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ज्यादा अनुशासित हो गई है खुदरा ट्रेडिंग : अपस्टॉक्स सीईओ रवि कुमार

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उतार-चढ़ाव बाजारों की विशेषता है और भारतीय निवेशक धीरे-धीरे इसे लेकर ज्यादा परिपक्व हो रहे हैं

Last Updated- May 07, 2026 | 9:47 PM IST
Upstox CEO Ravi Kumar
अपस्टॉक्स के सह-संस्थापक और सीईओ रवि कुमार

डिस्काउंट ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म अपस्टॉक्स के सह-संस्थापक और सीईओ रवि कुमार का कहना है कि पश्चिम एशिया की जंग की वजह से हाल में हुई उथल-पुथल ने निवेशकों की गतिविधियों में तेजी ला दी है। साथ ही, महामारी के बाद जो तेजी आई थी, उसमें अब व्यापक भागीदारी के रुझान सामान्य होते दिख रहे हैं। सुंदर सेतुरामन को दिए ईमेल इंटरव्यू में कुमार ने कहा कि खुदरा निवेशक अब ज्यादा समझदार और जोखिम के प्रति जागरूक हो रहे हैं क्योंकि उनका ट्रेडिंग व्यवहार अब बाजार की तेजी के आधार पर दांव लगाने से हटकर ज्यादा अनुशासित रणनीतियों की ओर हो रहा है। संपादित अंश…

पश्चिम एशिया के संघर्ष ने ट्रेडिंग रुझानों को कैसे प्रभावित किया है?

इस संघर्ष ने विभिन्न प्लेटफॉर्मों पर निवेशकों की सक्रिय भागीदारी बढ़ा दी है। निवेशक बाजारों पर ज्यादा सक्रियता से नजर रख रहे हैं। पोर्टफोलियो को फिर से संतुलित कर रहे हैं। अनिश्चितता के माहौल में पोजीशन की हेजिंग कर रहे हैं। अनिश्चितता की ऐसी अवधि में आमतौर पर गतिविधियोंमें तेजी आती है। उतार-चढ़ाव बाजारों की विशेषता है और भारतीय निवेशक धीरे-धीरे इसे लेकर ज्यादा परिपक्व हो रहे हैं।

2025-26 में डीमैट खातों में बढ़ोतरी की रफ्तार धीमी पड़ गई। ऐक्टिव क्लाइंटों की संख्या भी कम हुई है। क्यों?

महामारी के बाद खुदरा निवेश में जबरदस्त तेजी आई। फिर वित्त वर्ष 2025-26 में चीजें सामान्य होती दिख रही हैं। डेरिवेटिव पर नियामक की सख्ती और बाजार में गिरावट की वजह से पूरे उद्योग में नए खाते खोलने और सक्रिय भागीदारी दोनों में ही कमी आई है। यह कोई सिस्टम की कमजोरी नहीं है बल्कि यह बहुत तेजी से हो रही बढ़ोतरी से हटकर सतत भागीदारी की ओर बदलाव का संकेत है।

डेरिवेटिव पर ट्रेड होने वाले अनुबंधों की संख्या घट गई है। इसका अपस्टॉक्स जैसे डिस्काउंट ब्रोकरों पर क्या असर पड़ा है और आपकी क्या रणनीति है?

डेरिवेटिव इस उद्योग के लिए कमाई का अहम जरिया बने हुए हैं। इसलिए वॉल्यूम कम होने से थोड़े समय के लिए दबाव जरूर बनता है। लेकिन हमारी रणनीति विविधीकरण पर केंद्रित है। हमारे कमोडिटीज बिजनेस के मासिक राजस्व में लगभग 5 गुना बढ़ोतरी हुई है, हमारी मार्जिन ट्रेडिंग फ़ैसिलिटी (एमटीएफ) बुक सालाना आधार पर दोगुनी हो गई है। हम इंश्योरेंस, लेंडिंग और ऐसेट मैनेजमेंट के क्षेत्र में भी विस्तार कर रहे हैं।

क्या आपने सितंबर 2024 में आई गिरावट और नियामकीय सख्ती के बाद से डेरिवेटिव ट्रेडरों के व्यवहार में कोई बदलाव देखा है?

हां, व्यवहार में स्पष्ट बदलाव आया है। रिटेल ट्रेडर अब ज्यादा सोच-समझकर फैसला लेते हैं और जोखिम के प्रति ज्यादा जागरूक हो गए हैं। पिछले सालों की जोशीली और मोमेंटम आधारित रणनीतियों की जगह अब ज्यादा अनुशासित और जानकारीपूर्ण भागीदारी ले रही है।

‘ट्रू-टू-लेबल’ नियम किस तरह काम कर रहे हैं? क्या सेबी को इस कदम पर फिर से विचार करना चाहिए?

निवेशकों का भरोसा और पारदर्शिता बाजार की लंबी अवधि की वृद्धि के लिए बुनियादी बात है। ‘ट्रू-टू-लेबल’ नियम स्पष्टता बढ़ाते हैं और योजनाओं को निवेशकों की उम्मीदों के अनुरूप बनाते हैं। हालांकि इन्हें लागू करने के लिए कामकाज के तरीकों में कुछ बदलाव करने पड़ सकते हैं।

खुदरा निवेशकों के लिए सेबी एल्गो ट्रेडिंग शुरू कर रहा है। इस पर आपकी राय?

खुदरा निवेशक अब ज्यादा से ज्यादा आधुनिक टूल्स और ऑटोमेशन क्षमताएं चाह रहे हैं। हम इस क्षेत्र में इनोवेशन का स्वागत करते हैं, बशर्ते जोखिम प्रबंधन और निवेशकों की सुरक्षा अहम रहे। अगर जिम्मेदारी से लागू किया जाए तो एल्गो एक्सेस से खुदरा निवेशकों की भागीदारी काफी हद तक बढ़ सकती है।

वित्त वर्ष 26 में अपस्टॉक्स के ऐक्टिव क्लाइंटों की संख्या में भारी गिरावट देखने को मिली। इसकी क्या वजह थी और आईपीएल विज्ञापन बंद करने का क्या कारण था?

हमारा फोकस अब आक्रामक, वॉल्यूम आधारित अधिग्रहण से हटकर ज्यादा बेहतर गुणवत्ता वाली, रिटेंशन आधारित वृद्धि पर आ गया है। ऐक्टिव क्लाइंटों के रुझान ज्यादातर बड़े बाजार के सामान्य होने और नियामकीय बदलावों को दिखाते हैं। इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) जैसे महंगे प्रचार को कम करना सोच-समझकर लिया गया फैसला था, जिसका मकसद यूनिट इकनॉमिक्स को बेहतर बनाना था, न कि अपनी महत्वाकांक्षा को धीमा करना।

कंपनी को सूचीबद्ध कराने की योजना?

हमें सूचीबद्ध होने की जल्दी नहीं है। एक मजबूत बैलेंस शीट, अच्छी लाभप्रदता और जबरदस्त नकदी प्रवाह के साथ हमारी प्राथमिकता लंबे समय तक टिकाऊ मूल्य बनाना है। हम बाजार में तभी सूचीबद्ध होंगे जब समय और बाजार के हालात सबसे अच्छे होंगे।

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First Published - May 7, 2026 | 9:45 PM IST

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