facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

जांच के घेरे में सेबी का शिकायत निवारण तंत्र: स्कोर्स और एमआई पोर्टल की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

Advertisement

बाजार के प्रतिभागियों का आरोप है कि शिकायतों को अक्सर दोनों प्रणालियों के बीच एक से दूसरी जगह भेज दिया जाता है

Last Updated- January 22, 2026 | 9:28 PM IST
SEBI

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के निवेशक शिकायत निवारण प्लेटफार्मों -स्कोर्स और मार्केट इंटेलिजेंस (एमआई) पोर्टल- की कार्यकुशलता जांच के दायरे में आ गई है। बाजार के प्रतिभागियों का आरोप है कि शिकायतों को अक्सर दोनों प्रणालियों के बीच एक से दूसरी जगह भेज दिया जाता है या फिर स्टॉक एक्सचेंज या नियामक पर्याप्त जांच किए बिना ही उन्हें बंद कर देते हैं।

वरुण बेवरिजेज और तंजानिया बॉटलिंग कंपनी एसए (टीबीसी) से जुड़े एक विवाद में प्रतिभूति अपील न्यायाधिकरण (सैट) के समक्ष कार्यवाही के दौरान सेबी की शिकायत निवारण प्रणाली (स्कोर) और एमआई पोर्टल हाल ही में चर्चा का सबब बने।

स्कोर पोर्टल निवेशकों को सूचीबद्ध कंपनियों, सेबी पंजीकृत मध्यस्थों और मार्केट इन्फ्रास्ट्रक्चर इंस्टिट्यूशंस के खिलाफ प्रतिभूति बाजार से संबंधित शिकायतें दर्ज करने की सुविधा देता है। इसके विपरीत, एमआई पोर्टल का मकसद प्रतिभूति कानूनों के कथित उल्लंघनों के संबंध में सेबी को जानकारी देना है।  टीबीसी ने सैट से संपर्क किया, जब पिछले साल सेबी ने स्कोर्स पर दाखिल उसकी शिकायत को खारिज कर दिया था, इसमें वरुण बेवरिजेज से शेयर खरीद समझौता रद्द करने के संबंध में खुलासे की मांग की गई थी।

हालांकि सैट ने सेबी को मामले की दोबारा जांच का निर्देश दिया, लेकिन उसने यह भी कहा कि टीबीसी की शिकायत पर सही परिप्रेक्ष्य में विचार नहीं किया गया था। उसने यह भी कहा कि एमआई पोर्टल पर दाखिल शिकायत का भी यही हाल हुआ।  कानूनी विशेषज्ञों ने कहा कि यह आदेश स्कोर्स और एमआई पोर्टल दोनों की डिजाइन और कामकाज में प्रणालीगत खामियों के साथ-साथ शिकायतों के निपटान में सेबी की विसंगतियों को बताता है।

सैट के समक्ष टीबीसी का प्रतिनिधित्व करने वाले सुप्रीम लॉ पार्टनर्स में मैनेजिंग पार्टनर सुप्रीम वास्कर ने कहा, कई मामलों में, खासतौर पर सूचीबद्ध कंपनियों द्वारा जानकारी छिपाने से जुड़े मामलों में, इस तरह के उल्लंघन निरंतर जारी हैं। समय पर नियामकीय हस्तक्षेप या खुलासे न किए जाने , जिनमें अक्सर देर होती है, से ये मामले निवेशकों, शेयरधारकों और बाजार की अखंडता को प्रतिकूल तरीके से प्रभावित करते रहते हैं। चालू वित्त वर्ष में स्कोर्स पर लगभग 43,000 शिकायतें दाखिल की गई हैं। इनमें से लगभग 37,500 का निपटारा हो चुका है।

सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड बी. श्रवंत शंकर ने कहा, प्रक्रिया संबंधी मामूली चूकों पर अपने आप क्लोजर हो जाना शिकायतकर्ताओं पर एक तरह से दंड है और जवाब न देने वाली इकाइयों को लाभ है। गंभीर आरोपों को अक्सर स्कोर्स और एमआई पोर्टल के बीच इधर-उधर किया जाता है, जिससे कोई जवाबदेही नहीं होती है और निवेशकों के पास समाधान का कोई स्पष्ट तरीका नहीं बचता।

शंकर ने पारदर्शिता संबंधी चिंताओं को भी उठाया और कहा कि शिकायतकर्ता के दृष्टिकोण से पूरे समय के दौरान शिकायत की कोई जांच ही नहीं होती- खासतौर पर तब जब कोई मामला एमआई पोर्टल पर चला जाता है। एमआई पर ट्रैक करने का कोई तंत्र है ही नहीं और शिकायत के निपटारे की कोई समयसीमा भी तय नहीं है। उद्योग से जुड़े लोगों ने कहा कि कंप्यूटर से जनरेटेड क्लोजर के माध्यम से स्कोर्स पर शिकायतों का नियमित निपटान लगातार चुनौती बना हुआ है, इसमें कई आदेशों में तो शिकायत की गुणवत्ता भी नहीं देखी जाती। इस तरह निवेशक सैट से संपर्क करने के लिए मजबूर होते हैं।

एकॉर्ड ज्यूरिस के मैनेजिंग पार्टनर अलय राजवी ने कहा. खुलासे में चूक, इनसाइडर ट्रेडिंग के संकेत या गवर्नेंस संबंधी विफलताओं से जुड़ी शिकायतों को अक्सर संभावित कानूनी कार्रवाई के बजाय निवेशक सेवा मामलों के रूप में देखा जाता है। इससे स्कोर्स पर समय से पहले ही कार्यवाही बंद हो जाती है और निवेशक न्यायाधिकरण या रिट याचिका के माध्यम से कानूनी कार्रवाई के लिए मजबूर हो जाते हैं।

Advertisement
First Published - January 22, 2026 | 9:25 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement