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स्मॉलकैप और मिडकैप पर और दबाव संभव, बाजार ‘कंसंट्रेशन साइकल’ के बीच में

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अब हम एक कंसंट्रेशन साइकल में हैं जो आमतौर पर लगभग 36 महीनों तक चलता है। मेरा मानना है कि हम इस अवधि के लगभग आधे रास्ते में हैं

Last Updated- February 09, 2026 | 9:56 PM IST
Nitin Bhasin

ऐ​म्बिट कैपिटल में इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के प्रमुख नितिन भसीन का कहना है कि बाजार अपने ‘कंसंट्रेशन साइकल’ के आधे रास्ते में है। इसका मतलब है कि लंबे समय तक सीमित उतार-चढ़ाव रहेगा, जिसमें मिडकैप और स्मॉलकैप काफी कमजोर दिखेंगे। मुंबई में समी मोडक को दिए इंटरव्यू में भसीन ने कहा कि लार्जकैप की तुलना में मिड और स्मॉलकैप के मूल्यांकन अभी भी महंगे हैं और उन्हें एक उचित स्तर पर आने की जरूरत है। बातचीत के मुख्य अंश:

जब ज्यादातर उभरते बाजार (ईएम) बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं तो भारतीय बाजार में कमजोरी क्यों है?

भारत के बाहर बैठे निवेशकों के पास आज ज्यादा विकल्प हैं। पहले, जब दूसरे उभरते बाजार संघर्ष कर रहे थे, तो भारत सबसे अच्छा परफॉर्मर था। लेकिन अब चक्र बदल गया है क्योंकि पिछले एक साल में कमाई में बदलाव के मामले में भारत ईएम देशों में सबसे खराब प्रदर्शन कर रहा है। वै​श्विक निवेशक दूसरे ईएम देशों में निवेश कर रहे हैं, जिससे भारत का मूल्यांकन ऐतिहासिक औसत से नीचे जा रहा है, खासकर निर्माण और कमोडिटी से जुड़े सेक्टरों में।

दुनिया भर में सुर​क्षित परिसंप​त्ति वर्ग और कमोडिटीज बेहतर प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं?

डॉलर पर घटती निर्भरता, एआई-आधारित परिसंप​त्ति-केंद्रित निवेश और देशों में विनिर्माण से विश्व में ठोस परिसंपत्तियों का चक्र चल रहा है। पहले, चीन अकेला खरीदार था। अब, कई देश फैक्ट्रियां, रक्षा क्षमताएं और इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन बना रहे हैं। इससे मोलभाव की क्षमता कमोडिटी उत्पादकों के पास चली जाती है। यही कारण है कि धातु, ऊर्जा, रक्षा और विनिर्माण क्षेत्रों के निर्यातक यूरोप, जापान, कोरिया
और ताइवान में विश्व स्तर पर बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।

क्या आप अपने स्ट्रक्चरल मार्केट साइकल फ्रेमवर्क को समझा सकते हैं? आज हम उस चक्र में कहां हैं?

हमने कंसंट्रेशन-फ्रेग्मेंटेशन फ्रेमवर्क का उपयोग करके भारत के 22 वर्षों के बाजार इतिहास का विश्लेषण किया है। हमने शीर्ष 500 शेयरों के स्क्वैर्ड फ्री-फ्लोट बाजार पूंजीकरण का उपयोग करके एक इंडेक्स बनाया, जो हरफिंडल-हिर्शमैन इंडेक्स के समान है। भारत में, आमतौर पर बुल मार्केट से फ्रेग्मेंटेशन होता है। अमेरिका में, बुल मार्केट से कंसंट्रेशन होता है क्योंकि वै​श्विक आय मुट्ठी भर मेगा-कैप कंपनियों को मिलती है। सितंबर 2024 में, हमने लिखा था कि भारत ने 30-36 महीने के बढ़ते कंसंट्रेशन साइकल में प्रवेश किया है। फ्रेग्मेंटेशन फेज सितंबर 2024 के आसपास खत्म हो गया।

अब हम एक कंसंट्रेशन साइकल में हैं जो आमतौर पर लगभग 36 महीनों तक चलता है। मेरा मानना है कि हम इस अवधि के लगभग आधे रास्ते में हैं। इसका मतलब है एक लंबी अव​धि में सीमित उतार-चढ़ाव रहेगा, जिसमें लार्जकैप अपेक्षाकृत स्थिर रहते हैं, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप काफी कमजोर प्रदर्शन करते हैं।

क्या इसका मतलब है कि स्मॉल- ऐंड मिडकैप में दबाव अभी खत्म नहीं हुआ है?

हां। ऐतिहासिक रूप से इन कंसंट्रेशन फेज में मिडकैप और स्मॉलकैप में गिरावट आती है, कीमत और मूल्यांकन दोनों में। पिछली बार की गिरावट में आय वृद्धि का सामान्य होना और मल्टीपल डी-रेटिंग दोनों ही कारण थे। मिड औऱ स्मॉल कैप ने मौजूदा हालात में कुछ नरमी देखी है। लेकिन यह नरमी कम है।

आय की उम्मीदें भी बार-बार कम की गई हैं। आप अर्निंग साइकल को कैसे देखते हैं?

विश्लेषक आमतौर पर वर्ष की शुरुआत आशावादी आय अनुमानों (18-20 प्रतिशत वृद्धि) के साथ करते हैं और 9-10 प्रतिशत के करीब रहते हैं। पिछले तीन वर्षों में आय अनुमान काफी हद तक पूरे हुए, जिससे कुछ हद तक आशावाद की झूठी धारणा पैदा हुई। अब हम फिर से आंकड़ों में कटौती कर रहे हैं। वित्त वर्ष 2026 के लिए पिछले चार वर्षों में नौ महीने की आय में सबसे ज्यादा कटौती हुई है। समस्या सिर्फ धीमी वृद्धि ही नहीं है, बल्कि वृद्धि की गुणवत्ता को लेकर भी है।

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First Published - February 9, 2026 | 9:51 PM IST

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