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Waaree Energies: नतीजों के बाद शेयर में क्यों आई 11% की तगड़ी गिरावट? Q4 में मुनाफा 75% बढ़ा, रेवेन्यू हुआ डबल

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Waaree Energies बोर्ड ने शेयरधारकों को प्रति शेयर 20 फीसदी ​फाइनल डिविडेंड का भी ऐलान किया है।

Last Updated- April 30, 2026 | 3:37 PM IST
Waaree Energies
Representational Image

Waaree Energies Share Price: देश की बड़ी सोलर PV मॉड्यूल बनाने वाली कंपनी वारी एनर्जीज (Waaree Energies) ने गुरुवार को जनवरी-मार्च 2026 तिमाही के नतीजे जारी किये। तिमाही के दौरान कंपनी का कंसॉलिडेट नेट प्रॉफिट करीब 75 प्रतिशत बढ़ गया जबकि आमदनी सालाना आधार पर दोगुनी हो गई। वहीं, कंपनी बोर्ड ने शेयरधारकों को प्रति शेयर 20 फीसदी ​फाइनल डिविडेंड देने का भी ऐलान किया है। दूसरी ओर, मुनाफे में तगड़ा उछाल और रेवेन्यू डबल होने के बावजूद बाजार का रिएक्शन स्टॉक पर नकारात्मक दिखाई दिया। कारोबारी सेशन में शेयर 11 फीसदी से ज्यादा टूट गया।

वारी एनर्जीज ने स्टॉक एक्सचेंज को दी जानकारी में बताया कि 31 मार्च को समाप्त तिमाही के दौरान कंपनी का कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट 75 प्रतिशत बढ़कर 1,126 करोड़ रुपये हो गया। पिछले वर्ष की समान अवधि में 644.47 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया था।

जनवरी-मार्च तिमाही के दौरान कंपनी की कुल आय दोगुने से अधिक बढ़कर 8,659.98 करोड़ रुपये हो गई, जो वित्त वर्ष 2024-25 की समान तिमाही में 4,140.92 करोड़ रुपये थी। पूरे वित्त वर्ष 2026 में कंपनी का शुद्ध लाभ बढ़कर 3,884.15 करोड़ रुपये हो गया, जबकि वित्त वर्ष 2025 में यह 1,928.13 करोड़ रुपये था।

हालांकि, कंपनी के नतीजे कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज (KIE) के एनालिस्ट द्वारा लगाए गए अनुमानों से कम रहे। KIE उम्मीद थी कि वारी एनर्जीज ₹8,999.2 करोड़ का रेवेन्यू और ₹1,310.3 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज करेगी।

Waaree Energies: स्टॉक ने क्यों लगाया गोता?

चौथी तिमाही (Q4FY26) नतीजों के बाद वारी एनर्जीज के शेयर में जबरदस्त गिरावट देखने को मिली। BSE पर शेयर इंट्राडे में ₹3,097.90 तक फिसल गया. इससे पहले बुधवार को शेयर 3,501.95 रुपये पर बंद हुआ था। यानी बीते सेशन के मुकाबले गुरुवार (30 अप्रैल) को शेयर 11.5 फीसदी टूट गया। ऐसे में यह सवाल कि मुनाफा और रेवेन्यू दमदार रहने के बावजूद शेयर में निगेटिव रिस्पांस क्यों देखने को मिला।

दरअसल, चौथी तिमाही के नतीजों में कंपनी पर मार्जिन प्रेशर साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। यह बाजार के लिए एक बड़ी चिंता बनकर उभरा, जिसका असर स्टॉक प्राइस पर देखने को मिला। चौथी​ तिमाही के दौरान कंपनी के EBITDA मार्जिन में तेज गिरावट देखने को मिली। कंपनी का ऑपरेटिंग EBITDA ₹922.57 करोड़ से 70.9% बढ़कर (YoY) ₹1,577 करोड़ हो गया। हालांकि, यह कोटक इंस्टीट्यूशन सिक्युरिटीज (KIE) के 1974.4 करोड़ रुपये के अनुमान से कम रहा। कंपनी ने कहा है कि FY27 में वह 7,000 से 7,700 करोड़ रुपये के ऑपरेटिंग EBITDA का लक्ष्य रख रही है।

दूसरी ओर, चौथी तिमाही के दौरान कंपनी का EBITDA मार्जिन सालाना आधार पर 23.04% से घटकर 18.59% पर आ गया. इसका साफतौर पर मतलब यह कि कंपनी ज्यादा बेच तो रही है, लेकिन हर बिक्री पर कमाई कम रही है. यानी, मार्जिन में बाजार की उम्मीद से ज्यादा गिरावट देखने को मिली। KIE ने EBITDA मार्जिन 21.9% रहने का अनुमान लगाया था।

हर शेयर पर 20% का फाइनल डिविडेंड

कंपनी के निदेशक मंडल ने 31 मार्च 2026 को समाप्त वर्ष के लिए 10 रुपये फेस वैल्यू के प्रत्येक इक्विटी शेयर पर 2 रुपये (20 प्रतिशत) का अंतिम लाभांश देने की सिफारिश की है। हालांकि इसके लिए शेयरधारकों की आगामी वार्षिक आम बैठक (AGM) में मंजूरी लेनी जरूरी होगी।

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बोर्ड ने क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) या किसी स्वीकृत माध्यम से 10,000 करोड़ रुपये तक जुटाने की भी मंजूरी दी है, जो शेयरधारकों की स्वीकृति पर निर्भर करेगा।

विस्तार पर वारी का फोकस

वारी एनर्जीज के पूर्णकालिक निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिग्नेश राठौड़ ने कहा कि FY26 का प्रदर्शन कंपनी को नॉन-चाइनीज एनर्जी ट्रांसमिशन सेक्टर में अग्रणी बनने की दिशा में मजबूत आधार प्रदान करता है। कंपनी बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली, इनवर्टर, ट्रांसफॉर्मर, ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन तथा ग्रीन हाइड्रोजन के लिए इलेक्ट्रोलाइजर जैसे क्षेत्रों में विस्तार कर रही है।

वारी एनर्जीज ने यह भी घोषणा की कि उसने ओमान की पॉलिसिलिकॉन कंपनी यूनाइटेड सोलर होल्डिंग इंक में रणनीतिक हिस्सेदारी का अधिग्रहण पूरा कर लिया है, जिससे उसे वैश्विक विस्तार के लिए सप्लाई चेन मजबूत करने में मदद मिलेगी। कंपनी के बोर्ड ने 2,500 टन प्रति दिन क्षमता वाले ग्लास मैन्युफैक्चरिंग प्लांट के लिए 3,900 करोड़ रुपये के कैपेक्स को मंजूरी दी है।

इसके अलावा, कंपनी ने नागपुर में 6,200 करोड़ रुपये के निवेश से भारत की सबसे बड़ी 10 गीगावॉट इंटीग्रेटेड इनगॉट और वेफर फैसिलिटी के निर्माण की शुरुआत कर दी है, जिससे सोलर मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन आत्मनिर्भरता को मजबूती मिलेगी। साथ ही, गुजरात के सामखियाली में 3 गीगावॉट की अतिरिक्त मॉड्यूल क्षमता भी शुरू कर दी गई है।

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First Published - April 30, 2026 | 3:37 PM IST

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