भारत में शेयर पुनर्खरीद की वापसी हो रही है। इस महीने कुछ कंपनियों ने अपने शेयर पुन: खरीदने की योजनाओं का ऐलान किया है। जानकारों का कहना है कि यह रुझान टैक्स नियमों में हाल में हुए बदलाव और शेयर कीमतों में गिरावट के बाद कंपनियों की मुनाफा बांटने की रणनीतियों में बदलाव का संकेत है।
विप्रो, अरविंदो फार्मा और सायंट उन आधा दर्जन कंपनियों में शामिल हैं, जिन्होंने इस महीने अब तक शेयर पुनर्खरीद कार्यक्रमों का प्रस्ताव किया है। ये प्रस्ताव खासतौर पर ऐसे समय में आए हैं जब कंपनियां अपना अंतिम लाभांश देती हैं।
बायबैक पेशकश में यह तेजी वित्त अधिनियम, 2026 में कराधान नियमों में हुए बदलावों के बाद आई है। यह अधिनियम 1 अप्रैल से लागू हुआ है। नए नियमों के तहत शेयरधारकों को होने वाले मुनाफे पर पूंजीगत लाभ कर देना होगा। यह नियम पहले के ‘डीम्ड डिविडेंड’ की जगह आया है जिसके कारण पुनर्खरीद यानी बायबैक का आकर्षण काफी कम हो गया था।
प्राइस वाटरहाउस ऐंड कंपनी एलएलपी में पार्टनर हितेश साहनी ने कहा, ‘बायबैक घोषणाओं में हालिया तेजी की मुख्य वजह टैक्स में किया गया बदलाव है। पूंजीगत लाभ कर व्यवस्था की वापसी से बायबैक गैर-प्रवर्तक शेयरधारकों के लिए टैक्स के लिहाज से काफी फायदेमंद हो गए हैं, जिस से कंपनियां ऐसी पेशकशों पर दोबारा विचार कर रही हैं।’
पिछले दो साल में बायबैक गतिविधियां धीमी रही थीं। प्राइम डेटाबेस के अनुसार वित्त वर्ष 2026 में 16 कंपनियों ने 19,500 करोड़ रुपये के शेयर पुन: खरीदे। वित्त वर्ष 2025 में इसका कुल आंकड़ा 8,034 करोड़ रहा, जो वित्त वर्ष 2024 के 50,750 करोड़ रुपये से काफी कम था, जब कर व्यवस्था ज्यादा अनुकूल थी।
हाल के वर्षों में बायबैक पर टैक्स लगाने के नियमों में तीन बड़े बदलाव आए हैं। सितंबर 2024 तक कंपनियां बायबैक डिस्ट्रिब्यूशन टैक्स देती थीं, जबकि शेयरधारकों को इससे छूट मिली हुई थी। अक्टूबर 2024 में यह स्थिति बदल गई, क्योंकि तब बायबैक से मिली रकम पर शेयरधारकों के हाथों में लाभांश की तरह स्लैब दर के हिसाब से टैक्स लगाया जाने लगा, जिससे कुछ निवेशकों के लिए कर की प्रभावी दरें 40 प्रतिशत से भी ऊपर पहुंच गईं और बायबैक गतिविधियों में कमी आई।
बाजार के हालात भी इस तेजी में मददगार हो सकते हैं। साल की शुरुआत से अब तक निफ्टी 50 में लगभग 8 प्रतिशत की गिरावट आई है, जबकि आईटी सूचकांक लगभग 23 प्रतिशत लुढ़का है। ऐसे में, जिन कंपनियों के पास काफी नकदी है, उनके लिए बायबैक आकर्षक विकल्प बन गया है। टैक्स में फायदे के अलावा बायबैक का इस्तेमाल एक ऐसे संकेत के तौर पर भी किया जा सकता है जहां कंपनियां मानती हैं कि उनके शेयर की असल कीमत कम है।
सिरिल अमरचंद मंगलदास में पार्टनर आदित्य प्रसाद ने कहा, ‘शेयरधारकों को लाभान्वित करने के एक तरीके के तौर पर बायबैक का चलन जारी रहने की संभावना है, खासकर उन बाजारों में जहां उतार-चढ़ाव ज्यादा हो और कंपनियां प्रति शेयर कमाई और पूंजी पर प्रतिफल जैसे पैमानों को बेहतर बनाना चाहती हों।’
एकॉर्ड ज्यूरिस में मैनेजिंग पार्टनर अलय राजवी ने कहा, ‘कंपनियां नकदी जमा रखने के बजाय शेयर पुनर्खरीद को प्राथमिकता देती हैं, जिससे प्रति शेयर आय बढ़ती है। हाल की घोषणाएं मुख्य कारोबार की मजबूती में भरोसा दिखाती हैं और बाजारों को यह संकेत देने का एक तरीका है कि शेयर सस्ते हैं। बायबैक असल में विदेशी निवेशकों के बाहर जाने और वैश्विक घटनाओं से होने वाली बाजार की अस्थिरता का भी जवाब होता है।’