Stock Market Outlook: भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक 2 अप्रैल को उतार-चढ़ाव भरे कारोबार में मामूली बढ़त के साथ बंद हुए। हालांकि, बाजार की शुरुआत बड़ी गिरावट के साथ हुई। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की समझौता न होने पर ईरान के बिजली ढांचे पर हमले की धमकी से चिंताएं फिर बढ़ गई। इससे कच्चे तेल की कीमत 106 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई और एशियाई बाजारों में कमजोरी देखने को मिली। लेकिन सेशन के दौरान माहौल सुधरा और निफ्टी ने दिन के निचले स्तर से 500 से अधिक अंकों की रिकवरी करते हुए सेशन को बढ़त में बंद किया।
तीस शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 185.23 अंक यानी 0.25 प्रतिशत बढ़कर 73,319.55 पर बंद हुआ। जबकि निफ्टी 33.70 अंक यानी 0.15 प्रतिशत की बढ़त के साथ 22,713.10 पर बंद हुआ। ब्रोडर मार्केट कमजोर रहे। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 0.3 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स 0.4 प्रतिशत गिर गया।
वहीं, ईरान युद्ध के जल्द खत्म होने की धूमिल होती उम्मीदों ने भारतीय शेयर बाजार में गिरावट के सिलसिले को साप्ताहिक आधार पर लगातार छठे हफ़्ते तक जारी रखा। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच छुट्टियों के कारण छोटे रहे सप्ताह में निफ्टी 50 और सेंसेक्स साप्ताहिक आधार पर क्रमशः 0.5 प्रतिशत और 0.4 प्रतिशत गिर गए। ट्रंप के ईरान पर और आक्रामक हमलों की चेतावनी देने के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर 109 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। इसका बाजार की चाल पर सबसे ज्यादा नेगेटिव असर पड़ा।
इस सप्ताह 16 में से 12 प्रमुख सेक्टरों में गिरावट दर्ज की गई। स्मॉलकैप इंडेक्स 0.2 प्रतिशत बढ़ा, जबकि मिडकैप सूचकांक 0.8 प्रतिशत फिसल गया।बैंकिंग शेयर 1.4 प्रतिशत गिर गए और लगातार छठे सप्ताह नुकसान में रहे, जो अक्टूबर 2023 के बाद सबसे लंबी गिरावट है। इसकी वजह विदेशी मुद्रा सट्टेबाजी पर संभावित नियंत्रण से ट्रेडिंग घाटे की आशंका रही।
फार्मा शेयर 3.4 प्रतिशत गिर गए, .एक रिपोर्ट में कहा गया कि ट्रंप प्रशासन उन दवा कंपनियों पर शुल्क लगा सकता है जिन्होंने अमेरिका में कीमतें कम करने पर सहमति नहीं दी है। वहीं भारत इलेक्ट्रॉनिक्स के शेयर 4.2 प्रतिशत चढ़े और इसके चलते रक्षा क्षेत्र के शेयर 2.4 प्रतिशत तक मजबूत हुए। यह तेजी भारत द्वारा 25 अरब डॉलर के सैन्य खरीद प्रस्तावों को मंजूरी मिलने के बाद आई।
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अगले सप्ताह भी भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है। निवेशकों का रुख पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से जुड़े घटनाक्रमों पर निर्भर रहेगा। मोतीलाल ओसवाल के अनुसार, अमेरिका जहां ईरान के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर संभावित कार्रवाई को लेकर अपनी रणनीति का आकलन कर रहा है, वहीं राष्ट्रपति ट्रंप के हालिया बयान अधिक आक्रामक रुख का संकेत देते हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि बातचीत विफल होने पर सैन्य कार्रवाई हो सकती है। हालांकि कूटनीतिक समाधान की गुंजाइश भी बरकरार रखी है।
ब्रोकरेज ने कहा कि चौथी तिमाही के नतीजों का सीजन शुरू होने से बाजार में उतार-चढ़ाव और बढ़ सकता है। मार्च तिमाही पर मुद्रा के कमजोर होने, कच्चे तेल से जुड़ी ऊंची लागत और वैश्विक मांग में असमानता का असर पड़ा है। इसके कारण अलग-अलग सेक्टरों का प्रदर्शन अलग-अलग रह सकता है और शेयरों में चुनिंदा उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) 9 अप्रैल को अपने नतीजे घोषित करेगी, जो आईटी सेक्टर और पूरे नतीजा सीजन की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।
बजाज ब्रोकिंग के अनुसार, निफ्टी ने गैप डाउन ओपनिंग के बाद एक काउंटरअटैक बुलिश कैंडल बनाई। यह मजबूत रिकवरी का संकेत देती है। इंडेक्स ने ओवरसोल्ड स्तर से खरीदारी का सपोर्ट लेते हुए दिन के निचले स्तर से 500 से ज्यादा अंकों की वापसी की और 22,700 के ऊपर बंद हुआ। निकट अवधि में भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, जो सेंटीमेंट पर दबाव बनाए हुए हैं।
ब्रोकरेज ने कहा कि हालिया तेज गिरावट के बाद निफ्टी शॉर्ट-टर्म चार्ट पर ओवरसोल्ड जोन में पहुंच गया है। इसलिए रिकवरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। अगर इंडेक्स पिछले हफ्ते के उच्च स्तर 22,941 के ऊपर जाता है, तो 23,450 तक तेजी की संभावना बन सकती है। वहीं अगर यह स्तर पार नहीं कर पाता, तो इंडेक्स 22,200 से 22,900 के दायरे में कंसोलिडेशन कर सकता है। हालांकि, मौजूदा गिरावट के ट्रेंड में ठहराव के लिए जरूरी है कि इंडेक्स डेली चार्ट पर लगातार ऊंचे स्तर (higher highs) और ऊंचे निचले स्तर (higher lows) बनाना शुरू करे और 23,465 के ऊपर बंद हो।
शॉर्ट टर्म के लिए प्रमुख सपोर्ट 22,100 से 21,800 के दायरे में है, जो पिछले दो साल के निचले स्तरों को जोड़ने वाली ट्रेंडलाइन और 200 सप्ताह के ईएमए के आसपास स्थित है।