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सेंसेक्स-निफ्टी में लगातार 5वें दिन गिरावट, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वीजा शुल्क से IT सेक्टर में दबाव

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भारतीय शेयर बाजारों में लगातार पांचवें दिन गिरावट दर्ज की गई है और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की बिकवाली तथा अमेरिकी वीजा शुल्क बढ़ोतरी को इसकी प्रमुख वजह माना गया है

Last Updated- September 25, 2025 | 9:22 PM IST
share market
प्रतीकात्मक तस्वीर

भारतीय इक्विटी बेंचमार्क गुरुवार को लगातार पांचवें सत्र में गिरावट के साथ बंद हुए। करीब छह महीने में गिरावट का यह उनका सबसे लंबा सिलसिला है। इसकी वजह विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) की लगातार बिकवाली है जिसने मनोबल को प्रभावित किया है।

सेंसेक्स 556 अंक यानी 0.7 फीसदी की गिरावट के साथ 81,160 पर बंद हुआ। निफ्टी 166 अंक यानी 0.7 फीसदी की नरमी के साथ 24,891 पर रहा। पिछले पांच सत्रों में दोनों सूचकांक क्रमशः 2.2 फीसदी और 2.1 फीसदी नीचे आए हैं। यह 13 मार्च के बाद से सेंसेक्स और 4 मार्च के बाद से निफ्टी में गिरावट का सबसे लंबा सिलसिला है। इस गिरावट से बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार पूंजीकरण 3.2 लाख करोड़ रुपये घटकर 457 लाख करोड़ रुपये रह गया है।

पिछले चार कारोबारी सत्रों में विदेशी फंडों ने घरेलू शेयर बाजारों से करीब 1 अरब डॉलर की निकासी की है। बिकवाली का यह ताज़ा दौर अमेरिका द्वारा नए एच-1बी वीजा आवेदनों पर एकमुश्त भारी शुल्क लगाने के बाद एफपीआई की ओर बिकवाली बढ़ाने के बाद आया है जिससे निवेशक चिंतित हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस महीने नए एच-1बी आवेदनों पर 1,00,000 डॉलर का शुल्क लगाने के वॉशिंगटन के कदम ने धारणा को प्रभावित किया है। पिछले साल स्वीकृत एच-1बी लाभार्थियों में 71 फीसदी भारतीय थे। भारत के आईटी उद्योग का आधे से ज्यादा राजस्व अमेरिका से आता है। इसलिए यह कदम उस क्षेत्र के लिए एक बड़ा झटका है जो पहले से ही सुस्त मांग और डॉलर में एक अंक की राजस्व वृद्धि से जूझ रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि इसका सीधा वित्तीय असर भले ही कम हो, लेकिन यह फैसला गलत समय पर आया है क्योंकि आईटी सेवाओं पर संभावित शुल्कों की आशंका और इसके दूसरे ऑर्डर के असर ने मुनाफावसूली को बढ़ावा दिया है।

मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशियल सर्विसेज के शोध प्रमुख (वेल्थ मैनेजमेंट) सिद्धार्थ खेमका ने कहा, हमें उम्मीद है कि वैश्विक चुनौतियों, व्यापक आर्थिक आंकड़ों के जारी होने और भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता के घटनाक्रमों को देखते हुए निकट भविष्य में बाजार दबाव में रहेंगे। वैश्विक कमोडिटी के दाम, कमजोर होता रुपया और टैरिफ का खतरा वृद्धि को लेकर चिंता बढ़ा रहे हैं।

निवेशक सितंबर तिमाही के नतीजों पर भी नजर रखेंगे ताकि यह अंदाज लगा सकें कि जीएसटी दरों को तर्कसंगत बनाने का असर कॉरपोरेट मुनाफे पर तक पहुंचेगा या नहीं। विश्लेषकों ने कहा कि प्रबंधन की टिप्पणियां मांग के रुझानों और मार्जिन दबावों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करेंगी।

तकनीकी मोर्चे पर निफ्टी प्रमुख समर्थन स्तरों के करीब पहुंच रहा है। एसबीआई सिक्योरिटीज के तकनीकी और डेरिवेटिव अनुसंधान प्रमुख सुदीप शाह ने कहा, 24,770-24,740 के दायरे में 100-दिन का एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (ईएमए) अहम समर्थन स्तर के रूप में कार्य करेगा। 24,740 से नीचे का स्तर गिरावट को 24,600 की ओर ले जा सकता है जबकि प्रतिरोध 20-दिवसीय ईएमए के 25,000-25,040 के करीब है।

गुरुवार को एनएसई मेटल को छोड़कर सभी सेक्टर सूचकांकों में गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी रियल्टी और निफ्टी आईटी में सबसे ज्यादा क्रमशः 1.7 फीसदी और 1.3 फीसदी की गिरावट आई।

बाजार में चढ़ने और गिरने वाले शेयरों का अनुपात कमजोर रहा और 2,709 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई जबकि 1,474 शेयरों में इजाफा हुआ। सेंसेक्स में सबसे ज्यादा गिरावट टीसीएस के शेयरों में हुई जो 2.5 फीसदी लुढ़क गया। उसके बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज का स्थान रहा जो 0.8 फीसदी नीचे आया।

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First Published - September 25, 2025 | 9:22 PM IST

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