नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) ने छोटे और मझोले उद्यमों (एसएमई) की वित्तीय सेहत का आकलन करने के लिए इस्तेमाल फॉर्मूले में बदलाव किया है। ये वे एसएमई हैं, जो एनएसई के एसएमई प्लेटफॉर्म ‘एनएसई इमर्ज’ पर सूचीबद्ध होना चाहते हैं। एक परिपत्र में एनएसई ने बताया कि वह फ्री कैश फ्लो टु इक्विटी (एफसीएफई) की परिभाषा में संशोधन कर रहा है। यह एक ऐसा पैमाना है जिसे एनएसई ने सितंबर 2024 में एसएमई लिस्टिंग के आवेदकों के लिए अनिवार्य कर दिया था।
संशोधित फॉर्मूले के तहत प्रतिभूतियों को जारी करने से मिलने वाली रकम, जिसमें इक्विटी, तरजीही शेयर और सिक्योरिटीज़ प्रीमियम शामिल हैं, को अब एफसीएफई की गणना में सकारात्मक घटक के तौर पर गिना जाएगा। पहले वाले फॉर्मूले में इस मद को शामिल नहीं किया गया था।
एक्सचेंज ने कहा है कि यह बदलाव एनएसई इमर्ज पर दाखिल सभी विवरणिका मसौदों (डीआरएचपी) पर तुरंत लागू होगा। एफसीएफई मानदंड के तहत एसएमई को अपनी लिस्टिंग ऐप्लिकेशन से पहले के तीन वित्त वर्षों में से कम से कम दो में इक्विटी के लिए सकारात्मक फ्री कैश फ्लो दिखाना ज़रूरी है। यह सीमा उन कंपनियों को सार्वजनिक बाजार में आने से रोकने के लिए शुरू की गई थी, जिनकी वित्तीय बुनियाद कमजोर है।
विशेषज्ञों ने कहा कि फॉर्मूले में इक्विटी जारी करने से मिली रकम को शामिल करके एक्सचेंज यह मान रहा है कि जिन कंपनियों ने सक्रिय रूप से नई पूंजी जुटाई है, जो कि किसी एसएमई के वृद्धि के चरण में आम बात है, तो उनकी लिस्टिंग की पात्रता का आकलन करते समय इस कारण होने वाले कैश फ्लो के लिए दंडित नहीं किया जाना चाहिए।
संशोधित फॉर्मूला इस प्रकार है। एफसीएफई = परिचालन से मिली नकदी – स्थिर संपत्तियों की खरीद + पूंजी जारी करने से प्राप्त राशि + शुद्ध उधार – ब्याज × (1–टी)। एक्सचेंज ने यह भी स्पष्ट किया कि एनबीएफसी के लिए, जहां अल्पकालिक उधार और ब्याज, फाइनैंसिंग गतिविधियों के बजाय परिचालन नकदी प्रवाह के माध्यम से आते हैं, एफसीएफई की गणना के लिए शुद्ध उधार में केवल दीर्घकालिक उधार ही शामिल होंगी, ताकि दोहरी गणना से बचा जा सके।
परिपत्र में कहा गया है कि एनएसई इमर्ज पर लिस्टिंग के लिए बाकी सभी पात्रता मानदंड बरकरार रहेंगे। वित्त वर्ष 26 में स्टॉक एक्सचेंज के जरिये एसएमई इक्विटी फंड जुटाने का मामला रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया और 254 आईपीओ के जरिये 10,955 करोड़ रुपये जुटाए गए।