Dollar Vs Rupee: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया सोमवार (13 अप्रैल) को तेज गिरावट के साथ खुला और डॉलर के मुकाबले 55 पैसे टूटकर 93.28 पर पहुंच गया। शुक्रवार (10 अप्रैल) के बंद स्तर 92.73 के मुकाबले इसमें गिरावट आई। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और वैश्विक स्तर पर जोखिम से बचने की प्रवृत्ति बढ़ने से रुपये पर दबाव बना।
यह गिरावट दो हफ्तों की राहत भरी तेजी के बाद आई है। ऐसा इसलिए क्योंकि बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के चलते बाजार का रुख फिर नकारात्मक हो गया। जून डिलीवरी वाला ब्रेंट क्रूड करीब 7 प्रतिशत बढ़कर 102 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत किसी समझौते तक नहीं पहुंच सकी। इस बीच अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और डॉलर मजबूत हुए, जिससे पिछले हफ्ते का वह रुझान उलट गया जिसने रुपये समेत उभरते बाजारों की मुद्राओं को सहारा दिया था।
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी नौसेना होरमुज़ जलडमरूमध्य की नाकेबंदी शुरू करेगी। इससे वैश्विक तेल आपूर्ति में बाधा की आशंका बढ़ गई है। विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे कदम कच्चे तेल की कीमतों को और बढ़ा सकते हैं और मुद्रा बाजार में अस्थिरता को लंबा खींच सकते हैं। भारत के लिए ऊंची तेल कीमतें दोहरी चुनौती पेश करती हैं—यह व्यापार घाटा बढ़ाती हैं और महंगाई को बढ़ावा देती हैं, जो दोनों ही रुपये पर दबाव डालते हैं।
बाहरी दबावों के अलावा, Indian Rupee को घरेलू प्रवाह से मिलने वाला समर्थन भी कम हुआ है। हाल में रुपये की मजबूती का एक कारण बैंकों द्वारा आर्बिट्राज पोजीशन को कम करना था, जो भारतीय रिजर्व बैंक की तरफ से ऑनशोर फॉरेक्स एक्सपोजर पर सीमा लगाने के बाद हुआ था। इससे डॉलर की बिक्री बढ़ी थी।
इन समायोजनों की समय-सीमा शुक्रवार को खत्म होने के बाद यह सहारा अब समाप्त हो गया है। इससे रुपया वैश्विक दबावों के प्रति ज्यादा संवेदनशील हो गया है। विश्लेषकों का मानना है कि निकट अवधि में रुपया अस्थिर बना रह सकता है और इसकी दिशा तेल कीमतों, भू-राजनीतिक घटनाक्रम और अमेरिकी डॉलर की चाल पर निर्भर करेगी।