भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) अपनी आगामी 23 मार्च बोर्ड बैठक में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के लिए उसी दिन किए गए नकद बाजार लेनदेन में फंडों को नेट करने के लिए ढांचे को मंजूरी दे सकता है। सूत्रों ने यह जानकारी दी। इस कदम से एफपीआई के लिए तरलता दबाव कम होगा और पूंजी की लागत कम हो सकेगी, खास तौर पर ज्यादा मात्रा वाले कारोबारी सत्रों जैसे इंडेक्स रीबैलेंसिंग दिनों के दौरान।
मंजूरी मिलने के बाद एफपीआई किसी विशेष दिन नकद बाजार में बिक्री से प्राप्त राशि का इस्तेमाल उसी दिन खरीद के लिए कर सकेंगे। लेकिन अगर एफपीआई एक ही दिन या निपटान चक्र में एक ही शेयर को खरीदता और बेचता है तो नेटिंग की अनुमति नहीं भी दी जा सकती है।
मौजूदा समय में एफपीआई को खरीद सौदों के लिए धन उपलब्ध कराने और बिक्री सौदों के लिए प्रतिभूतियां अलग से देने की जरूरत होती है। सभी लेनदेन कस्टोडियन के स्तर पर इकट्ठे होते हैं और एफपीआई को अपने देनदारियों को सकल आधार पर पूरा करना होता है। कस्टोडियन क्लियरिंग कॉरपोरेशन के साथ उनकी डिलिवरी का शुद्ध आधार पर निपटान करते हैं।
मौजूदा परंपरा के तहत एफपीआई को कम से कम एक दिन के लिए कम निवेश से जुड़े रहते हैं और विदेशी मुद्रा में अंतर तथा अल्पकालिक क्रेडिट सुविधा पर निर्भरता के कारण उन्हें अतिरिक्त लागत उठानी पड़ती है। पिछले साल एफपीआई ने नियामक से छूट की मांग की थी। चर्चाओं के बाद सेबी ने इस साल जनवरी में इस मसले पर परामर्श पत्र जारी किया था।
सूत्रों ने कहा कि बाजार नियामक इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (इनविट) और रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (रीट) के लिए भी कई छूट मंजूर कर सकता है, जिनमें लिक्विड फंड योजनाओं में निवेश शामिल है। सेबी रीट और इनविट को पोर्टफोलियो में विविधता लाने के लिए 10 या उससे अधिक के क्रेडिट जोखिम मूल्य वाली योजनाओं में निवेश की अनुमति दे सकता है, क्योंकि क्रेडिट जोखिम मूल्य 12 की मौजूदा सीमा से निवेश के अवसर सीमित हो जाते हैं।
सेबी नई परियोजनाओं में निवेश के लिए निजी इनविट के मामले में निवेश शर्तों को सार्वजनिक इनविट के अनुरूप भी बना सकता है। इसके अलावा, शेयर ब्रोकर जैसे बाजार बिचौलियों के लिए ‘फिट ऐंड प्रॉपर पर्सन’ मानकों के पालन की प्रक्रिया को भी बोर्ड बैठक में आसान बनाए जाने की संभावना है।