अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के युद्ध विराम पर सहमति बनने की खबर का शेयर बाजार ने भी जमकर स्वागत किया और बेंचमार्क सूचकांक ने लंबी छलांग लगाई। कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में भारी गिरावट, भारतीय रिजर्व बैंक की नरम टिप्पणी और ट्रेडरों द्वारा शॉर्ट कवरिंग ने भी इस तेजी में मदद की।
सेंसेक्स 2,946 अंक या 3.95 फीसदी उछल कर 77,563 पर बंद हुआ जो इसमें 1 फरवरी, 2021 के बाद एक दिन की सबसे बड़ी बढ़त है। निफ्टी 874 अंक या 3.8 फीसदी की तेजी के साथ 23,997 पर बंद हुआ। 12 मई, 2025 के बाद निफ्टी की यह सबसे बड़ी उछाल है।
बंबई स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण (एमकैप) 16.2 लाख करोड़ रुपये बढ़कर 445.5 लाख करोड़ रुपये हो गया। पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने से पहले भारतीय बाजार का एमकैप 464 लाख करोड़ रुपये था।
ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने से जुड़ी शर्तों पर सहमति जताने के बाद बाजार में तेजी आई। होर्मुज के रास्ते दुनिया की तेल आपूर्ति के लगभग 20 फीसदी हिस्से की आवाजाही होती है। होर्मुज पर ईरान की नाकेबंदी ने तेल बाजार को हिलाकर रख दिया था और दुनिया भर में ऊर्जा संकट की आशंका पैदा कर दी थी।
युद्ध विराम की घोषणा के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमतें 15 फीसदी से ज्यादा फिसलकर करीब 90 डॉलर प्रति बैरल पर आ गईं। हालांकि कीमतें अभी भी संघर्ष से पहले के स्तर (लगभग 73 डॉलर प्रति बैरल) से काफी ऊपर बनी हुई हैं। हालांकि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने 2,812 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की। पर घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 4,168 करोड़ रुपये की शुद्ध लिवाली की जिससे बाजार को बल मिला।
पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद से विदेशी निवेशकों ने हर सत्र में औसतन 7,000 करोड़ रुपये के शेयरों की बिकवाली की जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने इस दौरान प्रति सत्र औसतन 7,500 करोड़ रुपये की लिवाली की।
बाजार में उठापटक मापने वाला सूचकांक इंडिया वीआईएक्स 20 फीसदी घटकर 19.7 पर आ गया। निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप में 4-4 फीसदी से ज्यादा की तेजी आई। सभी क्षेत्रीय सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए और वाहन एवं रियल्टी क्षेत्र के सूचकांक में सबसे अधिक 6-6 फीसदी से ज्यादा की तेजी आई।
बाजार में यह तेजी संघर्ष शुरू होने के बाद से 8 फीसदी की भारी गिरावट के बाद आई है। युद्ध विराम की घोषणा के बावजूद तनाव अभी भी बना हुआ है। संयुक्त अरब अमीरात ने कहा कि उसने मिसाइल के खतरे को रोका और कुवैत ने ईरान की तरफ से जोरदार हमलों की जानकारी दी।
विश्लेषकों ने कहा कि बाजार में तेजी का बना रहना ऊर्जा बाजार और आपूर्ति श्रृंखला में होने वाले बदलाव पर निर्भर करेगा।
फ्रैंकलिन टेंपलटन इंस्टीट्यूट के स्टीफन डोवर ने कहा, ‘अगर तेल की कीमतें घटती हैं और माल की आवाजाही सामान्य होती है तो बाजार मुद्रास्फीतिजनित मंदी के जोखिमों को कम करना शुरू कर सकता है।’ हालांकि उन्होंने आगाह किया कि खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा बुनियादी ढांचों को हुए नुकसान से आपूर्ति की पूरी तरह से बहाली में देर हो सकती है।
बाजार के जानकारों ने आगाह किया है कि उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के प्रबंध निदेशक और सीईओ धीरज रेली ने कहा, ‘यह उतार-चढ़ाव कुछ और समय तक जारी रहेगा। तेल की बढ़ी हुई कीमतों का असर पहले से ही महंगाई, ब्याज दर और कंपनियों की कमाई पर पड़ रहा है। वित्त वर्ष 2027 के लिए कंपनियों की कमाई में बढ़ोतरी का अनुमान 14 -15 फीसदी से घटकर 10-12 फीसदी रह सकता है। अगर इस वित्त वर्ष में तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी रहती हैं तो वृद्धि घटकर एक अंक में रह सकती है।’
बंबई स्टॉक एक्सचेंज पर 3,832 शेयर लाभ में और 575 नुकसान में बंद हुए। सेंसेक्स में तीन को छोड़कर सभी शेयर लाभ में रहे।