदा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में 25 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 116.7 डॉलर प्रति बैरल तक जा पहुंचा। वर्ष 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद यह पहली बार है जब तेल की कीमतें इस स्तर पर पहुंची हैं।

तेल व निफ्टी के बीच संबंध

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें मुद्रास्फीति, कंपनियों की लाभप्रदता और विदेशि मुद्रा संतुलन पर व्यापक प्रभाव डालती हैं जिससे इक्विटी बाजार बुरी तरह प्रभावित होते हैं। भारत अपनी तेल जरूरत का लगभग 80-85 प्रतिशत आयात करता है। इसमें से 50 प्रतिशत होर्मुज के रास्ते से आता है।

आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज ने कहा कि सबसे खराब स्थिति में निफ्टी 50 लड़ाई शुरू होने के एक दिन पहले के स्तर से लगभग 10 प्रतिशत तक गिर सकता है, जबकि बाजार मूल्यांकन इंडेक्स के पीई अनुपात के साथ 18 गुना तक सिकुड़ सकता है, जो महामारी से पहले के निचले स्तरों के करीब है।

निवेश रणनीति

ब्रोकरेज ने कहा कि ऑटोमोबाइल, विमानन, तेल विपणन कंपनियों, सिटी गैस वितरण फर्मों, बिल्डिंग मटेरियल, औद्योगिक और कंज्यूमर जैसे उद्योगों को निकट भविष्य में मार्जिन दबाव का सामना करना पड़ सकता है।

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First Published - March 9, 2026 | 11:34 PM IST

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