लगातार मांग, बेहतर प्रोडक्ट मिक्स और मजबूत बिक्री की मदद से बड़ी पेंट कंपनियों ने मार्च तिमाही में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया। आला पेंट कंपनियों ने कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद डेकोरेटिव पेंट सेगमेंट में मांग के बढ़ते रुझान और वॉल्यूम में बढ़त के बारे में बताया है। एक और अच्छी बात यह कि बाजार में मुकाबले की तीव्रता घटी है क्योंकि नई कंपनियां भी कीमतों में इजाफा कर रही हैं। इससे पुरानी कंपनियों के साथ कीमतों का अंतर कम हो रहा है।
हालांकि पिछले कुछ महीनों में कंपनियों ने इनपुट लागत में हुई बढ़ोतरी की भरपाई के लिए कीमतों में कई बार बढ़ोतरी की है और वे मांग को लेकर भी आश्वस्त हैं, फिर भी आगे चलकर खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी का बिक्री की मात्रा पर क्या असर पड़ता है और मार्जिन पर कितना प्रभाव पड़ता है, ये दो मुख्य बातें हैं, जिन पर नजर रखनी होगी।
बाजार पूंजीकरण के हिसाब से सूचीबद्ध तीन अग्रणी पेंट कंपनियों-एशियन पेंट्स, बर्जर पेंट्स और कंसाई नैरोलक में पिछले एक महीने में करीब 10 से 13 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। इंडिगो पेंट्स को ज्यादा फायदा हुआ है और यह 13.5 फीसदी ऊपर है। जेएसडब्ल्यू ड्यूलेक्स (पहले एक्जो नोबेल इंडिया) में 5.5 फीसदी कती वृद्धि हुई है। इस नई कंपनी को ज्यादातर फायदा शुक्रवार के सत्र में हुआ।
बाजार की अग्रणी एशियन पेंट्स ने उम्मीद से बेहतर बिक्री वृद्धि और राजस्व हासिल किया, जो कई तिमाहियों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। कंपनी ने सालाना आधार पर डेकोरेटिव वॉल्यूम में 12 फीसदी से ज्यादा की वृद्धि दर्ज की और प्रीमियम-लक्जरी सेगमेंट में ज्यादा बढ़ोतरी के कारण प्रोडक्ट मिक्स में भी सुधार हुआ। सिस्टमैटिक्स रिसर्च के अभिषेक माथुर और रजत परब बताते हैं कि इन कारणों से एकीकृत राजस्व में सालाना आधार पर 11 फीसदी का इजाफा हुआ जो 12 तिमाहियों में पहली बार दो अंकों में वृद्धि है।
एशियन पेंट्स को उम्मीद है कि कीमतों में बदलाव के बावजूद अगली कुछ तिमाहियों में वॉल्यूम वृद्धि सालाना आधार पर 8 से 10 फीसदी रहेगी। साथ ही, बेहतर प्रोडक्ट मिक्स से वैल्यू-वॉल्यूम का अंतर भी कम होकर 3 से 4 फीसदी रहने की उम्मीद है जबकि पहले यह अनुमान 4 से 5 प्रतिशत था।
डेकोरेटिव पेंट सेगमेंट में दूसरी सबसे बड़ी कंपनी बर्जर पेंट्स की वॉल्यूम वृद्धि 12 तिमाहियों में अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई। कंपनी का एकल वॉल्यूम सालाना आधार पर 11.8 फीसदी बढ़ा, जिसमें कीमतें बढ़ने से पहले वितरक चैनलों के स्टॉक जमा करने और मूल मांग में सुधार का योगदान रहा। वैल्यू ग्रोथ 6.7 फीसदी रही और पिछले दो तिमाहियों में वैल्यू-वॉल्यूम ग्रोथ 7-8 फीसदी से घटकर 5 फीसदी पर आ गई। इसमें प्रीमियम-इमल्शन की बढ़ती मांग, बेहतर प्रोडक्ट मिक्स और चौथी तिमाही के आखिर में कीमतों में बढ़ोतरी का योगदान रहा।
