सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) शेयरों में भारी बिकवाली और होर्मुज स्ट्रेट में सुगम आवाजाही को लेकर अनिश्चितता के मद्देनजर कच्चे तेल के दाम ऊंचे बने रहने से शेयर बाजार में आज तेज गिरावट देखने को मिली। बेंचमार्क सेंसेक्स 1,000 अंक या 1.3 फीसदी टूटकर 76,664 पर बंद हुआ। निफ्टी 275 अंक या 1.14 फीसदी की गिरावट के साथ 23,898 पर बंद हुआ। बीते दो हफ्तों तक बढ़त में बंद होने के बाद इस हफ्ते सेंसेक्स में 2.3 फीसदी और निफ्टी में 1.9 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। बंबई स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण 5 लाख करोड़ रुपये घटकर 461.5 लाख करोड़ रुपये रहा।
निफ्टी आईटी सूचकांक में 5.3 फीसदी की गिरावट आई जो 12 फरवरी के बाद से इसकी एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट है। इस हफ्ते आईटी सूचकांक 10.3 फीसदी नुकसान में रहा जो मार्च 2020 के बाद से इसकी सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट और एक दशक में दूसरा सबसे खराब साप्ताहिक प्रदर्शन है।
आईटी शेयरों में गिरावट इन्फोसिस और एचसीएल टेक द्वारा आय वृद्धि के नरम अनुमान के बाद आई। इस हफ्ते सूचीबद्ध आईटी कंपनियों का बाजार पूंजीकरण 2.5 लाख करोड़ रुपये कम हो गया।
पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई। अमेरिका-इजरायल के ईरान के साथ चल रहे टकराव में नरमी के कोई खास संकेत नहीं दिखे। इस हफ्ते ईरान की सेना द्वारा एक मालवाहक जहाज पर धावा बोलने का फुटेज जारी किया गया जबकि अमेरिका ने अपनी नौ सैनिक घेराबंदी जारी रखी। अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने नौ सेना को होर्मुज स्ट्रेट में बारूदी सुरंगें बिछाने वाले जहाजों के खिलाफ कार्रवाई करने का भी आदेश दिया है।
हालांकि ईरान ने पहले संकेत दिया था कि वह वाणिज्यिक यातयात के लिए हाेर्मुज को फिर से खोल देगा लेकिन अमेरिका द्वारा अपनी नाकाबंदी में ढील न दिए जाने के बाद उसने अपना रुख बदल लिया। होर्मुज से दुनिया की तेल आपूर्ति का लगभग 20 फीसदी हिस्से की आवाजाही होती और यह क्षेत्र तेल व्यापार का एक प्रमुख वैश्विक केंद्र है। ऐसे में इस क्षेत्र में तनाव बाजार की चिंता का मुख्य सबब बना हुआ है।
ब्रेंट क्रूड कारोबार के दौरान बढ़कर 101 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था मगर बाद में थोड़ा नरम होकर 98.1 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। इस हफ्ते ब्रेंट क्रूड के दाम करीब 10 फीसदी बढ़े हैं। तेल की ऊंची कीमतें भारत के लिए नुकसानदायक हैं क्योंकि भारत ईंधन आयात पर बहुत ज्यादा निर्भर है और महंगे तेल से अर्थव्यवस्था की वृद्धि तथा कंपनियों की कमाई पर बुरा असर पड़ता है।
इन जोखिमों को देखते हुए एचएसबीसी और जेपी मॉर्गन जैसी ब्रोकरेज फर्मों ने भारतीय शेयरों पर अपने परिदृश्य को घटा दिया है। एचएसबीसी ने एक नोट में कहा, ‘भारत की आयातित ऊर्जा पर निर्भरता और महंगाई तथा घरेलू मांग पर इसके संभावित असर को देखते हुए हम कमाई में हो रही मौजूदा सुधार के ठहरने को लेकर चिंतित हैं। वर्तमान वृहद आर्थिक माहौल में भारत उत्तर-पूर्वी एशियाई देशों की तुलना में कम आकर्षक लग रहा है।’
बीएसई में 1,241 शेयर लाभ में और करीब 3,000 गिरावट में रहे। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने 8,828 करोड़ रुपये के शेयर बेचे और घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 4,701 करोड़ रुपये की लिवाली की। इन्फोसिस में सबसे ज्यादा 7.1 फीसदी की गिरावट आई।
एमके ग्लोबल में शोध प्रमुख शेषाद्रि सेन ने कहा, ‘अप्रैल के निचले स्तर से निफ्टी में 11 फीसदी की तेजी के बाद हम सतर्क हो गए हैं। पश्चिम एशिया में टकराव बना हुआ है और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव डाल रही हैं।