Stock Market: भारतीय शेयर बाजारों ने मार्च की तेज गिरावट के बाद अप्रैल में कुछ हद तक रिकवरी दिखाई। हालांकि, गुरुवार की गिरावट ने यह संकेत दिया कि बाजार अब भी कमजोर स्थिति में हैं। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और रुपये में कमजोरी ने निवेशकों की धारणा पर दबाव डाला।
नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के निफ्टी 50 (Nifty-50) में गुरुवार को 0.74 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 23,997.55 पर बंद हुआ। जबकि बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) 0.75 प्रतिशत गिरकर 76,913.50 पर आ गया। इसी दौरान कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख के कारण रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। भारतीय बाजार शुक्रवार को छुट्टी के कारण बंद रहेंगे और सोमवा को खुलेंगे।
सेशन के दौरान ब्रेंट क्रूड करीब 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। यह इसके पिछले चार साल का उच्च स्तर है। यह बढ़त उस खबर के बाद आई जिसमें बताया गया कि अमेरिकी सेना ईरान के खिलाफ नए विकल्पों पर राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप को जानकारी देने वाली है। इससे आयातित महंगाई और भारत के बाहरी संतुलन पर दबाव की चिंताएं फिर से बढ़ गईं, जिसका असर शेयर बाजार और रुपये दोनों पर पड़ा।
इसके बावजूद, अप्रैल में निफ्टी और सेंसेक्स क्रमशः 7.5 प्रतिशत और 6.9 प्रतिशत चढ़े। यह दिसंबर 2023 के बाद बेंचमार्क इंडेक्स सबसे अच्छा मासिक प्रदर्शन रहा। यह मार्च में आई 11 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट के बाद आंशिक सुधार है।
महीने के दौरान ईरान में संघर्ष विराम, आकर्षक वैल्यूएशन और बेहतर तिमाही नतीजों ने विदेशी निवेशकों की रिकॉर्ड बिकवाली के असर को कम किया। सभी 16 प्रमुख सेक्टरों में अप्रैल के दौरान बढ़त दर्ज की गई। मेटल इंडेक्स 15.2 प्रतिशत उछला। इसे वैश्विक कीमतों में मजबूती और सप्लाई को लेकर चिंताओं का समर्थन मिला।
एफएमसीजी सेक्टर 12.2 प्रतिशत बढ़ा। इसमें नेस्ले इंडिया का शेयर 24.2 प्रतिशत चढ़ा और यह उसका अब तक का सबसे अच्छा मासिक प्रदर्शन रहा। अदाणी एंटरप्राइजेज 36.9 प्रतिशत और अदाणी पोर्ट्स 26.3 प्रतिशत चढ़े। समूह ने अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन के सिविल फ्रॉड केस को खारिज किया है।
एनर्जी इंडेक्स 17 प्रतिशत बढ़ा। बिजली की मांग बढ़ने और कोयले की उपलब्धता स्थिर रहने से पावर कंपनियों के लिए माहौल बेहतर हुआ। फाइनेंशियल शेयरों में 9.1 प्रतिशत की बढ़त रही। इसमें एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और बजाज फाइनेंस ने अहम भूमिका निभाई।
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हालांकि, ब्रोकरेज फर्म्स जैसे एचएसबीसी और जेपी मॉर्गन ने चेतावनी दी है कि अगर तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और कंपनियों की कमाई में सुधार नहीं होता, तो बाजार फिर से कमजोर ग्रोथ और ऊंचे वैल्यूएशन की चिंताओं में घिर सकता है। अप्रैल में व्यापक बाजारों ने बेंचमार्क इंडेक्स से बेहतर प्रदर्शन किया। स्मॉलकैप और मिडकैप इंडेक्स क्रमशः 18.4 प्रतिशत और 13.6 प्रतिशत चढ़े।
अप्रैल में शेयर बाजार में बड़ी तेजी देखने को मिली। इससे बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब 51 लाख करोड़ रुपये बढ़ गया। इसके बाद कुल मार्केट कैप बढ़कर 463.3 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। यह अब तक की सबसे बड़ी मासिक बढ़ोतरी है। इससे पहले मार्च 2025 में 28.9 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई थी। अप्रैल की तेजी ने उस रिकॉर्ड को भी पार कर दिया।
दरअसल, मार्च में बाजार में बड़ी गिरावट आई थी। उस समय मार्केट कैप 51.1 लाख करोड़ रुपये घट गया था। यह गिरावट पश्चिम एशिया संकट की वजह से हुई थी। तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गई थीं। इससे निवेशकों का भरोसा कमजोर हो गया था।