Power Stocks: भारत में इस साल मार्च में असामान्य रूप से ज्यादा गर्मी पड़ सकती है जिसका असर देश में बिजली की डिमांड पर पड़ सकता है। साथ ही बढ़ते तापमान और ईंधन की सप्लाई में कमी के कारण वित्त वर्ष 2027 में थर्मल पावर से जुड़ी कंपनियों के पक्ष में संतुलन बदल सकता है। ब्रोकरेज हॉउस मॉर्गन स्टैनली (Morgan Stanley) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में यह बात कही है।
ब्रोकरेज फर्म के अनुसार वित्त वर्ष 26 में बिजली की मांग ज्यादा मजबूत नहीं रही। इसकी वजह यह थी कि गर्मी का मौसम कमजोर रहा और सर्दी असामान्य रूप से ज्यादा ठंडी रही। इससे साल के सबसे ज्यादा खपत वाले महीनों में बिजली की खपत कम हो गई।
हालांकि वित्त वर्ष 2026-27 में रुझान बदलते दिख रहे हैं। देश के कई हिस्सों में तापमान पहले ही बढ़ चुका है और कई जगह हीटवेव जैसे हालात बन रहे हैं। इससे आने वाले महीनों में बिजली की मांग तेजी से बढ़ सकती है। इसी समय बिजली आपूर्ति को लेकर भी कुछ जोखिम सामने आ रहे हैं। मॉर्गन स्टैनली के अनुसार वित्त वर्ष 27 की पहली छमाही में गैस और जलविद्युत (हाइड्रो) से बिजली उत्पादन कम हो सकता है।
ब्रोकरेज ने कहा कि मिडिल ईस्ट में लगातार तनाव के कारण वैश्विक गैस आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है। इससे भारत के लिए एलएनजी की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि हिमालयी क्षेत्र में इस बार रिकॉर्ड के सबसे सूखे स्प्रिंग सीजन में से एक देखने को मिल सकता है, जिससे हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर जनरेशन कम हो सकता है। वित्त वर्ष 26 में भारत के कुल बिजली उत्पादन में गैस आधारित बिजली की हिस्सेदारी लगभग 2 प्रतिशत और हाइड्रोइलेक्ट्रिक की लगभग 9 प्रतिशत रही थी।
मॉर्गन स्टैनली का मानना है कि इन परिस्थितियों में कोयले से चलने वाले थर्मल पावर प्लांट बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने में ज्यादा भूमिका निभाएंगे। इससे कुछ इलाकों में सौर ऊर्जा उत्पादन को कम करना पड़ सकता है, जिससे थर्मल प्लांट आसानी से अपना उत्पादन बढ़ा सकेंगे।
शेयरों की बात करें तो ब्रोकरेज का कहना है कि मर्चेंट पावर की कीमतें मजबूत रहने से अदाणी पावर (Adani Power) और जेएसडब्ल्यू एनर्जी (JSW Energy) जैसी कंपनियों को बेहतर कमाई का फायदा मिल सकता है।
इसके अलावा मुंद्रा परियोजना से जुड़ा कोई समझौता या बिजली अधिनियम की धारा 11 लागू होने की स्थिति में टाटा पावर (Tata Power) के लिए यह सकारात्मक खबर हो सकती है। वहीं, टोरेंट पावर (Torrent Power) को भी फायदा मिल सकता है, खासकर तब जब उसे गैस के वास्तविक कार्गो की उपलब्धता के साथ मर्चेंट गैस बिक्री का मौका मिले। ब्रोकरेज ने यह भी कहा कि अगर पीक पावर की कमी बढ़ती है, तो सरकारी कंपनी एनटीपीसी (NTPC) के शेयरों के वैल्युएशन (प्राइस-टू-बुक मल्टीपल) में भी सुधार देखने को मिल सकता है।