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ईरान युद्ध और तेल की बढ़ती कीमतों के चलते FPIs की रिकॉर्ड बिकवाली, 4 माह में बेचे ₹1.68 लाख करोड़ के शेयर

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ज्यादातर बिकवाली मार्च में हुई क्योंकि ईरान युद्ध के कारण तेल की कीमतें बढ़ गई थीं।​ मार्च 2026 में एफपीआई ने शुद्ध रूप से 1.1 लाख करोड़ रुपये के शेयर बेचे

Last Updated- April 20, 2026 | 11:06 PM IST
FPI

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) हाल में भले ही शेयर बाजार में खरीदार दिख रहे हों मगर इस साल अब तक उनकी बिकवाली पिछले पूरे साल की कुल बिकवाली से ज्यादा हो चुकी है। 2026 में विदेशी निवेशकों ने इ​क्विटी बाजार में 1.68 लाख करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की जो बीते वर्षों में दर्ज की गई शुद्ध बिकवाली से अ​धिक है। ज्यादातर बिकवाली मार्च में हुई क्योंकि ईरान युद्ध के कारण तेल की कीमतें बढ़ गई थीं।​ मार्च 2026 में एफपीआई ने शुद्ध रूप से 1.1 लाख करोड़ रुपये के शेयर बेचे।

इसके पहले फरवरी में विदेशी निवेशक शुद्ध खरीदार बन गए थे जिसकी वजह भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार समझौते को लेकर आशावाद और भारतीय सामान पर अमेरिका द्वारा शुल्क कम करने का फैसला था। हालांकि ईरान से जुड़े संघर्ष ने एक बार फिर एफपीआई को जो​खिम वाली संप​​त्तियों से निवेश निकालने के लिए मजबूर कर दिया।

अमेरिका-ईरान युद्ध के बाद ईरान ने खाड़ी देशों में ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमला किया और होर्मुज स्ट्रेट से तेल की आवाजाही रोक दी। होर्मुज दुनिया भर में तेल और गैस की शिपमेंट के लिए अहम रास्ता है। दुनिया भर में तेल की कुल आवाजाही का करीब 20 फीसदी हिस्सा इसी स्ट्रेट से होकर गुजरता है।

युद्ध शुरू होने के बाद से तेल की आपूर्ति पर असर पड़ने की वजह से ब्रेंट क्रूड की कीमतें 22 फीसदी बढ़ गई हैं और यह 90.1 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। तेल की बढ़ती कीमतों ने भारत को गंभीर संकट में डाल दिया है क्योंकि देश अपनी ऊर्जा की ज्यादातर जरूरतें आयात से ही पूरी करता है। तेल की कीमतें बढ़ने से राजकोषीय घाटा बढ़ता है, महंगाई बढ़ती है और आर्थिक विकास पर भी बुरा असर पड़ता है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली भारत तक ही सीमित नहीं रही है बल्कि ज्यादातर उभरते बाजार में यह रुझान देखा गया। हालांकि इस साल भारत में हुई बिकवाली द​​क्षिण कोरियाई बाजार को छोड़कर अन्य उभरते बाजारों के मुकाबले ज्यादा रही। द​​क्षिण कोरियाई बाजार में इस साल एफपीआई ने अभी तक करीब 34 अरब डॉलर की निकासी की है।

अल्फानीति फिनटेक के सह-संस्थापक यूआर भट्ट ने कहा, ‘भारत में शेयरों का मूल्यांकन अन्य दूसरे उभरते बाजारों की तुलना में काफी अ​धिक है। कंपनियों की कमाई में बढ़ोतरी ज्यादा रहने की वजह से बीते समय में हमने मूल्यांकन प्रीमियम का लंबे समय तक फायदा उठाया। मगर युद्ध के बाद कच्चे तेल महंगा हो गया और तेल पर भारत की भारी निर्भरता को देखते हुए अर्थव्यवस्था के लगभग हर क्षेत्र पर इसका असर पड़ा है। कमाई का परिदृश्य भी अब काफी कमजोर हो गया है। जब कमाई में बढ़ोतरी निवेशकों के उम्मीद जितनी नहीं रहती है तो मूल्यांकन प्रीमियम वाजिब नहीं
माना जाता।’

ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच चल रहे युद्ध के समाधान का कोई संकेत नहीं दिख रहा है। ईरान ने शांति वार्ता के दूसरे दौर में शामिल होने को लेकर कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया और उधर अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट पर अपनी नाकाबंदी जारी रखी और एक ईरानी पोत को जब्त कर लिया।

एफपीआई की भारी बिकवाली से इस साल अभी तक सेंसेक्स 7.9 फीसदी और निफ्टी 6.8 फीसदी टूट चुका है। बंबई स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण 10.1 लाख करोड़ रुपये घटकर 465.7 लाख करोड़ रुपये रह गया। इस साल डॉलर के मुकाबले रुपये में 3.5 फीसदी की नरमी आ चुकी है और प​श्चिम ए​शिया में युद्ध शुरू होने के बाद से यह करीब 2.3 फीसदी नरम हुआ है। इससे विदेशी कोषों का रिटर्न प्रभावित हो रहा है।

मार्सेलस इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के सह-संस्थापक प्रमोद गुब्बी ने कहा, ‘हमने रुपये में काफी गिरावट देखी है। मूल्यांकन अपने आप ठीक हो सकते हैं और पिछले महीने हमने कुछ सुधार भी देखा। लेकिन रुपये में नरमी ने एफपीआई को मिलने वाले रिटर्न को खत्म कर दिया है। रुपये की गिरावट को संरचनात्मक तरीके से ठीक करने की जरूरत है। अगर युद्ध खत्म हो जाता है और तेल की कीमतें 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ जाती हैं तो हम रुपये में उछाल देखेंगे। एफपीआई की बिकवाली भी कुछ कम हो सकती है और शायद निवेश के प्रवाह में उलटफेर भी देखने को मिल सकता है।’

आगे चलकर ईरान युद्ध का समाधान और ऊर्जा की कीमतों में स्थिरता भारत में एफपीआई के निवेश लौटने के लिए अहम होंगे।

भट्ट ने कहा, ‘विदेशी निवेशकों के लौटने की संभावना तब तक कम है, जब तक कि मूल्यांकन प्रीमियम और कमाई में बढ़ोतरी के बीच संतुलन न बन जाए। और कमाई तभी बढ़ेगी जब होर्मुज की नाकाबंदी हट जाए और तेल की कीमतें युद्ध से पहले के स्तर पर लौट आएं।’

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First Published - April 20, 2026 | 10:30 PM IST

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