भले ही ओला इलेक्ट्रिक के वित्त वर्ष 2025-26 के मार्च तिमाही के नतीजों में परिचालन के मोर्चे पर सुधार के संकेत दिखे हों, लेकिन विश्लेषक इस रिकवरी की रफ्तार और इसकी निरंतरता को लेकर अभी भी निश्चित नहीं हैं। वॉल्यूम वृद्धि , बाजार हिस्सेदारी की स्थिरता और नकदी बचाने की चिंताओं के बीच वे इस इलेक्ट्रिक दोपहिया निर्माता को लेकर रुख सतर्क बनाए हुए हैं।
विश्लेषकों ने कहा कि जहां एक ओर इलेक्ट्रिक वाहनों का बाजार लगातार बढ़ रहा है, वहीं ओला इलेक्ट्रिक को अभी भी काम पूरा करने में चुनौतियों और कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। एमके ग्लोबल फाइनैंशियल सर्विसेज की एक रिपोर्ट में कहा गया है, ओला की बिक्री और बाजार हिस्सेदारी में सुधार पर नजर रखने की जरूरत है।
शेयर बाजारों में ओला इलेक्ट्रिक के शेयर गुरुवार को इंट्राडे में 5.7 फीसदी गिर गए और अंत में नुकसान थोड़ा कम करते हुए 3.9 फीसदी की नरमी के साथ 35.5 रुपये पर बंद हुए। इसकी तुलना में बीएसई सेंसेक्स में 0.18 फीसदी की गिरावट आई। इस इलेक्ट्रिक दोपहिया निर्माता के शेयरों में अपने 52 हफ्ते के निचले स्तर 21.21 रुपये प्रति शेयर से 67.5 फीसदी की तेजी आई है। लेकिन सेंसेक्स के प्रदर्शन की तुलना में पिछले एक महीने में इनमें करीब 5 फीसदी की गिरावट आई है।
ओला इलेक्ट्रिक का वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही का राजस्व सालाना आधार पर 56.6 फीसदी गिरकर 265 करोड़ रुपये रह गया। इसकी मुख्य वजह गाड़ियों की डिलिवरी में कमी (सालाना आधार पर 61 फीसदी की गिरावट) और औसत बिक्री कीमत में गिरावट (तिमाही आधार पर 10 फीसदी की कमी) रही। हालांकि, परिचालन के स्तर पर मार्जिन में सुधार देखने को मिला। सकल मार्जिन बढ़कर 38.5 फीसदी हो गया, जो पिछली तिमाही के मुकाबले 424 आधार अंक ज्यादा है। इसमें कुछ हद तक इसके जेन3 प्लेटफॉर्म से जुड़े प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) से मिली मदद का भी योगदान रहा।
शुद्ध घाटा 496 करोड़ रुपये रहा। पिछले साल इसी समय यह घाटा 870 करोड़ रुपये और पिछली तिमाही में 487 करोड़ रुपये रहा था। विश्लेषकों का कहना है कि ये नतीजे बेहतर होती यूनिट इकनॉमिक्स और अभी भी कमजोर मांग में सुधार के बीच के अंतर दिखाते हैं। एमके ग्लोबल फाइनैंशियल सर्विसेज ने ओला इलेक्टिरक पर बेचने की सलाह बरकरार रखी है। लेकिन मुख्य रूप से उद्योग की मजबूत वृद्धि की उम्मीदों के कारण इसका लक्षित मूल्य 20 रुपये प्रति शेयर से बढ़ाकर 25 रुपये कर दिया है।
एमके के अनुसार, भारत में इलेक्ट्रिक दोपहिया के लिए अवसर बरकरार हैं। अप्रैल में उद्योग की वृद्धि 60 फीसदी (सालाना आधार पर) और मार्च में 45 फीसदी (सालाना आधार पर) रही, जो काफी मजबूत है। हाल में जीएसटी से जुड़ी कुछ रुकावटों के बाद अब इस क्षेत्र की पहुंच में भी सुधार आया है। लेकिन एमके का कहना है कि ओला की बिक्री और बाजार हिस्सेदारी में हाल ही में जो सुधार देखने को मिला है, वह शायद ढांचागत न हो।
एमके ग्लोबल ने कहा, हालांकि ओला ने हाल के महीनों में बाजार हिस्सेदारी में बढ़त के साथ वॉल्यूम में कुछ क्रमिक सुधार देखा है। अप्रैल/मई में यह 8-9 फीसदी जबकि वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही में 5 फीसदी था। हम इस वॉल्यूम वृद्धि का श्रेय मौजूदा बेहतर उत्पादन क्षमता, कीमत के प्रति ज्यादा संवेदनशील उत्तर भारत के बाजार में हिस्से में बढ़त और इलेक्ट्रिक दोपहिया की मजबूत मांग के बीच अपनी पूरी क्षमता पर काम कर रहे मौजूदा इलेक्ट्रिक दोपहिया कंपनियों/एथर को देते हैं।
ओला इलेक्ट्रिक ने अप्रैल में लगभग 10,000 वाहन का मासिक खुदरा वॉल्यूम दर्ज किया। प्रबंधन ने मई के लिए 14,000-15,000 वाहनों का अनुमान लगाया है, जिसे 40,000-45,000 वाहनों के ऑर्डर बैकलॉग का सहारा मिला है। कंपनी को उम्मीद है कि जून और जुलाई में वॉल्यूम बढ़कर 17,000-18,000 वाहन तक पहुंच जाएगा, जिसमें ई-बाइक का योगदान 15 फीसदी होगा। प्रबंधन ने तिमाही परिचालन खर्च का लक्ष्य भी लगभग 350 करोड़ रुपये रखा है ताकि प्रति माह 20,000-25,000 वाहनों के स्तर पर परिचालन एबिटा के मोर्चे पर घाटा समाप्त किया जा सके।