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SEBI Investment Survey: जोखिम लेने से बचते हैं 80% भारतीय परिवार, Gen Z भी पीछे नहीं

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सर्वेक्षण में 400 शहरों और 1,000 गांवों के 90,000 परिवारों को शामिल किया गया। सेबी ने निवेशकों से डायवर्स पोर्टफोलियो अपनाने का आग्रह किया  

Last Updated- October 12, 2025 | 6:13 PM IST
Equity Mutual Fund

SEBI Investment Survey: भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के 2025 के इन्वेस्टमेंट सर्वे से पता चला है कि भारतीय परिवार जोखिम लेने के मामले में बेहद सतर्क बने हुए हैं। सर्वेक्षण में 400 शहरों और 1,000 गांवों के 90,000 परिवारों को शामिल किया गया। इसमें सामने आया कि लगभग 80 फीसदी परिवार उच्च और जोखिम भरे रिटर्न की तुलना में अपनी पूंजी की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हैं। यहां तक कि Gen Z में भी 79 फीसदी ने इसी तरह की सतर्कता दिखाई।

निवेशक जोखिम से क्यों बचते हैं?

भारतीय पारंपरिक रूप से सतर्क निवेशक रहे हैं। मनीएडुस्कूल के फाउंडर अर्नव पंड्या कहते हैं, “लोग वही करते हैं जो उन्होंने अपने माता-पिता को करते देखा है।”

जोखिम से बचने की प्रवृत्ति मानव मनोविज्ञान में निहित है और यह जीवित रहने की प्रवृत्ति से जुड़ी है। प्लान अहेड वेल्थ एडवाइजर्स के फाउंडर और सीईओ विशाल धवन कहते हैं, “एक निश्चित राशि खोने पर जो दर्द होता है, उतनी ही राशि पाने पर जो आनंद मिलता है, वह उससे तीन गुना ज्यादा होता है।”

आय की अनिश्चितता भी सतर्कता को बढ़ावा देती है। धवन कहते हैं, “असुरक्षित ऋणों में बढ़ोतरी और EMIs के बोझ ने निवेशकों को और ज्यादा सतर्क कर दिया है।” वे आगे कहते हैं कि पिछले एक साल में शेयरों के सपाट प्रदर्शन ने इस तरह के व्यवहार को और मजबूत किया है।

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जोखिम से बचने का वेल्थ क्रिएशन पर असर

पूंजी की सुरक्षा पर जोर देने से संपत्ति निर्माण सीमित हो जाता है। सेबी में पंजीकृत निवेश सलाहकार दीपेश राघव कहते हैं, “जोखिम भरी संपत्तियों से बचने से लंबी अवधि में पोर्टफोलियो का रिटर्न कम हो जाता है।”

युवा निवेशक हाई रिटर्न वाले लेकिन अस्थिर निवेश जैसे शेयरों से बचकर कंपाउंडिंग का लाभ खो देते हैं। पर्याप्त इक्विटी एक्सपोजर के बिना रिटायरमेंट और बच्चों की शिक्षा जैसे लॉन्ग टर्म गोल्स को पूरा करने की कोशिश करने से परिणाम खराब होते हैं।

अत्यधिक सतर्क रहना नियमित आय स्रोतों पर निर्भरता बढ़ा देता है, जिससे लोगों को लंबे समय तक और कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। पंड्या कहते हैं, “जब पोर्टफोलियो रिटर्न महंगाई से आगे नहीं बढ़ते, तो जीवन स्तर सुधारना मुश्किल हो जाता है।”

फिक्स्ड-इनकम प्रोडक्ट हाई टैक्स ब्रैकेट में रहने वालों के लिए टैक्स के लिहाज से बेहतर नहीं होते हैं, जिससे कर-पश्चात रिटर्न कम हो जाता है।

जरूरत से ज्यादा जोखिम लेने के खतरे

कुछ निवेशक इसके उलट चरम पर चले जाते हैं और जरूरत से ज्यादा जोखिम उठाते हैं। पंड्या कहते हैं, “तेजी से अमीर बनने की लालसा लोगों को फ्यूचर और ऑप्शंस (F&O) या क्रिप्टोकरेंसी जैसे जोखिम भरे साधनों की ओर खींचती है।”

अप्रैल 2021 से मार्च 2024 तक के सेबी के आंकड़ों से पता चलता है कि 93 फीसदी F&O ट्रेडर्स को नुकसान हुआ, जिनका औसत घाटा लगभग 1 लाख रुपये प्रति व्यक्ति रहा।

