भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) को मंजूरी देने यानी ऑनबोर्डिंग के समय को घटाकर 5 दिन करने की संभावनाएं तलाश रहा है। फिलहाल यह समयसीमा करीब एक महीने की है। सूत्रों के अनुसार, बाजार नियामक ने कस्टोडियन से कहा है कि वे पूरी तरह डिजिटल प्रक्रिया अपनाने, भारतीय डिजिटल हस्ताक्षरों के व्यापक इस्तेमाल और पंजीकरण प्रक्रिया में शामिल मध्यस्थों के बीच बेहतर समन्वय पर ध्यान केंद्रित करें।
सूत्रों ने बताया कि सेबी ने पिछले महीने कस्टोडियन के साथ कम से कम दो बैठकें की हैं ताकि बाधाओं की पहचान की जा सके और एफपीआई के पंजीकरण में तेजी लाई जा सके। कस्टोडियन के सहयोग से विकसित एक पायलट मॉडल का फिलहाल परीक्षण किया जा रहा है। इस संबंध में हो रही बातचीत से अवगत एक व्यक्ति ने कहा कि इस मॉडल के जरिये महज 5 दिनों में एफपीआई के पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी हो गई।
एक अधिकारी ने कहा, ‘तमाम सुधारों ने इस प्रक्रिया को पहले ही काफी छोटा कर दिया है। मगर सेबी मंजूरी प्रक्रिया में लगने वाले समय को कम करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और आयकर विभाग के साथ संपर्क में भी है।’
सूत्रों ने बताया कि सामान्य आवेदन फॉर्म की शुरूआत ने सेबी पंजीकरण, आरबीआई से संबंधित बैंक खाता खोलने की प्रक्रियाओं और कर संबंधी औपचारिकताओं को सरल बनाने में मदद की है। इससे दक्षता में काफी सुधार हुआ है। कस्टोडियन को पूरी तरह डिजिटल बनाने के लिए भी सेबी प्रोत्साहित कर रहा है। इससे दूतावास के जरिये सत्यापन और कागजी कार्रवाई की आवश्यकता को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।
इस संबंध में जानकारी के लिए सेबी को भेजे गए ईमेल का खबर लिखे जाने तक कोई जवाब नहीं आया।
सेबी ने जनवरी में एकीकृत डिजिटल वर्कफ्लो चालू किया था जो सामान्य आवेदन फॉर्म के जरिये सीधे डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाण पत्र और इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर जारी करने में समर्थ बनाता है।
मौजूदा प्रक्रिया के तहत एफपीआई पंजीकरण नैशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी (एनएसडीएल) प्लेटफॉर्म के जरिये ऑनलाइन शुरू होता है और बाद में एक नामित डिपॉजिटरी प्रतिभागी (डीडीपी) द्वारा अधिकृत किया जाता है। आवश्यक जानकारी और दस्तावेज जमा हो जाने के बाद एफपीआई को सामान्य आवेदन फॉर्म की हस्ताक्षरित हार्ड प्रतियां डीडीपी को भेजनी होती हैं। डीडीपी द्वारा समीक्षा और पंजीकरण के बाद पैन आवेदन आईटी विभाग को अग्रसारित किया जाता है।
शेयर बाजार में कारोबार करने से पहले एफपीआई को कस्टोडियन समझौता करना, प्रतिभूति और नकद खाता खोलना होगा, डीमैट और अपने ग्राहक को जानें (केवाईसी) की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके साथ ही सरकारी प्रतिभूतियां रखने के लिए सहायक सामान्य खाता (सीएसजीएल), रुपये में बैंक खाता खोलना और स्टॉक एक्सचेंज पर ट्रेडिंग के लिए यूनिक ग्राहक कोड हासिल करना होगा। एक कर विशेषज्ञ ने बताया कि केवल स्थायी खाता क्रमांक (पैन) जारी होने में ही 4 दिन तक का समय लग सकता है।
एनएसडीएल के आंकड़ों के अनुसार दिसंबर 2025 के अंत में एफपीआई के पास मौजूद परिसंपत्तियों का मूल्य 81.39 लाख करोड़ रुपये था, जो मई 2026 में घटकर करीब 74.77 लाख करोड़ रुपये रह गया।
फरवरी में कोटक महिंद्रा बैंक ने पूरी तरह से इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर के जरिये दो एफपीआई लाइसेंस जारी करने की घोषणा की थी। कोटक महिंद्रा बैंक में बैंकिंग और वित्तीय संस्थान समूह के प्रेसिडेंट सचिन सामंत ने बताया कि बैंक ने एक ऐसी कार्यप्रणाली शुरू की है जिसमें स्कैन किए गए या मसौदा दस्तावेज के आधार पर समानांतर सत्यापन और पावर ऑफ अटॉर्नी, स्थायी निर्देश, समझौते जैसे दस्तावेज पर डिजिटल हस्ताक्षर की सुविधा है।