भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की 19 जून को बोर्ड बैठक हो रही है। इसमें ओपन मार्केट शेयर बायबैक (खुले बाजार से शेयर वापस खरीदने की प्रक्रिया) फिर शुरू करने की इजाजत दी जा सकती है। जानकार सूत्रों के अनुसार बैठक में कृषि जिंसों के सेगमेंट में सुधार, वैकल्पिक निवेश फंडों (एआईएफ) को आसान मंजूरी और म्युचुअल फंडों (एमएफ) के लिए उधारी नियमों को नरम बनाने पर विचार किया जा सकता है।
शेयर बाजारों के माध्यम से शेयरों की पुनर्खरीद की दुबारा शुरुआत को महत्त्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसके तहत वह फैसला पलट जाएगा जिसे नियामक ने अप्रैल 2025 में लिया था और जिसके तहत इस माध्यम को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने की बात थी। उस समय, ये संशोधन शेयरधारकों के साथ होने वाले असमान व्यवहार और तत्कालीन कर प्रणाली से पैदा होने वाले प्रभावों को लेकर जताई गई चिंताओं के बाद किए गए थे।
सेबी अब शेयर बाजारों के जरिये ओपन मार्केट रूट फिर शुरू कर सकता है, क्योंकि 1 अप्रैल से बायबैक से होने वाली आय पर टैक्स के नियमों में बदलाव किया गया है। बदले नियमों के तहत शेयरधारकों को बायबैक से मिलने वाली रकम पर पूंजीगत लाभ के तौर पर टैक्स देना होता है।
पिछली व्यवस्था में बायबैक टैक्स का बोझ कंपनियों पर था, जिससे यह चिंता पैदा हुई कि इसमें हिस्सा लेने वाले शेयरधारक तो टैक्स-फ्री तरीके से बाहर निकल गए, जबकि दूसरे इससे वंचित रह गए। एक और जिस सुरक्षा उपाय की उम्मीद की जा रही है, वह है प्रमोटरों और उनके सहयोगियों के पास मौजूद शेयरों और अन्य निर्दिष्ट प्रतिभूतियों को फ्रीज करना।
सूत्रों के अनुसार सेबी कुछ चुनिंदा कृषि-जिंसों के डेरिवेटिव अनुबंधों को पहले वित्तीय रूप से निपटाने की इजात दे सकता है और इसके बाद वह विशिष्ट सीमा पूरी करने की शर्त पर अनिवार्य रूप से फिजिकल सेटलमेंट की दिशा में बढ़ सकता है।
शुक्रवार की बोर्ड बैठक में नियामक म्युचुअल फंडों को कैश मैनेजमेंट के लिए इंट्राडे उधारी की सुविधा का इस्तेमाल करने की इजाजत दे सकता है। इससे पेमेंट और प्राप्तियों के निपटान के समय में अंतर की वजह से होने वाली तरलता की कमी को पूरा किया जा सकेगा।