अब जबकि कीमतों में बढ़ोतरी हो चुकी है तो इक्विरस सिक्योरिटीज के प्रणव मेहता और जिनेश कोठारी का अनुमान है कि वैल्यू ग्रोथ, वॉल्यूम ग्रोथ से आगे निकल जाएगी। हालांकि चौथी तिमाही के ऊंचे स्तरों से वृद्धि के सामान्य होने की संभावना है। चौथी तिमाही को कीमतों में बढ़ोतरी से पहले वितरण चैनलों के स्टॉक जमा करने से फायदा मिला था। कंसाई नैरोलक पेंट (केएनपीएल) की मार्च तिमाही की बिक्री में 7.5 फीसदी की बढ़ोतरी हुई, जो अनुमानों से काफी अच्छी थी।
इसे डेकोरेटिव खुदरा कारोबार के बेहतर प्रदर्शन, नए उत्पादों की लॉन्चिंग से मिले अधिक योगदान, विशेष रूप से अधिक मार्जिन वाली इमल्शन श्रेणी में, सुपर प्रीमियम उत्पादों के अच्छे प्रदर्शन और इकॉनमी श्रेणी में प्रचार-प्रसार वापस लेने से मदद मिली।
नोमूरा रिसर्च के मिहिर पी शाह और रिया पाटनी का मानना है कि कंसाई नैरोलक की कुछ चुनिंदा बाजारों पर ध्यान केंद्रित करने की रणनीति उसके लिए बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने में मददगार रही है, खासकर मझोले और छोटे बाजारों में। उन्होंने कहा कि कंसाई को निकट भविष्य में दो कारणों से फायदा होने की संभावना है। पहला, ज़रूरी कच्चे माल की कमी के कारण कीमतें बढ़ने से छोटी कंपनियों पर पड़ने वाला असर और दूसरा, अप्रैल महीने में मॉनसून से पहले माल का स्टॉक जमा करना ।
ज्यादातर बड़ी पेंट कंपनियों ने इनपुट लागत में कमी और लागत नियंत्रण उपायों की वजह से सकल और परिचालन लाभ दोनों ही स्तरों पर सालाना आधार पर अपने मार्जिन बढ़ाए हैं। एशियन पेंट्स के सकल और परिचालन लाभ मार्जिन में क्रमशः 90 आधार अंक और 215 आधार अंक का इजाफा हुआ। कंपनी ने अप्रैल और मई में कच्चे माल की लागत में 20 फीसदी की वृद्धि के मुकाबले कीमतों में 11 फीसदी की बढ़ोतरी की है। जहां उसका इरादा कीमतों में आंशिक बढ़ोतरी का है, वहीं उसे उम्मीद है कि वह लागत नियंत्रण, बेहतर उत्पाद मिश्रण और परिचालन दक्षता के जरिये महंगाई के कुछ असर को खुद ही झेल लेगी।
कंसाई नैरोलक के सकल मार्जिन में 20 आधार अंक की बढ़ोतरी हुई, जबकि परिचालन स्तर पर लागत-दक्षता कार्यक्रमों के कारण 195 आधार अंक का लाभ हुआ। औद्योगिक (बी2बी) सेगमेंट में इसकी ज्यादातर हिस्सेदारी का असर आने वाले समय में इसके मार्जिन पर पड़ने की संभावना है। सेगमेंट के भीतर बेहतर मिक्स और इकनॉमी प्रोडक्ट्स से कम योगदान से कुछ राहत मिल सकती है।
बर्जर पेंट्स ने एक अनुकूल मिश्रण के कारण 22 तिमाहियों में अपना सबसे अधिक सकल मार्जिन दर्ज किया। हालांकि अन्य खर्चों और कर्मचारियों की लागत में वृद्धि के कारण परिचालन स्तर पर मार्जिन विस्तार 97 आधार अंक तक ही सीमित रहा।
सेंट्रम रिसर्च की उपासना मदान और श्रीराम नेरकर का मानना है कि बर्जर पेंट्स का परिचालन लाभ मार्जिन अनुमानित सीमा (15-17 फीसदी) के निचले स्तर पर ही रहेंगे क्योंकि कंपनी अपनी बाजार हिस्सेदारी को बनाए रखने के लिए निवेश करेगी।