जोखिम भरे ट्रेड से होने वाला नुकसान स्वास्थ्य या नौकरी खोने जैसी आपातकालीन स्थिति के लिए रखे गए फंड को कम कर सकता है। बेतहाशा जोखिम उठाना उन निवेशकों के लिए विशेष रूप से हानिकारक है जिनके पास सीमित साधन हैं और जो मानते हैं कि उच्च जोखिम ही उनके लिए धन कमाने का एकमात्र रास्ता है।

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विभिन्न एसेट क्लास में जोखिम

डेट आम तौर पर शेयरों की तुलना में सुरक्षित माना जाता है, लेकिन इसमें तरलता (Liquidity) का जोखिम होता है, जैसा कि 2020 के फ्रैंकलिन टेम्पलटन डेट फंड संकट के दौरान देखा गया था। लंबी अवधि वाले बॉन्ड्स में उच्च ब्याज दर का जोखिम होता है- जब दरें बढ़ती हैं, तो उनकी कीमतें शॉर्ट ड्यूरेशन बॉन्ड्स की तुलना में ज्यादा गिरती हैं।

डेट इंस्ट्रूमेंट में पुनर्निवेश (Reinvestment) का जोखिम भी होता है — यानी जब निवेश की अवधि समाप्त होती है और ब्याज दरें कम होती हैं, तो निवेशकों को कम दर पर फिर से निवेश करना पड़ता है।

इसके अलावा, इनमें क्रेडिट रिस्क भी होता है। राघव कहते हैं, “उच्च गुणवत्ता वाले कॉर्पोरेट बॉन्ड या सरकारी बॉन्ड में निवेश करने से यह जोखिम कम किया जा सकता है।”

डेट में महंगाई (Inflation) का भी जोखिम होता है। पंड्या कहते हैं, “कभी-कभी रिटर्न बढ़ती कीमतों के साथ नहीं चल पाते।”

इक्विटी अस्थिर होती हैं। जो निवेशक समय से पहले निवेश से बाहर निकल जाते हैं, वे काल्पनिक नुकसान को वास्तविक नुकसान में बदल देते हैं। कुछ प्रकार के इक्विटी, जैसे स्मॉल-कैप स्टॉक, तनावपूर्ण बाजार स्थितियों में भी तरलता खो सकते हैं।

रियल एस्टेट में पूंजी हानि और तरलता का जोखिम होता है। इस संपत्ति से बाहर निकलने में समय लगता है, खासकर आर्थिक मंदी के दौरान।

जोखिम को अच्छे से कैसे मैनेज करें?

अपने जोखिम सहने (Risk Appetite) की क्षमता को अच्छे से समझना बेहद जरूरी है। राघव कहते हैं, “अपने वास्तविक जोखिम सहनशीलता के बारे में जागरूक होने में समय लगता है और कुछ बाजार चक्रों का अनुभव जरूरी है।” पंड्या कहते हैं कि अस्थिर परिस्थितियों में निवेशक की प्रतिक्रिया उनके वास्तविक जोखिम सहनशीलता को दर्शाती है।

समय अवधि (Time Horizon) यह तय करती है कि कितना जोखिम लिया जाए। अल्पकालिक लक्ष्यों के लिए कम जोखिम और दीर्घकालिक लक्ष्यों के लिए ज्यादा जोखिम लेना चाहिए। धवन कहते हैं, “दीर्घकालिक निवेश के लिए शेयर और रियल एस्टेट आदर्श हैं।”

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जोखिम को सही ढंग से संभालने के लिए विविधीकरण (Diversification) और संपत्ति आवंटन (Asset Allocation) बहुत जरूरी है। निवेशकों को अपने जोखिम सहने की क्षमता और निवेश अवधि के अनुसार अपनी संपत्ति का मिश्रण—जैसे 60:40 या 70:30 इक्विटी-डेट—निर्धारित करना चाहिए। धवन सलाह देते हैं कि जोखिम सहनशीलता को वैज्ञानिक रूप से मापने के लिए साइकोमेट्रिक टूल्स का उपयोग किया जाए।

नियमित पोर्टफोलियो रीबैलेंसिंग (Portfolio Rebalancing) भी जोखिम प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण है। इसमें बेहतर प्रदर्शन करने वाले परिसंपत्ति वर्गों में निवेश कम करना और कम प्रदर्शन करने वाले वर्गों में निवेश बढ़ाना शामिल है।

अंत में, कीमतों को बार-बार चेक करने से बचें। राघव कहते हैं, “कई पुराने निवेशकों ने रियल एस्टेट में ज्यादा पैसा कमाया क्योंकि उन्होंने लंबे समय तक निवेश बनाए रखा और अल्पकालिक उतार-चढ़ाव को नजरअंदाज किया।”

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First Published - October 12, 2025 | 5:59 PM IST

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