facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

अमेरिकी टैरिफ की आशंका से शेयर बाजार धड़ाम, अगस्त के बाद सेंसेक्स-निफ्टी में एक दिन में सबसे बड़ी गिरावट

Advertisement

गुरुवार को सेंसेक्स 84,181 पर बंद हुआ जो पिछले सत्र के मुकाबले 780 अंक यानी 0.9 फीसदी की गिरावट है। निफ्टी 25,877 पर बंद हुआ और इसमें 264 अंक यानी 1.01 फीसदी की गिरावट आई

Last Updated- January 08, 2026 | 10:17 PM IST
Stock market today

अमेरिकी व्यापार शुल्क को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के बीच शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। बेंचमार्क सूचकांकों में चार महीने से अधिक समय की सबसे बड़ी एकदिवसीय गिरावट आई। गुरुवार को सेंसेक्स 84,181 पर बंद हुआ जो पिछले सत्र के मुकाबले 780 अंक यानी 0.9 फीसदी की गिरावट है। निफ्टी 25,877 पर बंद हुआ और इसमें 264 अंक यानी 1.01 फीसदी की गिरावट आई। दोनों सूचकांकों में 26 अगस्त, 2025 के बाद एक दिन में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।

बीएसई में सूचीबद्ध सभी कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण 7.7 लाख करोड़ रुपये घटकर 472.3 लाख करोड़ रुपये रह गया। बिकवाली चौतरफा थी। बीएसई में सूचीबद्ध शेयरों में से 3,225 शेयरों में गिरावट आई जबकि 992 में बढ़त दर्ज की गई। चढ़ने-गिरने वाले शेयरों का अनुपात 0.41 रहा जो 8 दिसंबर 2025 के बाद का सबसे कमजोर आंकड़ा है।

बुधवार को अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम के इस बयान से निवेशक घबरा गए कि अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने रूस के साथ व्यापार करने वाले देशों पर प्रतिबंध लगाने वाले विधेयक को मंजूरी दे दी है और इस पर अगले सप्ताह मतदान हो सकता है। यह विधेयक अमेरिका को भारत सहित उन देशों पर कड़े प्रतिबंध लगाने में सक्षम बनाता है जो रूसी तेल खरीदते हैं। अमेरिका ने इससे पहले भारत पर आरोप लगाया था कि वह तेल खरीद के जरिए जंग में रूस की मदद कर रहा है। उसने पिछले साल भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाया था। खबरों के अनुसार यह विधेयक ट्रंप को रूस के ऊर्जा क्षेत्र के साथ व्यापार करने वाले देशों से आयात पर 500 फीसदी तक टैरिफ लगाने का अधिकार देगा।

इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा लगाए गए व्यापक शुल्कों की वैधता पर अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय का फैसला इस सप्ताह आने की उम्मीद है। अल्फानीति फिनटेक के सह-संस्थापक यू आर भट्ट ने कहा, निवेशक अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय के फैसले पर पैनी नजर रखेंगे। अगर अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय इन शुल्कों को रद्द कर देता है तो ट्रंप का चुपचाप स्वीकार कर लेना उनके स्वभाव के विपरीत होगा। अनिश्चितता का स्तर नाटकीय रूप से बढ़ गया है।

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने 3,367 करोड़ रुपये के शेयर बेचे और वे इस सत्र में शुद्ध बिकवाल रहे। इसके विपरीत, घरेलू संस्थागत निवेशक शुद्ध खरीदार रहे, जिन्होंने कुल 3,701 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, अमेरिकी टैरिफ की नई चिंताओं और विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी के कारण घरेलू बाजारों में गिरावट जारी रही। बाजार का रुख सतर्क हो गया है। इससे आय वृद्धि को लेकर बनी उम्मीदें धूमिल हो गईं। धातु, तेल और गैस तथा आईटी शेयरों में व्यापक बिकवाली देखने को मिली। वैश्विक कीमतों में गिरावट के बाद मुनाफावसूली के कारण धातु शेयरों में भी गिरावट आई। निकट भविष्य में बाजारों के सतर्क रहने और सीमित दायरे में कारोबार करने की उम्मीद है। तीसरी तिमाही के नतीजे और अमेरिकी टैरिफ से जुड़े घटनाक्रम इन कारकों को प्रभावित करेंगे।

सेंसेक्स के चार शेयरों को छोड़कर बाकी सभी शेयरों में गिरावट देखी गई। गुरुवार को रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में 2.25 फीसदी की गिरावट आई। सेंसेक्स की गिरावट में इसका योगदान सबसे ज्यादा रहा। लार्सन ऐंड टुब्रो के शेयरों में 3.4 फीसदी की गिरावट आई। सरकारी परियोजनाओं से काफी राजस्व प्राप्त करने वाली इस कंपनी के शेयरों में गिरावट आई है और खबरें हैं कि केंद्र सरकार सरकारी ठेकों के लिए बोली लगाने वाली चीनी कंपनियों पर लगे प्रतिबंध हटा सकती है।

Advertisement
First Published - January 8, 2026 | 10:12 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement