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मार्केट इन्फ्रास्ट्रक्चर इंस्टिट्यूशंस के लिए आईटी रेजिलिएंस इंडेक्स का प्रस्ताव

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25 मार्च को जारी परामर्श पत्र में नियामक ने कहा कि प्रस्तावित इंडेक्स आईटी सिस्टम की सेहत और मजबूती का मानक और सिस्टम-आधारित उपाय उपलब्ध कराएगा

Last Updated- March 25, 2026 | 10:20 PM IST
SEBI

बाजार नियामक सेबी ने स्टॉक एक्सचेंजों, क्लियरिंग कॉरपोरेशन और डिपॉजिटरीज समेत मार्केट इन्फ्रास्ट्रक्चर इंस्टिट्यूशंस के लिए आईटी रेजिलिएंस इंडेक्स शुरू करने का प्रस्ताव किया है। इसका लक्ष्य महत्त्वपूर्ण टेक्नॉलजी सिस्टम की निगरानी मजबूत बनाना है।

25 मार्च को जारी परामर्श पत्र में नियामक ने कहा कि प्रस्तावित इंडेक्स आईटी सिस्टम की सेहत और मजबूती का मानक और सिस्टम-आधारित उपाय उपलब्ध कराएगा। इससे एमआईआई समय के साथ अपने प्रदर्शन को ट्रैक कर सकेंगे और कमियों का पता लगा सकेंगे। सेबी ने कहा कि इस कदम का मकसद ऐसे समान पैमानों और भारांक का सेट तैयार करना है, जिससे विभिन्न संस्थानों के बीच तुलना करना संभव हो सके। साथ ही आंतरिक प्रशासन और जोखिम निगरानी में भी सुधार हो। सेबी ने कहा, एमआईआई के आईटी सिस्टम उनके सुचारू और निर्बाध कामकाज का आधार हैं।

निवेश सलाहकारों और शोध विश्लेषकों के लिए ऑडिटर पूल बढ़ाया

सेबी ने निवेश सलाहकारों और अनुसंधान विश्लेषकों के सालाना अनुपालन ऑडिट करने के लिए पात्र पेशेवरों के समूह का विस्तार किया है, जिससे अब इंस्टिट्यूट ऑफ कॉस्ट अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया के सदस्य भी ऐसे ऑडिट कर सकेंगे।

बुधवार को जारी दो अलग-अलग परिपत्र में नियामक ने निवेश सलाहकारों और शोध विश्लेषकों के लिए अपने मास्टर सर्कुलर के प्रावधानों में संशोधन किया ताकि चार्टर्ड अकाउंटेंट और कंपनी सचिवों के साथ-साथ कॉस्ट अकाउंटेंट को भी औपचारिक रूप से इसमें शामिल किया जा सके। दोनों ही परिपत्र तुरंत लागू हो गए हैं।

यह कदम इंस्टिट्यूट ऑफ़ कॉस्ट अकाउंटेंट्स ऑफ़ इंडिया की मांग के बाद उठाया गया है और यह मौजूदा नियामकीय प्रावधानों के अनुरूप है, जो पहले से ही ऐसे ऑडिट के लिए कॉस्ट अकाउंटेंट्स को मान्यता देते हैं। इन बदलावों से ऑडिट इकोसिस्टम में क्षमता की कमी दूर करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

सेबी ने फंडों के लिए इंट्राडे उधारी नियमों को टाला

सेबी ने फंड उद्योग की परिचालन संबंधी चिंताओं के बाद म्युचुअल फंडों के इंट्राडे में उधार लेने से जुड़े दिशानिर्देशों को लागू करने की तारीख 15 जुलाई, 2026 तक टाल दी है। बुधवार को जारी परिपत्र में नियामक ने कहा कि बदली हुई समय-सीमा विशेष रूप से इंट्राडे उधार से जुड़े उन प्रावधानों पर लागू होगी, जिन्हें इस महीने की शुरुआत में म्युचुअल फंडों द्वारा उधार लेने को नियंत्रित करने वाले व्यापक ढांचे के हिस्से के रूप में पेश किया गया था।

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First Published - March 25, 2026 | 10:14 PM IST

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